अगर आपने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2020–21 सीरीज VII में निवेश किया है, तो यह खबर आपके काम की है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आज यानी 19 सितंबर 2026 से इस सीरीज के लिए अर्ली-एग्जिट (समय से पहले निकलने का) विंडो खोल दिया है। पात्र निवेशक 9 अक्टूबर तक रिडेम्पशन रिक्वेस्ट सबमिट कर सकते हैं, जबकि प्री-मैच्योर रिडेम्पशन की तय तारीख 19 अक्टूबर है। अगर आपके पास भी इस सीरीज के बॉन्ड हैं, तो यहां समझें सभी अहम तारीखें, टैक्स नियम और यह कि आपको इससे बाहर निकलना चाहिए या बने रहना चाहिए।
बता दें कि SGB में 5 साल पूरे होने के बाद सिर्फ ब्याज भुगतान (कूपन) की तारीखों पर ही समय से पहले निकलने की छूट मिलती है। 20 अक्टूबर 2020 को जारी की गई सीरीज VII की कूपन तारीखें हर साल 20 अप्रैल और 20 अक्टूबर के आसपास आती हैं। RBI ने वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) में भी इस किश्त के लिए अप्रैल में विंडो खोली थी। रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक, "प्री-मैच्योर रिडेम्पशन केवल उसी तारीख को हो सकता है जिस दिन ब्याज देय हो।"

SGB अर्ली रिडेम्पशन विंडो: आवेदन का तरीका, डेडलाइन और जरूरी बातें
अगर आपके बॉन्ड डीमैट फॉर्म में हैं, तो अपने डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (DP) या ब्रोकर के पास रिक्वेस्ट जमा करें। वहीं अगर बॉन्ड बैंक, पोस्ट ऑफिस या RBI रिटेल डायरेक्ट के जरिए लिए गए हैं, तो सीधे संबंधित चैनल के जरिए अप्लाई करें। ध्यान रखें कि आवेदन कूपन तारीख से कम से कम 10 दिन पहले जमा हो जाना चाहिए, क्योंकि रिसीविंग ऑफिस कूपन डेट से करीब चार दिन पहले इसे RBI के ई-कुबेर (e‑Kuber) पोर्टल पर भेजते हैं। रिडेम्पशन का पैसा सीधे आपके बैंक खाते में आएगा। अकाउंट डिटेल्स में गड़बड़ी, गिरवी (pledge) बॉन्ड या इनएक्टिव अकाउंट होने पर आवेदन खारिज हो सकता है। इसलिए अपना नाम, पैन (PAN), बैंक डिटेल्स, नॉमिनी जांच लें और अगर कोई लीन (lien) लगा हो तो उसे हटवा लें।
SGB पर टैक्स नियम 2026: मैच्योरिटी और समय से पहले एग्जिट में क्या अंतर है?
SGB पर मिलने वाला 2.50% का सालाना ब्याज निवेशक के इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से पूरी तरह टैक्स योग्य होता है। हालांकि, इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स के लिए RBI द्वारा रिडेम्पशन पर (चाहे मैच्योरिटी पर हो या तय अर्ली एग्जिट विंडो में) मिलने वाला कैपिटल गेन्स इनकम टैक्स एक्ट की धारा 47(viic) के तहत पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है। लेकिन अगर आप इसे स्टॉक एक्सचेंज पर बेचते हैं, तो नियम अलग होंगे। वहां लिस्टेड बॉन्ड के नियम लागू होते हैं, जिसमें लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स पर बिना इंडेक्सेशन 10% या इंडेक्सेशन के साथ 20% टैक्स लगता है। इसलिए, टैक्स बचाने के लिहाज से RBI के जरिए रिडेम्पशन कराना ही बेहतर विकल्प है।
SGB से बाहर निकलें या बने रहें? समझिए सही फैसला क्या होगा
अगर आपको अगले एक साल के भीतर पैसों की जरूरत है, गोल्ड ETF के जरिए बेहतर लिक्विडिटी चाहते हैं, या सोने की कीमतों में आई तेजी के बाद अपना पोर्टफोलियो रीबैलेंस करना चाहते हैं, तो एग्जिट करने पर विचार कर सकते हैं। लेकिन अगर आपका लक्ष्य टैक्स-फ्री रिडेम्पशन और लंबी अवधि के लिए सोने में निवेश बनाए रखना है, तो होल्ड करना सही रहेगा। RBI रिडेम्पशन प्राइस की गणना IBJA (इण्डियन बुलियन एण्ड ज्वैलर्स एसोसियेशन) के हालिया औसत गोल्ड रेट के आधार पर करता है, जिससे टाइमिंग का जोखिम कम हो जाता है। RBI के अक्टूबर-मार्च कैलेंडर में अन्य किश्तों की भी एग्जिट विंडो दी गई है, इसलिए अपनी सीरीज की तारीखें जरूर चेक कर लें।
SGB का ब्याज बनाम बैंक FD: आंकड़ों के जरिए समझें अंतर
SGB इश्यू प्राइस पर 2.50% का फिक्स्ड सालाना ब्याज देता है, साथ ही सोने की कीमत बढ़ने का फायदा अलग से मिलता है। इस नियमित ब्याज की तुलना मौजूदा लंबी अवधि की बैंक एफडी (FD) दरों से करके देखें। ज्यादातर बड़े बैंक रिटेल एफडी की सीमा 10 साल तक ही रखते हैं। नीचे दी गई तालिका का इस्तेमाल केवल नियमित आय को समझने के लिए करें, इसे कुल रिटर्न का अनुमान न मानें।
| अवधि | ₹1,00,000 पर SGB का सालाना ब्याज | अनुमानित FD दर (HDFC बैंक, 5 वर्ष 1 दिन से 10 वर्ष) |
|---|---|---|
| 5 साल | ₹2,500 | 6.15%–6.65% |
| 10 साल | ₹2,500 | 6.15%–6.65% |
| 15 साल | ₹2,500 | अधिकांश बैंकों में उपलब्ध नहीं |
अगर आप इस विंडो में एग्जिट करने की सोच रहे हैं, तो 9 अक्टूबर से काफी पहले आवेदन जमा कर दें। रिजेक्शन से बचने के लिए अपने बैंक खाते, पैन और प्लेज स्टेटस की दोबारा जांच जरूर कर लें। अगर आप बिना किसी दिक्कत के निवेशित रह सकते हैं, तो RBI का टैक्स-फ्री रिडेम्पशन और सोने में डायवर्सिफिकेशन का फायदा बॉन्ड को होल्ड करने के पक्ष में ही जाता है। बाजार के शोर-शराबे से दूर अपनी लिक्विडिटी और वित्तीय जरूरतों के हिसाब से ही फैसला लें।


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