ज्यादातर भारतीय अपने खून-पसीने की कमाई को सुरक्षित रखने के लिए सेविंग्स अकाउंट पर ही भरोसा करते हैं। लेकिन बैंक अक्सर यह बात छिपा जाते हैं कि महंगाई किस तरह आपके पैसे की वैल्यू को कम कर रही है। भले ही आपका बैंक बैलेंस सुरक्षित दिखे, लेकिन ब्याज दरें कम होने की वजह से उसकी असल खरीदारी क्षमता (purchasing power) घट जाती है। आज के दौर में हर समझदार बचतकर्ता के लिए इन बारीकियों को समझना बेहद जरूरी है ताकि वे अपने वित्तीय भविष्य के लिए सही फैसले ले सकें।
भारत के कई बड़े बैंक फिलहाल सेविंग्स अकाउंट पर 2.7 प्रतिशत से 4 प्रतिशत तक का ब्याज दे रहे हैं। वहीं, रिटेल महंगाई दर अक्सर 5 प्रतिशत या उससे भी ज्यादा रहती है। इसका सीधा मतलब यह है कि आप तकनीकी रूप से हर साल पैसा खो रहे हैं। आपको तुरंत चेक करना चाहिए कि क्या आपका बैंक 'स्वीप-इन' (sweep-in) सुविधा देता है। यह एक बेहतरीन फीचर है जो आपके खाते में पड़े एक्स्ट्रा कैश पर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) जैसा ज्यादा रिटर्न दिलाने में मदद करता है।

बैंकिंग के छिपे हुए चार्ज और बचत की कड़वी सच्चाई
कम ब्याज के अलावा, कई छिपे हुए चार्ज भी साल भर आपके बैलेंस को चुपचाप कम करते रहते हैं। बैंक आपसे SMS अलर्ट और डेबिट कार्ड के सालाना मेंटेनेंस के नाम पर पैसे वसूलते हैं। इसके अलावा, महीने में तय सीमा से ज्यादा ATM ट्रांजेक्शन करने पर भी आपको जेब ढीली करनी पड़ती है। ये छोटी-छोटी कटौतियां समय के साथ आपकी कुल बचत को काफी कम कर देती हैं। इन फालतू खर्चों को पहचानने और रोकने के लिए आपको हर महीने अपना बैंक स्टेटमेंट जरूर चेक करना चाहिए। सतर्क रहकर ही आप अपनी जमा पूंजी को बचा सकते हैं।
| चार्ज का प्रकार | अनुमानित रेंज | कब लगता है |
|---|---|---|
| डेबिट कार्ड फीस | ₹150 से ₹500 | सालाना |
| लो बैलेंस पेनल्टी | ₹200 से ₹600 | मंथली |
| SMS अलर्ट चार्ज | ₹15 से ₹25 | हर तीन महीने में |
मिनिमम बैलेंस का बोझ और बचत के बेहतर विकल्प
एवरेज मंथली बैलेंस (AMB) को मेंटेन करना कई ग्राहकों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन जाता है। अगर आपका बैलेंस जरा भी कम हुआ, तो बैंक भारी जुर्माना लगा देते हैं, जो अक्सर आपके महीने भर के ब्याज से भी ज्यादा होता है। ऐसे में खाते में फालतू पैसा रखने के बजाय आप 'लिक्विड म्यूचुअल फंड' जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। यहां आपको जरूरत पड़ने पर पैसा निकालने की आजादी भी मिलती है और रिटर्न भी सेविंग्स अकाउंट के मुकाबले बेहतर होता है।
सेविंग्स अकाउंट को दौलत बनाने के बजाय सिर्फ कैश की तुरंत जरूरत (liquidity) पूरा करने का जरिया समझना चाहिए। इन छिपे हुए खर्चों के प्रति जागरूक होकर आप अपने फंड का सही इस्तेमाल कर सकते हैं। स्वीप-इन अकाउंट जैसे विकल्पों को अपनाकर आप बैंकों को अपनी मेहनत की कमाई पर मुनाफा कमाने से रोक सकते हैं। अपनी फाइनेंशियल स्ट्रैटेजी में ये छोटे बदलाव आपके बैंक बैलेंस की सेहत सुधार सकते हैं। आज ही कमान अपने हाथ में लें ताकि आपका पैसा वाकई आपके लिए काम करना शुरू करे।


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