डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये और 100 डॉलर के पास पहुंचे ब्रेंट क्रूड ने आम आदमी के बजट पर असर डालना शुरू कर दिया है। भारतीय समयानुसार सुबह 09:30 से 10:00 बजे के दौरान USD/INR 95.7–96.0 के दायरे में कारोबार कर रहा था, जबकि ब्रेंट क्रूड करीब 102 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया। इन दोनों के इस स्तर पर रहने से लोन ईएमआई (EMI), बैंक डिपॉजिट, सोने के भाव और विदेश यात्रा के बजट पर तुरंत प्रभाव पड़ता है।
कच्चे तेल की सप्लाई से जुड़ी खबरों के कारण ब्रेंट क्रूड लगातार 100 डॉलर के ऊपर बना हुआ है। हालांकि, आज सुबह देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहीं। दूसरी ओर, डॉलर की मजबूती और आरबीआई (RBI) के रुख पर नजर टिकाए ट्रेडर्स की वजह से रुपया सुस्त दिखा। ईंधन, माल ढुलाई और आयातित सामान की लागत बढ़ने से ये बदलाव बाजार में उम्मीद से कहीं तेजी से असर दिखाते हैं।

USD/INR और ब्रेंट क्रूड: आपकी EMI और FD पर क्या पड़ेगा असर?
लेंडिंग बेंचमार्क में 5 से 10 बेसिस प्वाइंट (bps) की बढ़ोतरी देखने में छोटी लगती है, लेकिन लंबी अवधि में यह काफी बड़ी राशि बन जाती है। उदाहरण के तौर पर, 9.5% की ब्याज दर पर 50 लाख रुपये के 20 साल वाले लोन पर 10 bps की बढ़ोतरी से आपकी ईएमआई हर महीने करीब 300 रुपये बढ़ जाएगी। ऐसे में अपने बैंक से मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) के नए अपडेट जरूर जांचें। लोन दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने से पहले चार्जेज का आकलन जरूर करें। वहीं, बैंक एफडी (FD) के लिए 3 से 15 महीने की अलग-अलग अवधि (Laddering) में पैसा लगाना समझदारी होगी, जिससे दरों में बदलाव का फायदा उठाया जा सके।
सोना और विदेश यात्रा: कीमतें, फॉरेक्स और आगे की रणनीति
रुपये की कमजोरी अक्सर घरेलू बाजार में सोने के दाम को अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में ऊपर ले जाती है। खरीदारी से पहले अपने शहर के ज्वैलर्स की दरों की तुलना मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के लाइव भाव से जरूर करें। हमेशा 22-कैरेट बीआईएस-हॉलमार्क वाले गहने ही खरीदें और पक्का बिल लेना न भूलें। कम स्प्रेड और आसान लिक्विडिटी के लिए सॉवरन गोल्ड बॉन्ड (SGBs) या गोल्ड ईटीएफ (ETFs) भी बेहतर विकल्प हैं। विदेश जा रहे यात्रियों को डायनामिक करंसी कन्वर्जन से बचना चाहिए और 1–3% तक के कार्ड फॉरेक्स मार्क-अप व टैक्स पर ध्यान देना चाहिए। अतिरिक्त फीस से बचने के लिए प्रीपेड फॉरेक्स कार्ड का इस्तेमाल करें और एटीएम (ATM) से बार-बार कैश निकालने से बचें।
आने वाले समय में 5–7 अक्टूबर 2026 को होने वाली रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर नजर रखें। इसके अलावा, स्पॉट-फॉरवर्ड स्प्रेड और सरकारी बैंकों की डॉलर बिक्री के जरिए रुपये में हस्तक्षेप के संकेतों को समझें। आम लोग बैंकों की ओर से रेट रीसेट के मैसेज, एयरलाइन सरचार्ज और रोजाना ब्रेंट क्रूड की चाल पर ध्यान दें। इससे आप किसी अनुमान के भरोसे रहे बिना लोन रीपेमेंट, डिपॉजिट और खरीदारी का सही समय तय कर सकेंगे।


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