भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आज, 24 अप्रैल को सरकारी बॉन्ड की एक बड़ी नीलामी करने जा रहा है। इसके जरिए सरकार अलग-अलग सिक्योरिटीज बेचकर कुल 32,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है। इस नीलामी का मुख्य आकर्षण 30 साल की मैच्योरिटी वाला नया 'सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड' है, जिसका इस्तेमाल पर्यावरण के अनुकूल प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाएगा। अब आम निवेशक भी 'रिटेल डायरेक्ट' प्लेटफॉर्म के जरिए इस हाई-वैल्यू डेट मार्केट का हिस्सा आसानी से बन सकते हैं।
छोटे निवेशक 'नॉन-कॉम्पिटिटिव बिडिंग' प्रक्रिया के जरिए इसमें भाग ले सकते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेशकों को वेटेड एवरेज प्राइस पर बॉन्ड अलॉट किए जाते हैं, जिससे उन्हें सटीक यील्ड (रिटर्न) का अंदाजा लगाने की माथापच्ची नहीं करनी पड़ती। आरबीआई अधिकारियों के मुताबिक, "सरकारी बॉन्ड में रिटेल निवेशकों की भागीदारी एक ऐतिहासिक सुधार है।" इससे निवेशकों को अपना पोर्टफोलियो डायवर्सिफाई करने में मदद मिलती है और वे भारत को एक क्लीन इकोनॉमी बनाने में भी योगदान दे पाते हैं।

Retail Direct के जरिए कैसे खरीदें सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड?
निवेश शुरू करने के लिए सबसे पहले अपने 'RBI Retail Direct' अकाउंट में ऑनलाइन लॉग-इन करें। इसके बाद 'प्राइमरी मार्केट' सेक्शन में जाएं और मौजूदा ग्रीन बॉन्ड नीलामी को चुनें। यहां आपको 2056 में मैच्योर होने वाली सिक्योरिटी के लिए अपनी बिड (बोली) राशि दर्ज करनी होगी। बिड सबमिट करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपके लिंक किए गए बैंक खाते में पर्याप्त बैलेंस हो। सफल बिडर्स को ये बॉन्ड जल्द ही उनके गिल्ट अकाउंट में क्रेडिट कर दिए जाएंगे।
| सिक्योरिटी का नाम | नीलामी की राशि | मैच्योरिटी साल |
|---|---|---|
| Sovereign Green Bond | 12,000 करोड़ | 2056 |
| New G-Sec (15-Year) | 10,000 करोड़ | 2039 |
| New G-Sec (5-Year) | 10,000 करोड़ | 2029 |
लंबी अवधि वाले ये बॉन्ड आपके लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल गोल्स के लिए स्थिर रिटर्न का एक अच्छा जरिया हो सकते हैं। हालांकि, ध्यान रखें कि इन ग्रीन बॉन्ड्स से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल है। साथ ही, निवेशकों को सेकेंडरी मार्केट में लिक्विडिटी की कमी पर भी गौर करना चाहिए; यानी जरूरत पड़ने पर इन्हें तुरंत बेचना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अगर आप रिटायरमेंट प्लानिंग कर रहे हैं, तो इस मैच्योरिटी पीरियड के साथ निवेश करना एक स्मार्ट स्ट्रैटेजी साबित हो सकती है।
सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड: रिटर्न और टैक्स से जुड़ी जरूरी बातें
इन बॉन्ड्स के जरिए जुटाया गया पैसा सोलर एनर्जी और विंड पावर जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में लगाया जाता है। इसमें निवेश करके आप भारत के सस्टेनेबल भविष्य के निर्माण में भागीदार बनते हैं। हालांकि, 30 साल जैसी लंबी अवधि के लिए पैसा लगाने से पहले अपने रिस्क प्रोफाइल का आकलन जरूर कर लें। यह नीलामी फिक्स्ड रिटर्न लॉक करने का एक शानदार मौका है, जहां आपकी पर्सनल वेल्थ बढ़ने के साथ-साथ धरती को बेहतर बनाने का संकल्प भी पूरा होता है।


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