RBI T-bill Auction: FD से बेहतर रिटर्न या सिर्फ सुरक्षा? जानें निवेश का सही तरीका

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) बुधवार, 19 अगस्त 2026 को 91-दिन, 182-दिन और 364-दिन के ट्रेजरी बिलों (T-bills) की नीलामी करने जा रहा है, जिसकी अधिसूचित राशि क्रमशः ₹9,000 करोड़, ₹8,000 करोड़ और ₹7,000 करोड़ तय की गई है। इनका इश्यू और सेटलमेंट गुरुवार, 20 अगस्त को होगा। हालिया अनुमानों के मुताबिक, 91 से 364 दिनों के टी-बिल पर यील्ड 5.5%–6.0% के आसपास रहने की उम्मीद है। इस हफ्ते सुरक्षित विकल्प तलाश रहे शॉर्ट-टर्म निवेशकों के लिए यह एक अच्छा जरिया बन सकता है।

टी-बिल पर सॉवरेन गारंटी मिलती है और नॉन-कंपैटिटिव रूट के तहत नीलामी के वेटेड-एवरेज प्राइस पर इनका अलॉटमेंट किया जाता है। इसमें इश्यू का 5% तक हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित रहता है। इसमें न्यूनतम बोली ₹10,000 की है, जिसके बाद ₹10,000 के गुणकों में निवेश किया जा सकता है। सरकारी प्रतिभूतियों से मिलने वाले ब्याज पर कोई TDS नहीं कटता, हालांकि टी-बिल से होने वाले मुनाफे पर मैच्योरिटी के समय टैक्स स्लैब के हिसाब से कर लगता है। इसका सेटलमेंट T+1 आधार पर होता है।

RBI T-bill Auction August 2026: Better Returns Than FD? Investment Guide for Retail Investors

FD vs RD vs T-bill vs डेट फंड: अगस्त 2026 के लिए टैक्स के बाद का रिटर्न (Post-tax yields)

इन्वेस्टमेंट ऑप्शनअनुमानित प्री-टैक्स5% पर पोस्ट-टैक्स30% पर पोस्ट-टैक्स
टी-बिल (91/182/364)5.5%–6.0%5.23%–5.70%3.85%–4.20%
बैंक एफडी (6–12 महीने)5.75%–6.50%5.46%–6.18%4.03%–4.55%
रेकरिंग डिपॉजिट (समान अवधि)5.75%–6.50%5.46%–6.18%4.03%–4.55%
लिक्विड/अल्ट्रा-शॉर्ट फंड (पोर्टफोलियो YTM)6.36%–7.30%6.04%–6.94%4.45%–5.11%

बड़े प्राइवेट बैंकों की बात करें तो वे 9 महीने से लेकर 1 साल से कम की एफडी पर सामान्य जमाकर्ताओं को करीब 5.75% और वरिष्ठ नागरिकों को 6.25% ब्याज दे रहे हैं। वहीं, आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) की अधिकतम दरें 6.50% के आसपास हैं। दूसरी ओर, प्रमुख लिक्विड फंडों का औसत पोर्टफोलियो YTM लगभग 6.36% और अल्ट्रा-शॉर्ट फंडों का 7.13%–7.30% है। हालांकि, एक्सपेंस रेशियो और बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण निवेशकों को मिलने वाला वास्तविक रिटर्न YTM से थोड़ा अलग हो सकता है।

19 अगस्त के T-bill नीलामी में कैसे लगाएं बोली: ऐप, ASBA विंडो और कट-ऑफ समय

नॉन-कंपैटिटिव बिडिंग के लिए आप RBI रिटेल डायरेक्ट (RBI Retail Direct), NSE goBID या अपने ब्रोकर ऐप के जरिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए आपको ₹10,000 के लॉट में मात्रा दर्ज करनी होगी। रिटेल निवेशकों के लिए विंडो आमतौर पर सोमवार को खुलती है और मंगलवार शाम को बंद हो जाती है। ज्यादातर एक्सचेंज सीधे निवेश करने वालों के लिए मंगलवार शाम 5:00 बजे का कट-ऑफ तय करते हैं। नीलामी के बाद अलॉटमेंट होता है और प्रतिभूतियां गुरुवार, 20 अगस्त को आपके अकाउंट में क्रेडिट कर दी जाती हैं। हालांकि, अगर आपको हर महीने तय आमदनी चाहिए या मैच्योरिटी से पहले पैसा निकालने की जरूरत पड़ सकती है, तो इसमें निवेश से बचें।

पाठकों के काम की बात: अगर आपके लिए हर महीने मिलने वाली आय के बजाय सुरक्षा और मैच्योरिटी पर निश्चित रिटर्न ज्यादा मायने रखता है, तो कम अवधि के लिए पैसा पार्क करने के लिहाज से ट्रेजरी बिल (T-bills) एक बेहतरीन विकल्प हैं। बैंक एफडी (FD) और आरडी (RD) उन लोगों को आकर्षित करते हैं जो पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था और नियमित ब्याज चाहते हैं, लेकिन इनमें टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है और तय सीमा से अधिक ब्याज होने पर TDS कटता है। वहीं, डेट फंड एनएवी (NAV) आधारित लिक्विडिटी देते हैं और पैसा निकालने (रीडेम्पशन) पर ही टैक्स लगता है, लेकिन ब्याज दरों और क्रेडिट स्प्रेड में बदलाव के कारण इनका रिटर्न पोर्टफोलियो YTM से थोड़ा अलग हो सकता है।

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