F&O में 87% ट्रेडर्स को भारी नुकसान: क्या अब SIP और हाइब्रिड फंड्स में शिफ्ट होना ही समझदारी है?

SEBI की 20 अगस्त 2026 की ताजा रिपोर्ट ने वीकेंड पर रिटेल निवेशकों के बीच Futures & Options (F&O) के जोखिमों को लेकर बहस फिर से तेज कर दी है। सेबी का यह आंकड़ा साफ और कड़वा सच बयां करता है—बिना अनुशासन के डेरिवेटिव मार्केट में दांव लगाना अब भी ट्रेडर्स को भारी पड़ रहा है। ऐसे में सोमवार को बाजार खुलने से पहले कई निवेशक अब F&O का जोखिम छोड़कर अनुशासित तरीके से SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) और सुरक्षित हाइब्रिड फंड्स की राह चुनने का मन बना रहे हैं। अब असल सवाल बाजार से रातों-रात बड़ा मुनाफा कमाने का नहीं, बल्कि पैसे बचाने और अनुशासन के साथ टिके रहने का है।

सेबी की वित्त वर्ष 2026 (FY26) की प्रॉफिटेबिलिटी स्टडी से पता चलता है कि 87.7% रिटेल ट्रेडर्स को F&O में घाटा हुआ है, जो FY25 के 91% के मुकाबले मामूली सुधार दिखाता है। कुल घाटा घटकर करीब ₹91,685 करोड़ भले ही रह गया हो, लेकिन प्रति ट्रेडर औसतन नुकसान बढ़कर लगभग ₹1.17 लाख तक पहुंच गया। सबसे ज्यादा नुकसान ऑप्शंस ट्रेडिंग में हुआ, जहां एक्सपायरी के करीब सौदे लेने की वजह से घाटा और बढ़ गया। हैरानी की बात यह भी रही कि मुनाफा कमाने वाले ट्रेडर्स को अपनी कमाई का 15 से 50 फीसदी हिस्सा ब्रोकरेज और अन्य चार्जेस में देना पड़ा।

SEBI F&O Report 2026: Why Retail Traders Are Shifting to SIP and Hybrid Funds for Wealth Creation

SEBI F&O प्रॉफिटेबिलिटी स्टडी: आखिर क्या हैं इसके असली मायने?

रिपोर्ट साफ इशारा करती है कि रिटेल ट्रेडर्स को गलत टाइमिंग, स्लिपेज और बार-बार सौदे बदलने की वजह से भारी ट्रांजैक्शन कॉस्ट झेलनी पड़ती है। हालांकि F&O में रिटेल ट्रेडर्स की भागीदारी थोड़ी घटी है, फिर भी घाटा उठाने वालों का आंकड़ा बेहद चिंताजनक है। इसके विपरीत, इंडेक्स में अनुशासित निवेश का ट्रैक रिकॉर्ड काफी बेहतर रहा है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, Nifty 50 इंडेक्स ने बीच-बीच में भारी गिरावट के बावजूद पिछले 10 वर्षों में लगभग 12% का CAGR रिटर्न दिया है। वहीं, आर्बिट्राज फंड्स ने बेहद कम उतार-चढ़ाव के साथ 1 साल में 6 से 7% का स्थिर रिटर्न दिया है। यानी वेल्थ क्रिएशन का सीधा नियम है—कम और अनुशासित फैसले, ज्यादा कंपाउंडिंग।

F&O बनाम SIP: टैक्स, लागत और रिटर्न का पूरा गणित

F&O से होने वाली कमाई पर आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से 'बिजनेस इनकम' की तरह टैक्स लगता है। अगर आप सेक्शन 44AD के तहत तय सीमा से कम मुनाफा दिखाते हैं, तो आपको प्रॉपर बुक्स ऑफ अकाउंट्स मेंटेन करने और ऑडिट कराने की जरूरत पड़ सकती है। दूसरी तरफ, इक्विटी SIP में शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) पर 20% टैक्स लगता है, जबकि ₹1.25 लाख से अधिक के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर 12.5% टैक्स देना होता है। टैक्स के बाद आपकी जेब में कितना रिटर्न आएगा, इसे समझने के लिए नीचे दी गई टेबल देखें:

इन्वेस्टमेंट ऑप्शन1 साल का अनुमानित रिटर्न / दरटैक्स से जुड़ी अहम बात
बैंक FD (1-साल)~6.2% से 7.5%ब्याज पर इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स
आर्बिट्राज फंड (Arbitrage fund)~6% से 7%STCG 20%; 12 महीने बाद LTCG 12.5% (₹1.25 लाख से ऊपर)
ओवरनाइट फंड (Overnight fund)~5.2% से 5.6%आमतौर पर इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स

बैंक FD का दायरा बैंकों के मौजूदा रेट रीसेट को दिखाता है, जबकि आर्बिट्राज और ओवरनाइट फंड्स के आंकड़े हालिया परफॉर्मेंस पर आधारित हैं। टैक्स कटने के बाद के असली रिटर्न की तुलना करने से पहले अपनी टैक्स स्लैब और निवेश की समय-सीमा की जांच जरूर कर लें।

F&O बनाम SIP: सोमवार के लिए आपका एक्शन प्लान क्या होना चाहिए?

बाजार की खबरों के बहकावे में आने के बजाय अपनी रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से पोर्टफोलियो तय करें। **कंजर्वेटिव निवेशक (कम जोखिम):** 70% पैसा FD/आर्बिट्राज, 25% निफ्टी ETF SIP और 5% गोल्ड में लगाएं। **मॉडरेट निवेशक (मध्यम जोखिम):** 50% FD/आर्बिट्राज, 40% इक्विटी SIP और 10% गोल्ड में आवंटन करें। **एग्रेसिव निवेशक (ज्यादा जोखिम):** 20% सुरक्षित जगह (FD/आर्बिट्राज), 70% इक्विटी SIP और 10% गोल्ड में निवेश कर सकते हैं। **सोमवार के लिए चेकलिस्ट:** नई SIP शुरू करें या पुरानी SIP का अमाउंट बढ़ाएं, अपनी ट्रेडिंग पोजीशन का साइज सीमित रखें, नुकसान सहने की सीमा (Stop-loss) पहले से तय करें और ट्रेड करने से पहले टैक्स का गणित समझ लें।

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