म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए बड़ी अपडेट आई है। देश के बाजार रेगुलेटर Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने 26 फरवरी 2026 को जारी नए सर्कुलर में फंड स्कीमों के ढांचे में अहम बदलाव किए हैं। इन फैसलों का मकसद निवेश को ज्यादा साफ, आसान और पारदर्शी बनाना है।

अब फंड कंपनियों को अपने प्रोडक्ट उसी तरीके से चलाने होंगे, जैसा वे नाम और कैटेगरी में दावा करती हैं। इससे निवेशकों को यह समझने में आसानी होगी कि उनका पैसा कहां लगाया जा रहा है।
इक्विटी फंड्स के लिए सख्त नियम
सबसे बड़ा बदलाव इक्विटी स्कीमों में हुआ है। अब हर फंड को अपने नाम के अनुसार ही निवेश करना अनिवार्य होगा।
मल्टी कैप फंड को कम से कम 75% रकम शेयरों में लगानी होगी।
इस हिस्से में लार्ज, मिड और स्मॉल कैप में बराबर यानी कम से कम 25-25% निवेश जरूरी होगा।
लार्ज कैप फंड को अपनी कुल संपत्ति का 80% बड़ी कंपनियों में रखना होगा।
लार्ज और मिड कैप फंड्स को दोनों वर्गों में कम से कम 35-35% निवेश करना होगा।
इन बदलावों से फंड की पहचान और उसकी रणनीति में एकरूपता आएगी।
सॉल्यूशन ओरिएंटेड कैटेगरी खत्म
अब तक बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट जैसे खास लक्ष्यों के लिए अलग कैटेगरी मौजूद थी। सेबी ने इस सॉल्यूशन ओरिएंटेड कैटेगरी को समाप्त कर दिया है। इन स्कीमों में अब नया निवेश स्वीकार नहीं किया जाएगा। मौजूदा निवेशकों की रकम को समान जोखिम वाली अन्य स्कीमों में शिफ्ट किया जाएगा।
इनकी जगह अब लाइफ साइकिल फंड्स लाए जाएंगे। इन फंड्स की खासियत यह होगी कि जैसे-जैसे निवेशक अपने लक्ष्य के करीब पहुंचेगा, फंड का जोखिम अपने आप कम होता जाएगा। शुरुआत में ज्यादा इक्विटी और बाद में ज्यादा सुरक्षित निवेश विकल्प शामिल किए जाएंगे।
पोर्टफोलियो ओवरलैप पर लगाम
अक्सर एक ही फंड हाउस की अलग-अलग स्कीमों में कई शेयर समान होते हैं। इससे निवेश में विविधता कम हो जाती है। अब सेबी ने ओवरलैप की सीमा 50% तय कर दी है। फंड कंपनियों को इसे घटाने के लिए तीन साल का समय दिया गया है। अगर वे तय सीमा का पालन नहीं करतीं, तो संबंधित स्कीमों को मिलाया जा सकता है। हर महीने पोर्टफोलियो से जुड़ा डेटा सार्वजनिक करना भी अनिवार्य होगा।
डेट और हाइब्रिड फंड्स में नई सुविधा
डेट फंड्स के लिए कुछ परिस्थितियों में निवेश की अवधि कम करने की अनुमति दी गई है, लेकिन इसके लिए ट्रस्टियों को लिखित जानकारी देनी होगी।
हाइब्रिड फंड्स को अब गोल्ड, सिल्वर ETF और InvITs में निवेश की ज्यादा छूट दी गई है। इससे निवेश का दायरा बढ़ेगा और जोखिम संतुलित रहेगा।
साथ ही, सेक्टोरल डेट फंड नाम से एक नई कैटेगरी भी शुरू की जाएगी, जो केवल चुनिंदा सेक्टर के अच्छे रेटिंग वाले साधनों में निवेश करेगी।
निवेशकों के लिए क्या जरूरी?
इन नए नियमों से निवेश पहले से ज्यादा साफ और व्यवस्थित होगा। अब फंड का नाम और उसका निवेश मेल खाएगा। अगर आपने पहले से किसी म्यूचुअल फंड में पैसा लगाया है, तो उसकी नई शर्तें जरूर जांच लें। जरूरत पड़े तो सलाहकार से राय लें।
सेबी का यह कदम बाजार में भरोसा बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। आने वाले समय में निवेशकों को ज्यादा साफ जानकारी और बेहतर विकल्प मिलने की उम्मीद है।
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