रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि लंबे समय तक पैसों को सुरक्षित रखते हुए हर महीने स्थिर इनकम कैसे तय की जाए। सही निवेश तरिका अपनाकर न केवल खर्च पूरे किए जा सकते हैं बल्कि महंगाई से भी बचाव किया जा सकता है। आइए दो अलग-अलग निवेशकों की स्थिति और विशेषज्ञों की राय पर नजर डालते हैं।

केस 1: 50 लाख का रिटायरमेंट कॉर्पस, कहां लगाएं बाकी 35 लाख?
ET की रिपोर्ट के अनुसार, एक सरकारी कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद करीब 50 लाख रुपए लेकर घर लौटे। इनमें से 15 लाख रुपए पोस्ट ऑफिस की बचत योजना में लगाए जा चुके हैं, जिससे उन्हें हर तीन महीने में 30,000 रुपए का ब्याज मिलता है। उनकी मौजूदा मासिक आय लगभग 36,000 रुपए है, जिसमें पेंशन, पारिवारिक सहयोग और बाकि स्त्रोत शामिल हैं।
अब चुनौती है कि बाकी बचे 35 लाख रुपए को ऐसे साधनों में लगाया जाए, जिससे जोखिम कम रहे और रेगुलर इनकम बनी रहे।
विशेषज्ञ की राय
प्राइमइन्वेस्टर की को-फाउंडर विद्या बाला कहती हैं कि सुरक्षित विकल्प अपनाना सबसे जरूरी है। इसके लिए ये तीन तरीके बेहतर हो सकते हैं:
सीनियर सिटिज़न सेविंग्स स्कीम (SCSS): इसमें निश्चित ब्याज दर और सरकारी गारंटी मिलती है।
RBI फ्लोटिंग रेट बॉन्ड: इसमें ब्याज दर समय-समय पर बदलती है और यह सुरक्षित साधन है।
कंजरवेटिव हाइब्रिड फंड: जैसे पराग पारिख कंजरवेटिव हाइब्रिड फंड, जिसमें इक्विटी और डेट दोनों का संतुलन रहता है।
बाला का मानना है कि बैलेंस्ड एडवांटेज फंड की बजाय इक्विटी सेविंग्स फंड बेहतर विकल्प हो सकते हैं क्योंकि इनमें उतार-चढ़ाव तुलनात्मक कम रहता है।
केस 2: 2026 में रिटायरमेंट और 11 करोड़ की संपत्ति
दूसरे निवेशक मार्च 2026 में 60 वर्ष की उम्र में रिटायर होंगे। इस समय उनकी कुल संपत्ति लगभग 6 करोड़ रुपए है। इसके अलावा, EPF, NPS और ग्रेच्युटी से उन्हें करीब 5 करोड़ रुपए और मिलेंगे। यानी रिटायरमेंट के समय उनकी कुल संपत्ति लगभग 11 करोड़ रुपए होगी।
रिटायरमेंट के बाद उन्हें हर महीने लगभग 3 लाख रुपए की जरूरत होगी। वे चाहते हैं कि उनकी पूंजी सुरक्षित रहे और कम से कम 5 साल तक इक्विटी निवेश महंगाई को मात देने के लिए बढ़ता रहे।
विशेषज्ञ की राय
ट्रूमाइंड कैपिटल के को-फाउंडर सुमित दुसेजा का कहना है कि 90 साल की उम्र तक और 7% महंगाई को ध्यान में रखते हुए 8.4 करोड़ रुपये का कॉर्पस जरूरी है। इस निवेशक के पास अनुमानित 11 करोड़ होंगे, जो पर्याप्त है। सुरक्षित और संतुलित पोर्टफोलियो के लिए 40-60% हिस्सा इक्विटी में 15% सोने में और बाकी डेट साधनों जैसे बॉन्ड, SCSS और डेट फंड में लगाया जा सकता है।
इक्विटी के लिए फ्लेक्सी-कैप फंड सही विकल्प होंगे, जबकि गोल्ड पोर्टफोलियो को अस्थिर परिस्थितियों से बचाने का काम करेगा।
दोनों उदाहरण यह बताते हैं कि रिटायरमेंट के बाद निवेश का तरीका उम्र, जरूरत और जोखिम क्षमता पर निर्भर करता है। जहां कम पूंजी वालों के लिए सुरक्षित योजनाएं और कंजरवेटिव फंड सही हैं, वहीं बड़ी संपत्ति वाले निवेशकों को इक्विटी, गोल्ड और डेट का संतुलित मिश्रण अपनाना चाहिए। सबसे जरूरी है कि पोर्टफोलियो को समय-समय पर रिव्यू कर संतुलित रखा जाए।
More From GoodReturns

30 साल का सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड: क्या बैंक FD से बेहतर है यह सरकारी निवेश? जानें सही विकल्प

Vi यूजर्स ध्यान दें! ऐप में अचानक बदले अनलिमिटेड डेटा के नियम, नाइट-अनलिमिटेड और 300GB लिमिट का सच जानें

इंडिपेंडेंस डे स्पेशल FD: आज रात खत्म हो रहा है निवेश का मौका, पैसा लगाने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

नया मल्टी-एसेट NFO: SIP या एकमुश्त, निवेश से पहले ये 5 बातें जरूर जानें

IPO रिफंड का पैसा खाली न छोड़ें: 2-4 दिनों के लिए निवेश के ये विकल्प हैं बेस्ट

Shiprocket IPO: निवेश से पहले जानें UPI-ASBA की डेडलाइन और रिस्क, क्या FD से बेहतर है रिटर्न?

EMI और क्रेडिट कार्ड बिल: सोमवार को बैंक अकाउंट में रखें बैलेंस, वरना कटेगा भारी जुर्माना

Airtel का बड़ा झटका: अचानक बंद हुए कई लोकप्रिय प्रीपेड प्लान, रिचार्ज से पहले जानें ये जरूरी बात

जियो नेटफ्लिक्स बिलिंग में अचानक बदलाव! कहीं आपका प्लान तो नहीं हुआ डाउनग्रेड? चेक करें तुरंत

₹399 से कम में अनलिमिटेड 5G और OTT का तड़का, Jio, Airtel और Vi के बेस्ट प्लान्स की पूरी सच्चाई

भारत बनाम श्रीलंका मैच: लाइव स्ट्रीमिंग में बफरिंग? ₹22 से शुरू हैं ये बेस्ट डेटा प्लान्स



Click it and Unblock the Notifications