7 सितंबर से एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) ट्रेडिंग से जुड़े सेबी (SEBI) के नए नियम लागू हो रहे हैं। इनमें बेस प्राइस का नए सिरे से तय होना, डायनामिक प्राइस बैंड्स, प्री-ओपन कॉल ऑक्शन और क्लोज-आउट नियमों में स्पष्टता शामिल है। अगर आप ईटीएफ में ट्रेड करते हैं, तो अब आपके ऑर्डर एग्जीक्यूशन, स्प्रेड और ऑर्डर एक्सेप्टेंस का तरीका बदल सकता है। ब्रोकरों और एक्सचेंजों को तैयारी का वक्त देने के लिए पिछले शुक्रवार को ही इन नियमों की मियाद एक हफ्ते बढ़ाई गई थी।
सेबी के सर्कुलर के मुताबिक ट्रेडिंग का बेसिक ढांचा बदल रहा है। अब बेस प्राइस T-2 दिन की एनएवी (NAV) की बजाय T-1 दिन के वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) से तय होगा। वहीं 1 अप्रैल 2027 से इसे T-1 क्लोजिंग एनएवी पर शिफ्ट करने का लक्ष्य है। इसके अलावा, तयशुदा ±20 फीसदी का प्राइस बैंड अब डायनामिक होगा, जो ±10 फीसदी से शुरू होकर कूलिंग-ऑफ पीरियड के बाद 5-5 फीसदी के स्टेप्स में बढ़ सकेगा। साथ ही, ईटीएफ के लिए खास प्री-ओपन कॉल ऑक्शन भी शुरू किया जा रहा है।

SEBI के नए ETF ट्रेडिंग नियम: पहले और अब में क्या बदला?
| फीचर | 7 सितंबर से पहले | 7 सितंबर के बाद |
|---|---|---|
| बेस प्राइस | T-2 दिन की क्लोजिंग NAV | अभी T-1 VWAP; 1 अप्रैल 2027 तक T-1 क्लोजिंग NAV |
| प्राइस बैंड | फिक्स्ड ±20 फीसदी | डायनामिक बैंड (±10% से शुरुआत, 5% के स्टेप्स में बदलाव, अधिकतम ±20%) |
| प्री-ओपन | ईटीएफ के लिए कोई खास ऑक्शन नहीं | ईटीएफ प्री-ओपन कॉल ऑक्शन से तय होगा ओपनिंग प्राइस |
| क्लोज-आउट | सामान्य इक्विटी नियम लागू | ईटीएफ के लिए स्टैंडर्ड नियम; कैश-लाइक ईटीएफ के लिए स्पेशल प्राइसिंग |
ईटीएफ प्री-ओपन सेशन में एक्सचेंज सभी ऑर्डर्स को एक साथ पूल करके एक ऐसा प्राइस तय करेंगे, जिस पर सबसे ज्यादा वॉल्यूम ट्रेड हो सके। इसके बाद इसी भाव पर मार्केट खुलेगा। मार्केट ऑर्डर्स रेफरेंस बैंड के भीतर ही रहेंगे, लेकिन अगर मार्केट में लिक्विडिटी कम हुई तो ऑर्डर रिजेक्ट हो सकते हैं या स्लिपेज देखने को मिल सकती है। इसलिए मार्केट खुलते ही जल्दबाजी में मार्केट ऑर्डर लगाने के बजाय फेयर वैल्यू के करीब लिमिट ऑर्डर लगाना ज्यादा सही रहेगा।
iNAV, प्राइस बैंड और रिटेल निवेशकों के लिए ऑर्डर स्ट्रैटेजी
ट्रेडिंग करते समय इंट्राडे इंडिकेटिव नेट एसेट वैल्यू (iNAV) को आधार बनाएं। स्टॉक एक्सचेंज की वेबसाइट पर iNAV हर 15 सेकंड में अपडेट होता है। उदाहरण के लिए, अगर iNAV 100 रुपये है और बेस्ट सेलिंग प्राइस 101.2 रुपये दिख रहा है, तो इसका मतलब है कि आप 1.2 फीसदी प्रीमियम दे रहे हैं। ऐसे में 100.5 रुपये का लिमिट ऑर्डर लगाना बेहतर विकल्प होगा। इसके अलावा, अगर डिस्काउंट लगातार सात ट्रेडिंग सेशन तक एक फीसदी से ज्यादा रहता है, तो एएमसी (AMC) की लिक्विडिटी विंडो पर नजर रखें।
अलग-अलग कैटेगरी के ETFs पर नए ट्रेडिंग नियमों का असर
इक्विटी, डेट, गोल्ड और इंटरनेशनल ETFs—ये सभी अब नए बेस-प्राइस और प्राइस बैंड के दायरे में आएंगे। हालांकि, ओवरनाइट और लिक्विड ईटीएफ के लिए 5 फीसदी का सख्त प्राइस बैंड ही लागू रहेगा। किसी एक एक्सचेंज पर प्राइस बैंड फ्लेक्स होने पर वह दूसरे एक्सचेंजों के साथ भी सिंक हो जाएगा, जिससे आर्बिट्राज (Arbitrage) की गुंजाइश खत्म होगी। वहीं, कैश-लाइक ETFs के लिए क्लोज-आउट प्राइस रेफरेंस क्लोजिंग या हालिया हाई में से जो भी ज्यादा हो, उसके आधार पर तय किया जाएगा।
ETF बनाम FD: 5, 10 और 15 साल का तुलनात्मक नजरिया
| अवधि | निफ्टी 50 TRI CAGR | बैंक एफडी की मौजूदा दरें |
|---|---|---|
| 5 साल | 8.16% | 6.5%–7.0% |
| 10 साल | 11.97% | 6.5%–7.0% |
| 15 साल | 12.05% | 6.5%–7.0% |
नए नियमों के पहले हफ्ते की चेकलिस्ट: शेयर का भाव iNAV से जरूर मिलाएं; हमेशा लिमिट ऑर्डर का इस्तेमाल करें; बाजार खुलते ही मार्केट ऑर्डर लगाने से बचें; अपने ब्रोकर ऐप में प्राइस-बैंड अलर्ट्स ऑन रखें और प्री-ओपन ऑर्डर सपोर्ट व डिफॉल्ट ऑर्डर टाइप जांच लें। लंबी अवधि के निवेशक अपनी रणनीति पर कायम रह सकते हैं, लेकिन सही तरीके से ऑर्डर प्लेस करने से बेवजह लगने वाले खर्चों से बचा जा सकेगा।


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