15 अक्टूबर 2026 को बाजार नियामक सेबी (SEBI) की सेकेंडरी मार्केट एडवाइजरी कमेटी (SMAC) क्लोजिंग ऑक्शन सेशन से जुड़े फीडबैक की समीक्षा के लिए बैठक कर रही है। इस सिंगल-पॉइंट एजेंडे से शेयरों के क्लोजिंग प्राइस और डेरिवेटिव्स सेटलमेंट की पूरी प्रक्रिया बदल सकती है। सूत्रों के मुताबिक, सेटलमेंट के दो विकल्पों और एक नए सर्कुलर पर चर्चा हो रही है, हालांकि अभी कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं है। एक्टिव ट्रेडर्स के लिए यह फैसला बेहद अहम और तुरंत असर डालने वाला है।
बता दें कि 3 अगस्त 2026 को लागू हुए नए नियमों के तहत क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) ने 30 मिनट के पुराने VWAP तरीके की जगह 20 मिनट का कॉल ऑक्शन शुरू किया था। पहले चरण में इसे फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) के शेयरों में लागू किया गया है। इन शेयरों में रेगुलर ट्रेडिंग दोपहर 3:15 बजे बंद हो जाती है और 3:35 बजे तक ऑक्शन चलता है, जिसमें 3 फीसदी का प्राइस बैंड होता है। इसके लिए दोपहर 3:00 से 3:15 बजे के VWAP को रेफरेंस माना जाता है।

Closing Auction Session: जानें आज की SMAC बैठक का एजेंडा और संभावित बदलाव
आज की बैठक में सेबी द्वारा पहले प्रस्तावित कुछ अहम बदलावों पर चर्चा हो रही है। इनमें मार्केट ऑर्डर्स को निष्पादित करने में प्राथमिकता देना और कुल व मार्केट ऑर्डर इम्बैलेंस का रियल-टाइम डेटा दिखाना शामिल है। इसके अलावा, रेफरेंस विंडो को घटाकर दोपहर 3:00 से 3:15 बजे तक सीमित किया जा सकता है। वहीं, पैसिव फंड्स ने नेगेटिव कैश से बचने के लिए ओवरनाइट बॉरोइंग की मांग की है। कमेटी इन सभी सुझावों पर विचार करने के बाद ही आगे की सिफारिशें देगी।
Closing Auction Session: इंट्राडे ट्रेडर्स, स्प्रेड्स और ब्रोकेर्स पर असर
इन बदलावों के चलते इंट्राडे ट्रेडर्स को अपनी टाइमिंग बदलनी होगी। कई ब्रोकेर्स अब CAS वाले शेयरों को दोपहर करीब 3:12 बजे ही ऑटो स्क्वेयर-ऑफ कर रहे हैं। यानी पारंपरिक 3:25 बजे का स्क्वेयर-ऑफ समय अब इन शेयरों पर लागू नहीं होता। ऑक्शन का समय करीब आते ही लिक्विडिटी कम हो सकती है और स्प्रेड्स चौड़े हो सकते हैं। इस बीच सेबी प्रमुख ने सख्त चेतावनी दी है, "नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) सिस्टम में किसी भी तरह की हेरफेर से सख्ती से निपटा जाएगा।"
Closing Auction Session: कम्पाउंडिंग बनाम FD — 5, 10 और 15 सालों का हिसाब
| अवधि | 7% पर FD | 12% पर इक्विटी |
|---|---|---|
| 5 साल | Rs 1,40,255 | Rs 1,76,234 |
| 10 साल | Rs 1,96,715 | Rs 3,10,585 |
| 15 साल | Rs 2,75,911 | Rs 5,47,394 |
| अजम्प्शन्स | Rs 1,00,000; वार्षिक कम्पाउंडिंग | केवल उदाहरण के लिए |
इस टेबल में अक्टूबर के आधार पर बैंक एफडी की ब्याज दर 7 फीसदी मानी गई है। वहीं इक्विटी के लिए 12 फीसदी रिटर्न लिया गया है, जो निफ्टी 50 के लंबी अवधि के आंकड़ों का औसत है। ये सिर्फ समझाने के लिए दिए गए आंकड़े हैं, कोई गारंटी नहीं। इससे समझा जा सकता है कि क्लोजिंग प्राइस की सटीकता का आपकी सालों की बचत और रिटर्न पर कितना बड़ा असर पड़ता है।
इसलिए अभी से तैयारी रखें और अपनी एग्जिट रणनीति पहले ही बना लें। ऑक्शन के रैंडम क्लोज के समय बड़े मार्केट ऑर्डर देने से बचें। दोपहर 3:20 से 3:30 बजे के बीच इंडिकेटिव क्लोज और ऑर्डर इम्बैलेंस पर नजर रखें। दोपहर 2:45 बजे तक अपने ब्रोकर के टाइमिंग अलर्ट्स जरूर चेक कर लें। अगर सेबी इन बदलावों को मंजूरी देता है, तो एक्सचेंज नए सर्कुलर जारी करेंगे और पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेंगे। आखिरी वक्त का इंतजार किए बिना आज ही अपनी ट्रेडिंग रणनीति अपडेट कर लें।


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