Weekly credit report: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने क्रेडिट डेटा रिपोर्ट में बड़ा बदलाव किया है। इस कदम से, बैंकों के लिए ब्यूरो को क्रेडिट डेटा रिपोर्ट करने की टाइमलाइन 30 दिन से घटाकर 7 दिन करने से लोन लेने वालों के लिए बड़े बदलाव आने की उम्मीद है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि नए नियम से क्रेडिट स्कोर तेजी से बेहतर होगा, लेंडिंग सिस्टम मजबूत होगा और फ्रॉड कम होगा, लेकिन स्कोर में बार-बार होने वाले उतार-चढ़ाव की वजह से शॉर्ट-टर्म चिंता भी हो सकती है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा कि कि अप्रैल 2026 से क्रेडिट स्कोर हर हफ्ते अपडेट किए जाएंगे। इस रेगुलेटरी बदलाव से लोन अप्रूवल और क्रेडिट कार्ड जारी करने में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे कंज्यूमर और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन दोनों को फायदा होगा।
बॉरोअर्स के लिए इसका क्या मतलब है?
अभी, ज्यादातर क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियां हर महीने क्रेडिट स्कोर अपडेट करती हैं। इससे कभी-कभी लोन अप्रूवल में देरी हो सकती है या बॉरोअर की मौजूदा फाइनेंशियल स्थिति और उनके बताए गए स्कोर के बीच अंतर हो सकता है। इससे बॉरोअर्स के पास ज्यादा सटीक, अप-टू-डेट क्रेडिट स्कोर होंगे। साथ ही बैंक और NBFC लगभग रियल-टाइम में क्रेडिट की योग्यता का अंदाजा लगा सकते हैं। जो लोग अपने फाइनेंशियल बिहेवियर में सुधार करते हैं, जैसे EMI पे करना या ड्यूज क्लियर करना, उनके स्कोर तेजी से सुधरेंगे, जिससे उन्हें क्रेडिट जल्दी मिल सकेगा।
हर हफ्ते अपडेट से फायदा
- हर हफ्ते अपडेट के साथ, लेंडर्स के पास करंट डेटा होगा, जिससे वेरिफिकेशन का समय कम होगा और कंज्यूमर्स के लिए तुरंत लोन या कार्ड पाना आसान हो जाएगा।
- बॉरोअर्स अपने क्रेडिट बिहेवियर को ज्यादा करीब से ट्रैक कर पाएंगे और अगर उनका स्कोर गिरता है तो सुधार के लिए एक्शन ले पाएंगे।
- लगातार अपडेट क्रेडिट रिपोर्ट में गलतियों या अंतरों को ज्यादा तेजी से पहचानने और ठीक करने में मदद करते हैं।
- रेगुलर अपडेट बॉरोअर्स को EMI, क्रेडिट कार्ड बिल और दूसरे ड्यूज समय पर पे करने के लिए बढ़ावा देते हैं, यह जानते हुए कि समय पर पेमेंट उनके स्कोर में तेजी से दिखेगा।


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