SEBI New Rules: देश में करोड़ों रुपए ऐसे निवेश खातों में पड़े हैं जिन पर कोई दावा नहीं किया जाता। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि लोग निवेश करते समय नॉमिनेशन नहीं करते या उसे बाद में टाल देते हैं। इसी समस्या को कम करने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने नॉमिनेशन प्रक्रिया को आसान बनाने का नया प्रस्ताव सामने रखा है।

क्या बदलने वाला है?
SEBI का मानना है कि अगर नॉमिनेशन को आसान और जरूरी बनाया जाए, तो लोग इसे नजरअंदाज नहीं करेंगे। इसलिए अब डिमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड फोलियो खोलते समय नॉमिनेशन को डिफॉल्ट विकल्प बनाने की बात कही गई है। इससे हर नया निवेश अपने आप सुरक्षित दायरे में आ जाएगा।
कम जानकारी, आसान प्रक्रिया
अक्सर निवेशक लंबी-चौड़ी जानकारी भरने से बचते हैं। इस परेशानी को देखते हुए अब सिर्फ नॉमिनी का नाम और उसका निवेशक से रिश्ता बताना जरूरी होगा। बाकी डिटेल्स जैसे पता या मोबाइल नंबर देना जरूरी नहीं रहेगा। इससे खाता खोलने की प्रक्रिया तेज और आसान होगी।
नॉमिनी की संख्या तय
नए प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि एक निवेशक अधिकतम 4 नॉमिनी जोड़ सकेगा। इससे पहले ज्यादा संख्या पर विचार हुआ था, लेकिन उसे व्यवहार में लागू करना मुश्किल माना गया।
हिस्सेदारी का नियम
अगर निवेशक यह तय नहीं करता कि किस नॉमिनी को कितना हिस्सा मिलेगा, तो सभी नॉमिनी को बराबर हिस्सेदारी दी जाएगी। इससे बाद में झगड़े या कानूनी उलझन कम हो सकती है।
नॉमिनेशन से इनकार भी आसान नहीं
अगर कोई व्यक्ति नॉमिनेशन नहीं करना चाहता, तो उसे एक साफ घोषणा देनी होगी। यानी अब चुपचाप नॉमिनेशन छोड़ने का विकल्प खत्म किया जा रहा है।
निवेशकों के लिए क्यों फायदेमंद?
इन बदलावों का मकसद सिर्फ नियम बदलना नहीं, बल्कि निवेश को सुरक्षित बनाना है।
परिवार को पैसा मिलने में देरी नहीं होगी
कागजी काम कम होगा
ज्यादा लोग नॉमिनेशन करेंगे
अनक्लेम्ड रकम में कमी आएगी
आगे क्या होगा?
SEBI ने इस प्रस्ताव पर लोगों से सुझाव भी मांगे हैं। तय समय के बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा और फिर इन्हें लागू किया जा सकता है।
अगर आप निवेश करते हैं, तो नॉमिनेशन को नजरअंदाज न करें। यह एक छोटा लेकिन बेहद जरूरी कदम है, जो भविष्य में आपके परिवार को आर्थिक सुरक्षा दे सकता है। SEBI के ये नए प्रयास निवेशकों के लिए राहत भरी खबर माने जा रहे हैं।


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