सितंबर में देश की खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) बढ़कर 5.54% पर पहुंच गई है, जिसमें खाद्य महंगाई (Food Inflation) का आंकड़ा 7.74% रहा। 12 अक्टूबर की देर शाम जारी हुए ये आंकड़े दिवाली से ठीक पहले आम लोगों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ाने वाले हैं। इसके साथ ही महंगाई दर रिजर्व बैंक (RBI) की तय ऊपरी सीमा के पास पहुंच गई है, जिससे आने वाले दिनों में नीतिगत फैसले लेना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसका सीधा असर आपकी ईएमआई (EMI), रसोई के बजट और त्योहारी खरीदारी पर पड़ेगा।
महंगाई का सबसे ज्यादा असर रोजाना इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीजों पर देखने को मिला है। प्याज की महंगाई दर 108% तक पहुंच गई, जबकि अदरक और लहसुन के दाम भी काफी चढ़ गए हैं। नींबू भी महंगे हुए हैं, हालांकि आलू और टमाटर की कीमतों में साल-दर-साल के आधार पर थोड़ी राहत मिली है। शहरों (4.88%) के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में महंगाई दर (6.08%) ज्यादा दर्ज की गई। ऐसे में समझदारी इसी में है कि लोग थोक खरीदारी की योजना बनाएं और हर हफ्ते मंडी के भाव पर नजर रखें।

खुदरा महंगाई का आपकी EMI और त्योहारी बजट पर क्या पड़ेगा असर?
अगर आपका लोन किसी एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़ा है, तो आपकी ईएमआई में थोड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। उदाहरण के लिए, 25 बेसिस प्वाइंट्स के इजाफे से 50 लाख रुपये के 20 साल वाले होम लोन की ईएमआई हर महीने करीब 850 रुपये बढ़ जाएगी। वहीं, ट्रांसपोर्ट इन्फ्लेशन 5% के करीब रहने से साल के अंत तक लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ सकती है। ऐसे में फल-सब्जियों का बजट अलग रखें, राशन पहले ही खरीद लें और दिवाली से पहले शॉपिंग ऐप्स पर मिलने वाले डिस्काउंट्स की तुलना जरूर करें।
RBI की नीति, बॉन्ड यील्ड और रुपये का हाल
7 अक्टूबर को 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट 5.50% पर आ गया है। इसके बाद से बाजार अब सतर्क रुख की उम्मीद कर रहा है। मंगलवार को कारोबार बंद होने तक 10 साल वाला सरकारी बॉन्ड यील्ड सोमवार के 7.3857% से गिरकर 7.3655% पर आ गया। वहीं, आरबीआई के कदमों के बाद डॉलर के मुकाबले रुपया 0.5% मजबूत होकर 95.28 पर बंद हुआ, जिससे आयातित महंगाई (Imported Inflation) के मोर्चे पर फिलहाल थोड़ी राहत मिलती दिख रही है।
बचतकर्ताओं का असली मुनाफा: FD, PPF और SSY बनाम महंगाई
खुदरा महंगाई (CPI) 5.54% पर होने के कारण आपकी बचत पर मिलने वाला 'असली रिटर्न' इस बात पर निर्भर करेगा कि आपने किस स्कीम को चुना है और उस पर टैक्स कितना लगता है। चालू तिमाही में छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। फिलहाल पीपीएफ (PPF) पर 7.1% और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) पर 8.2% ब्याज मिल रहा है। वहीं, बड़े बैंकों की एफडी (FD) पर प्रमुख अवधियों के लिए ब्याज दरें 6.25% से 6.45% के आसपास बनी हुई हैं। ऐसे माहौल में एकमुश्त (Lump-sum) निवेश की जगह इक्विटी में एसआईपी (SIP) के जरिए निवेश करना ज्यादा फायदेमंद रहेगा, ताकि बाजार के उतार-चढ़ाव को संतुलित किया जा सके।
| बचत योजना/स्कीम | मौजूदा ब्याज दर | 5.54% CPI के मुकाबले अनुमानित असली रिटर्न |
|---|---|---|
| पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) | 7.1% | 1.56% |
| सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) | 8.2% | 2.66% |
| नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) | 7.7% | 2.16% |
| SBI FD (1–2 साल) | 6.25% | 0.71% |
| HDFC बैंक FD (~3 साल) | 6.45% | 0.91% |
इस हफ्ते ग्रामीण और शहरी महंगाई के अंतर के साथ-साथ सब्जियों और मसालों (खासकर प्याज) की कीमतों पर नजर बनाए रखें। फ्लोटिंग-रेट लोन वाले ग्राहक सावधान रहें, क्योंकि बैंक आमतौर पर 1 से 3 महीने के भीतर दरों को अपडेट करते हैं। वहीं, निवेशकों को लंबी अवधि के लिए पैसा तभी लॉक करना चाहिए जब टैक्स के बाद मिलने वाला रिटर्न अनुमानित महंगाई से ज्यादा हो। अब महंगाई के अगले आंकड़े 12 नवंबर को आएंगे, जिससे त्योहारों के बाद बाजार की आगे की दिशा तय होगी।


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