21 अक्टूबर को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने 'डेटा लीक' की एक घटना की पुष्टि की है। करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड्स के लीक हुए डेटा सेट की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहकों की निजी जानकारियां पाई गई हैं। बैंक ने इस मामले में CERT-In से मान्यता प्राप्त सुरक्षा एजेंसी की सेवाएं ली हैं और साफ किया है कि उसकी बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह सुरक्षित और सुचारू हैं। फिर भी, इसे एक गंभीर सुरक्षा अलर्ट मानते हुए तुरंत जरूरी कदम उठाएं।
सबसे पहले अपने बैंक खातों और कार्ड्स की सिक्योरिटी मजबूत करें। नेटबैंकिंग और मोबाइल ऐप का पासवर्ड तुरंत बदलें और नया UPI PIN सेट करें। अपने खाते पर एक्टिव UPI Autopay और ई-मैंडेट (e-mandates) को रिव्यू करके रद्द कर दें। सभी डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स पर टैप-टू-पे (tap-to-pay) और इंटरनेशनल इस्तेमाल की सुविधा बंद कर दें। इसके अलावा ATM से कैश निकासी, ऑनलाइन पेमेंट और UPI की डेली लिमिट घटाएं और रियल-टाइम SMS अलर्ट्स चालू रखें। पिछले 90 दिनों के ट्रांजैक्शन की अच्छी तरह जांच करें। अगर जरा भी शक हो, तो कार्ड्स को ब्लॉक करके नया जारी करवाएं और जरूरत पड़ने पर चेक पेमेंट रुकवा दें।

SBI डेटा लीक: ग्राहकों की जिम्मेदारी, शिकायत की समय-सीमा और कहां करें रिपोर्ट
आरबीआई (RBI) के नियमों के मुताबिक, अगर आपके खाते से कोई फर्जी ट्रांजैक्शन होता है और आप 3 वर्किंग डेज के भीतर इसकी सूचना देते हैं, तो आपकी कोई वित्तीय जिम्मेदारी (जीरो लायबिलिटी) नहीं होगी। 4 से 7 दिनों में रिपोर्ट करने पर आपका नुकसान प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम 10,000 रुपये तक सीमित रहेगा। बैंकों को 10 वर्किंग डेज के भीतर प्रोविजनल रिफंड (Shadow-reverse) देना होता है और 90 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करना जरूरी है। साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत संख्या और पावती (acknowledgement) को संभालकर रखें।
बैंक, UPI और कार्ड्स रखें सुरक्षित: DPDP अधिकार और फििशंग का खतरा
अपने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिकारों का इस्तेमाल करें। इसके लिए SBI के डेटा प्रोटेक्शन ऑफिसर (DPO) को ईमेल भेजकर जानें कि क्या आपकी निजी जानकारी लीक हुई है और कौन-कौन से डेटा फील्ड्स प्रभावित हुए हैं। बैंक से डेटा लीक का पता चलने की तारीख, उठाए गए सुधारात्मक कदम और औपचारिक नोटिस की मांग करें। DPDP नियमों के तहत प्रभावित लोगों और डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड को सूचना देना अनिवार्य है, जिसे 2027 तक चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। अगले 48 से 72 घंटों में ठगी के लिए फर्जी कॉल और मैसेज (Phishing) बढ़ सकते हैं, इसलिए अपना OTP या UPI PIN किसी के साथ शेयर न करें।
SBI डेटा लीक के बाद: बुजुर्गों की सुरक्षा, शिकायत का समाधान और क्रेडिट स्कोर पर नजर
अपने घर के बुजुर्गों और संवेदनशील यूजर्स के खातों की सुरक्षा के लिए केयरगिवर अलर्ट सेट करें और SMS अलर्ट पाने के लिए भरोसेमंद नंबर जोड़ें। अगर बैंक शिकायत के निपटारे में देरी करता है, तो मामले को ब्रांच मैनेजर और नोडल ऑफिसर के पास ले जाएं। इसके बाद भी समस्या हल न हो, तो आरबीआई की एकीकृत लोकपाल योजना (Integrated Ombudsman Scheme) में शिकायत दर्ज कराएं। सिम-स्वैप (SIM-swap) फ्रॉड से बचने के लिए अपनी टेलीकॉम कंपनी से सिम-लॉक इनेबल कराएं। अपने ईमेल का पासवर्ड बदलें और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) ऑन रखें। किसी भी नए या अनधिकृत खाते की जांच के लिए अपनी क्रेडिट रिपोर्ट पर लगातार नजर रखें।


Click it and Unblock the Notifications