SBI MF JanNivesh SIP: देश के जाने-माने फंड हाउस एसबीआई म्यूचुअल फंड ने बड़ा ऐलान किया है. स्मॉल इनवेस्टर्स के लिए कंपनी ने छोटकू एसआईपी की शुरुआत की है. इसमें केवल 250 रुपए के निवेश से एसआईपी (SIP) की जा सकती है. दरअसल, स्टेट बैंक और एसबीआई म्यूचुअल फंड ने मिलकर नया फंड जननिवेश एसआईपी स्कीम (JanNivesh SIP Scheme) शुरू किया है. इस स्कीम का मकसद स्मॉल इनवेस्टर्स, पहली बार निवेश करने वालों और गांव-शहर में रहने वाले लोगों को म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) से जोड़ने का है.
जननिवेश एसआईपी को लेकर मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) की चेयरपर्सन मधुबी पुरी बुच ने कहा कि 250 रुपए का एसआईपी (SIP) एक व्यक्तिगत आकांक्षा रही है. इस पहल का उद्देश्य भारतीय परिवारों के लिए छोटे पैमाने पर निवेश को आसान बनाना है, जिससे संभावित रूप से लाखों लोगों के लिए फंड जमा करने में सहायता मिल सके.
इसी साल किया था सेबी ने ऐलान
मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने स्कीम लॉन्च से पहले 22 जनवरी को एक कंसल्टेशन लेटर जारी किया था. इसका मकसद डिस्ट्रिब्युटर्स को कम लागत वाले एसआईपी को बढ़ावा देने के लिए प्रमोट करना रहा. इस लेटर में पहली बार म्यूचुअल फंड (SBI MF) में निवेश करने वालों को 500 रुपए का प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव था. इससे लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और लंबी अवधि के निवेश की आदतों को बढ़ावा मिलेगा.

जननिवेश एसआईपी का मकसद
JanNivesh SIP को कम पैसों से इन्वेस्टमेंट शुरू करने चाह रखने वाले निवेशकों के लिए तैयार किया गया है. इस स्कीम में निवेश की शुरुआत केवल 250 रुपए से शुरू किया जा सकता है. निवेशक स्कीम में रोजाना, वीकली या मंथली आधार पर अपनी सुविधा के लिहाज से SIP कर सकते हैं.
माइक्रो-एसआईपी में चुनौतियां और अवसर
माइक्रो-एसआईपी (Micro SIP) शुरू करने से आर्थिक स्थिरता की चुनौतियां सामने आती हैं. सेबी चेयरपर्सन बुच ने बताया कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने पहले 100 रुपए और 500 रुपए के एसआईपी प्रोडक्ट पेश किए हैं. हालांकि, हाई ऑपरेटिंग कॉस्ट की वजह से इनका व्यापक प्रचार नहीं किया गया. सफलता के लिए यह सुनिश्चित करना अहम है कि ब्रेक-ईवन अवधि दो या तीन साल के भीतर हो.
रकम जुटाने के लिए सेबी का नजरिया
सेबी (SEBI) प्रमुख ने भारतीय परिवारों के लिए धन सृजन पर ऐसे निवेशों के संभावित प्रभाव पर जोर दिया. छोटे पैमाने पर निवेश को सक्षम करके, यह पहल पूरे देश में वित्तीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है.
बुच ने कहा कि इसे सफल बनाने के लिए हमें यह सुनिश्चित करना था कि ब्रेक-ईवन अवधि दो या तीन साल के भीतर हो. उन्होंने कहा कि इस अवधि को बढ़ाने से सीईओ इस पहल को आगे बढ़ाने से कतराएँगे.
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