15 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही कुलांचे भरते नजर आए। बाजार में आई इस उछाल के बाद अब निवेशकों के मन में यह सवाल है कि आखिर पैसा कहां लगाया जाए? क्या SIP बेहतर है या फिर एकमुश्त (Lump-sum) निवेश? वहीं, सुरक्षित निवेश चाहने वालों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) आज भी एक भरोसेमंद विकल्प बना हुआ है। अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए इन विकल्पों को बारीकी से समझना बेहद जरूरी है।
सही निवेश का चुनाव पूरी तरह आपके फाइनेंशियल गोल्स पर निर्भर करता है। अक्सर बाजार का उतार-चढ़ाव नए निवेशकों को सीधे शेयरों में पैसा लगाने से डरा देता है। ऐसे में SIP एक अच्छा रास्ता है क्योंकि यह कई महीनों में आपकी निवेश लागत को औसत (average) कर देता है। अगर आपको लगता है कि बाजार लंबे समय तक तेजी में रहेगा, तो एकमुश्त निवेश फायदेमंद हो सकता है। दूसरी ओर, बैंक डिपॉजिट वह सुरक्षा देते हैं जो उतार-चढ़ाव भरा बाजार नहीं दे सकता। सारा खेल जोखिम और अपनी जरूरतों के बीच सही तालमेल बिठाने का है।

Sensex में आज उछाल: SIP, एकमुश्त निवेश या FD, कहां मिलेगा ज्यादा रिटर्न?
आमतौर पर इक्विटी मार्केट में 5 साल के नजरिए से बेहतर रिटर्न की उम्मीद रहती है। हालांकि, शॉर्ट-टर्म में होने वाले उतार-चढ़ाव आपकी जमा-पूंजी पर तुरंत असर डाल सकते हैं। फिलहाल बैंक FD सीनियर सिटीजन्स को काफी आकर्षक ब्याज दे रहे हैं, जो सालाना 7 से 8 फीसदी तक है। अगर आप सिर्फ 6 महीने के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो डेट इंस्ट्रूमेंट्स (Debt Instruments) बेहतर विकल्प हैं। वहीं, लंबे समय के लक्ष्यों के लिए इक्विटी-लिंक्ड स्कीम्स ज्यादा फायदेमंद साबित होती हैं।
| निवेश का प्रकार | जोखिम का स्तर | सही समय सीमा |
|---|---|---|
| इक्विटी SIP | मध्यम | 3 से 5 साल |
| एकमुश्त निवेश | ज्यादा | 5 साल से ऊपर |
| बैंक FD | बहुत कम | 6 से 12 महीने |
बाजार की मौजूदा तेजी इस महीने के लिए सकारात्मक संकेत दे रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब बाजार अपने ऑल-टाइम हाई पर हो, तो भारी-भरकम एकमुश्त निवेश से बचना चाहिए। इसकी जगह मंथली SIP शुरू करना एक अनुशासित तरीका है। यह तरीका आपकी अप्रैल की सैलरी को बाजार की अचानक गिरावट से सुरक्षित रखता है। इमरजेंसी फंड के लिए आज भी बैंक की सुरक्षा ही सबसे बेहतर है। निवेश का फैसला हमेशा अपनी रिस्क लेने की क्षमता के आधार पर ही करें।
अप्रैल के इस बाजार में सावधानी और समझदारी दोनों की जरूरत है। सेंसेक्स भले ही ऊपर जा रहा हो, लेकिन अपने निवेश प्लान पर टिके रहना ही समझदारी है। इक्विटी और फिक्स्ड इनकम के बीच तालमेल बिठाकर आप पोर्टफोलियो को संतुलित रख सकते हैं। बाजार के ट्रेंड्स पर नजर जरूर रखें, लेकिन फोकस हमेशा लॉन्ग-टर्म गोल्स पर ही होना चाहिए। आज की गई स्मार्ट प्लानिंग ही आने वाले सालों में शानदार मुनाफा देगी।
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