SEBI का बड़ा एक्शन: विज्ञापनों और PMS निवेश के नियम बदले, पैसा लगाने से पहले ये 5 बातें जान लें

भारत के बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने इस हफ्ते दो बड़े मोर्चों पर नियम सख्त कर दिए हैं—पहला विज्ञापनों (Ads) पर और दूसरा पोर्टफोलियो मैनेजमेंट पर। 24 सितंबर 2026 को हुई अपनी बैठक में सेबी बोर्ड ने एक नया 'कॉमन एडवर्टाइजमेंट कोड' और पीएमएस (PMS) नियमों में बड़े बदलावों को हरी झंडी दी। निवेशकों के लिहाज से देखें, तो अब विज्ञापनों का रंग-रूप बदलने वाला है, साथ ही पीएमएस के निवेश करने और फीस लेने का तरीका भी बदलेगा। अगर आप भी निवेश करने का मन बना रहे हैं, तो पैसा लगाने से पहले ये जरूरी बातें जरूर जान लें।

नया एड कोड ब्रोकर्स, म्यूचुअल फंड्स और पोर्टफोलियो मैनेजरों समेत कुल सात कैटेगरी पर लागू होगा। वैसे तो ज्यादातर विज्ञापनों के लिए सेबी से पहले से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन अगर विज्ञापन में कोई सेलेब्रिटी है, तो पहले अप्रूवल लेना जरूरी होगा। इसके अलावा, सभी विज्ञापनों की जानकारी तीन वर्किंग दिनों के भीतर सेबी को देनी होगी। अब आपको विज्ञापनों में एक समान जोखिम चेतावनी (Risk Warnings) और पिछले परफॉर्मेंस का साफ-सुथरा ब्योरा देखने को मिलेगा। ध्यान रखें, अगर कोई मशहूर हस्ती किसी विज्ञापन में दिख रही है, तो उसे सिर्फ ब्रांड प्रमोशन समझें, न कि किसी प्रोडक्ट को खरीदने की सलाह।

SEBI New Rules 2026: Major Changes in Advertisement Code and PMS Investment Guidelines Explained

SEBI का नया एड कोड: निवेशकों के लिए जरूरी चेकलिस्ट

किसी भी ऑफर या विज्ञापन को देखते वक्त सबसे पहले कंपनी का सेबी रजिस्ट्रेशन नंबर, कॉन्टैक्ट डिटेल्स और जोखिम से जुड़ी चेतावनी (Risk Disclaimer) जरूर जांचें। अगर कहीं पक्के रिटर्न का दावा किया जा रहा हो, बेंचमार्क अपनी सहूलियत से चुने गए हों, या 'फीस माफ' के नाम पर हिडन प्लेटफॉर्म या डिस्ट्रीब्यूशन चार्ज छिपाए जा रहे हों, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। सेबी ने बिना रजिस्ट्रेशन वाले फिनफ्लूएंसर्स (Finfluencers) के साथ पेड पार्टनरशिप पर रोक बरकरार रखी है। कंपनियां सिर्फ रजिस्टर्ड एडवाइजर्स या एनालिस्ट्स के साथ ही कोलैबोरेशन कर सकती हैं।

PMS नियमों में बड़ा बदलाव: निवेशकों पर क्या होगा असर?

सेबी ने पीएमएस (PMS) के नए नियमों के साथ-साथ म्यूचुअल फंड निवेश के लिए 'PRIM' नाम के एक नए रूट को मंजूरी दे दी है। इसके जरिए पीएमएस अब ग्राहकों का पैसा डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लान्स में लगा सकेंगे। इसमें कम से कम 25 लाख रुपये का निवेश और 1 फीसदी की मैनेजमेंट फीस कैप (परफॉर्मैंस फीस के अलावा) तय की गई है। इसके अलावा, पीएमएस को आईपीओ (IPOs), विदेशी सिक्योरिटीज और तय सीमा में अनलिस्टेड डेट में भी निवेश की छूट होगी। हालांकि, कस्टडी और तिमाही रिपोर्टिंग के नियम पहले की तरह लागू रहेंगे। निवेश से पहले नेट कॉस्ट की तुलना डायरेक्ट प्लान से जरूर कर लें।

उदाहरण (सलाह नहीं)अनुमानित दर5 साल की वैल्यू (₹1 लाख)10 साल15 साल
Fixed Deposit7% p.a.₹1.40 lakh₹1.97 lakh₹2.76 lakh
Direct MF (illustrative)10% p.a.₹1.61 lakh₹2.59 lakh₹4.18 lakh
PMS (illustrative)12% p.a.₹1.76 lakh₹3.11 lakh₹5.47 lakh

ऊपर दिए गए एफडी रेट्स बैंकों के मौजूदा 6–7 फीसदी के दायरे को दर्शाते हैं; वहीं बाजार से जुड़े रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती।

ब्रोकर या म्यूचुअल फंड विज्ञापनों में इन खतरों से बचें

अगर कोई विज्ञापन "गारंटीड" या "निश्चित" रिटर्न, रेफरल बोनस, छिपे हुए पार्टनर लोगो या बिना जोखिम चेतावनी वाले पोस्टर्स दिखाए, तो सावधान हो जाएं। सेल्स काउंटडाउन और फेस्टिवल कैशबैक्स अक्सर निवेशकों का ध्यान जोखिम से भटकाने के लिए इस्तेमाल होते हैं। नए कोड के तहत, सेवा से जुड़े जरूरी मैसेज और विज्ञापनों के बीच साफ अंतर रखा गया है; प्रोमोशन के लिए सभी नियमों का पालन करना अनिवार्य है। अगर किसी ऑफर को लेकर मन में कोई संशय हो, तो कंपनी से फाइल किया गया विज्ञापन और उनके कंप्लायंस अफसर की जानकारी मांगें।

आगे क्या होगा: सेबी सर्कुलर का इंतजार

सेबी बोर्ड से मंजूरी तो मिल चुकी है, लेकिन इन नियमों को लागू करने की तारीखें, ट्रांजिशन टाइम और विस्तृत गाइडलाइंस सर्कुलर जारी होने के बाद ही साफ होंगी। तब तक निवेशकों को अपनी ओर से पूरी सावधानी बरतनी चाहिए—कंपनी का रजिस्ट्रेशन चेक करें, जोखिम समझें, सही बेंचमार्क से तुलना करें और कुल लागत (All-in costs) का हिसाब लगाएं। विज्ञापन चाहे कितने ही चकाचौंध वाले क्यों न हो जाएं, समझदारी, अनुशासन और ऑफर पेज का रिकॉर्ड संभाल कर रखना ही आपके पैसे की असली सुरक्षा है।

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