आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 5 से 7 अक्टूबर के बीच होने जा रही है। बाजार को पूरी उम्मीद है कि 7 अक्टूबर को रिजर्व बैंक रेपो रेट में बढ़ोतरी का ऐलान कर सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो आपकी होम लोन की ईएमआई (EMI), एफडी (FD) की ब्याज दरों और त्योहारों के बजट पर सीधा असर पड़ेगा। आरबीआई के फैसले से पहले आपको क्या कदम उठाने चाहिए, आइए समझते हैं।
अगस्त में दरों को स्थिर रखने के बाद फिलहाल रेपो रेट 5.25 फीसदी पर है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस बार इसमें 0.25 फीसदी (25 बेसिस प्वाइंट) की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं अगर महंगाई कम नहीं हुई, तो दिसंबर में भी दरें बढ़ाई जा सकती हैं। इसलिए अक्टूबर की इस बैठक को मामूली न समझें और अपनी लोन रीसेट डेट, एफडी रिन्यूअल व इमरजेंसी फंड को उसी हिसाब से प्लान कर लें।

क्या बढ़ जाएगी आपकी होम लोन EMI? फ्लोटिंग vs फिक्स्ड का गणित और रीसेट की तारीखें
ज्यादातर नए फ्लोटिंग होम लोन रेपो रेट से लिंक होते हैं और इनकी ब्याज दरें हर तीन महीने (त्रैमासिक) में रीसेट होती हैं। कई बैंक जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर की पहली तारीख को रेट रीसेट करते हैं। अगर आपका रीसेट 1 अक्टूबर को हो चुका है, तो 7 अक्टूबर की बढ़ोतरी का असर आपको अगली तिमाही से दिखेगा। अगर रीसेट से पहले पार्ट-पेमेंट कर सकें तो बेहतर होगा, क्योंकि 20 साल के लोन पर 0.25% ब्याज बढ़ने से हर लाख रुपये पर करीब ₹11 प्रति महीना EMI बढ़ जाती है।
FD पर ज्यादा ब्याज पाने के स्मार्ट तरीके और पैसों को सुरक्षित रखने की रणनीति
अगर दरें बढ़ने की संभावना है, तो छोटी अवधि की एफडी से शुरुआत करें, जो पॉलिसी के तुरंत बाद मैच्योर हो। इसके बाद नई और बढ़ी हुई दरों पर लंबी अवधि के लिए एफडी लॉक करें। वरिष्ठ नागरिकों को आमतौर पर 0.25% से 0.75% (25-75 बेसिस प्वाइंट) तक ज्यादा ब्याज मिलता है। धारा 80TTB के तहत सीनियर सिटीजन्स ₹50,000 तक के ब्याज पर टैक्स छूट पा सकते हैं, जबकि बैंक या पोस्ट ऑफिस ब्याज पर TDS की सीमा उनके लिए ₹1,00,000 से ऊपर है। ध्यान रखें, ऑटो-रिन्यूअल (Auto-renewal) से बचें, वरना बढ़ी हुई दरों का फायदा हाथ से निकल सकता है।
शॉर्ट-टर्म पैसे का सही इस्तेमाल: लिक्विड या ओवरनाइट फंड्स और 'नो-कॉस्ट EMI' के छिपे जाल
7 से 30 दिनों के लिए पैसे पार्क करने हैं, तो ओवरनाइट फंड्स बेहतर विकल्प हैं क्योंकि इनमें ड्यूरेशन और क्रेडिट रिस्क सबसे कम होता है। ध्यान दें कि 7 दिनों के भीतर लिक्विड फंड्स से पैसा निकालने पर एग्जिट लोड लग सकता है। त्योहारों की खरीदारी के बीच अपना इमरजेंसी फंड बचाकर रखें। इसके अलावा, 'नो-कॉस्ट EMI' के चक्कर में आने से पहले हिडन प्रोसेसिंग फीस और डिस्काउंट न मिलने जैसी शर्तों को ध्यान से जांच लें, क्योंकि इससे असल में आपकी जेब पर बोझ ही बढ़ता है।
आज ही एक क्विक चेकलिस्ट बनाएं: अपने लोन का बेंचमार्क और अगली रीसेट डेट चेक करें, रीफाइनेंस करने से पहले स्प्रेड और प्रोसेसिंग फीस की तुलना करें, एफडी मैच्योरिटी को पॉलिसी के हिसाब से सेट करें और त्योहारों के फंड को सुरक्षित जगह रखें। 7 अक्टूबर को आने वाले नतीजे पर नजर रखें और पॉलिसी के 14वें दिन शाम 5 बजे जारी होने वाले मिनट्स को जरूर देखें।


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