भारत में बहुत से नौकरीपेशा लोग जानकारी के अभाव में अपनी मेहनत की कमाई इनकम टैक्स के रूप में गंवा देते हैं। अच्छी बात यह है कि टैक्स बचाने के लिए हमेशा निवेश करना या फंड्स को लॉक करना जरूरी नहीं है। अगर आप अपनी सैलरी के अलग-अलग हिस्सों (Salary Components) की स्मार्ट प्लानिंग करें, तो हर महीने ज्यादा कैश बचा सकते हैं। यह रणनीति उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो लंबी अवधि की बचत के बजाय अपने पास नकदी (Liquidity) रखना पसंद करते हैं। इससे आप टैक्स का बोझ कम करते हुए अपनी लाइफस्टाइल को भी बेहतर बनाए रख सकते हैं।
सैलरीड क्लास के लिए सबसे बड़ा फायदा 'स्टैंडर्ड डिडक्शन' (Standard Deduction) है। यह एक ऐसी छूट है जो हर कर्मचारी की कुल कमाई से सीधे घटा दी जाती है। न्यू टैक्स रिजीम (NTR) में अब यह फायदा ₹75,000 का है, जबकि ओल्ड टैक्स रिजीम (OTR) में टैक्सपेयर्स के लिए यह ₹50,000 है। खास बात यह है कि इस खास छूट का दावा करने के लिए आपको कोई बिल या रसीद दिखाने की जरूरत नहीं होती।

बिना किसी निवेश के सैलरी पर ऐसे बचाएं टैक्स, बस इन अलाउंस का करें इस्तेमाल
हाउस रेंट अलाउंस (HRA) टैक्स योग्य आय को कम करने का एक बेहद असरदार तरीका है। अगर आप किराए के मकान में रहते हैं, तो आप इस छूट का फायदा उठा सकते हैं। इस बेनिफिट के लिए आपको अपने एम्प्लॉयर को रेंट रसीद देनी होगी। ओल्ड टैक्स रिजीम (OTR) में यह आज भी टैक्स बचाने के सबसे बड़े टूल्स में से एक है, क्योंकि यह सीधे उस इनकम को कम कर देता है जिस पर सरकार टैक्स कैलकुलेट करती है।
ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत प्रोफेशनल टैक्स (PT) पर भी डिडक्शन मिलता है। ज्यादातर राज्यों में सैलरी से हर महीने एक छोटी रकम काटी जाती है, जिसे आप अपनी कुल टैक्सेबल इनकम से घटा सकते हैं। इसके अलावा, लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA) के जरिए आप 4 साल में दो बार देश के अंदर घूमने-फिरने के खर्च को कवर कर सकते हैं। ये ऐसे विकल्प हैं जो बिना किसी बाहरी बैंक निवेश के आपका टैक्स का बोझ कम कर देते हैं।
कंपनियां अक्सर काम से जुड़े खर्चों को मैनेज करने के लिए कई तरह के टैक्स-फ्री रीइम्ब्रिसमेंट (Reimbursements) देती हैं। इनमें मोबाइल बिल, इंटरनेट चार्ज और किताबों या पत्रिकाओं का खर्च शामिल है। अगर आप इनके असली बिल पेश करते हैं, तो ये अलाउंस टैक्स के दायरे से बाहर रहते हैं। सिर्फ अपने यूटिलिटी बिलों का हिसाब रखकर आप साल भर में हजारों रुपये बचा सकते हैं। इन टैक्स-फ्री फायदों का आनंद लेने के लिए बस सही डॉक्यूमेंटेशन ही एकमात्र शर्त है।
| सैलरी बेनिफिट | टैक्स रिजीम का विकल्प | टैक्स बचाने का तरीका |
|---|---|---|
| स्टैंडर्ड डिडक्शन | NTR और OTR दोनों | ऑटोमैटिक फ्लैट डिडक्शन |
| हाउस रेंट अलाउंस (HRA) | ओल्ड टैक्स रिजीम | रेंट रसीद के जरिए क्लेम |
| यूटिलिटी बिल क्लेम | ओल्ड टैक्स रिजीम | वास्तविक खर्च के बिल |
बिना निवेश टैक्स बचाने के लिए कौन सा रास्ता है आपके लिए बेस्ट?
आपको NTR चुनना चाहिए या OTR, यह पूरी तरह आपकी सैलरी स्ट्रक्चर पर निर्भर करता है। न्यू टैक्स रिजीम (NTR) में टैक्स की दरें कम हैं, लेकिन इसमें ज्यादातर आम छूट नहीं मिलतीं। हालांकि, ज्यादा स्टैंडर्ड डिडक्शन की वजह से यह कई मिडिल क्लास लोगों के लिए आकर्षक बन गया है। इसमें निवेश के सबूत या रसीदें जुटाने का झंझट नहीं होता, जिससे कैलकुलेशन आसान हो जाती है। यह विकल्प चुनने पर आपकी टेक-होम सैलरी बढ़ जाती है, जिसे आप अपनी जरूरतों पर खर्च कर सकते हैं।
आज के दौर में प्रभावी टैक्स प्लानिंग के लिए अपनी पेस्लिप (Payslip) को समझना बहुत जरूरी है। टैक्स बचाने के लिए हमेशा इंश्योरेंस या फंड्स में निवेश करना ही जरूरी नहीं होता। रीइम्ब्रिसमेंट को मैक्सिमाइज करके और डिडक्शन का सही इस्तेमाल करके आप अपनी जेब को तुरंत राहत दे सकते हैं। टैक्स कानूनों के प्रति अपडेट रहकर आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आप जरूरत से ज्यादा टैक्स न भरें। यह नजरिया आपकी वित्तीय सेहत को दुरुस्त रखता है और पूरे साल आपके पास कैश की कमी नहीं होने देता।


Click it and Unblock the Notifications