RBI का बड़ा फैसला: T-Bill नीलामी रद्द, क्या अब लिक्विड फंड्स से पैसा निकालें?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 21 अक्टूबर 2026 को ₹23,000 करोड़ के ट्रेजरी बिल (T-Bill) की नीलामी में आई सभी बोलियों को खारिज कर दिया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक शॉर्ट-टर्म ब्याज दरों में अचानक आई तेजी को लेकर सहज नहीं है। इस बीच, 10-साल वाले बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7.44 फीसदी पर बंद हुई, जो नवंबर 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। ऐसे में अपनी सरप्लस नकदी को बिना किसी जोखिम या कम रिटर्न के सुरक्षित रखने के लिए निवेशकों को अब तुरंत सही विकल्प चुनना होगा।

बाजार के जानकारों के अनुसार, जीएसटी (GST) भुगतान और जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) की लिस्टिंग से जुड़े फंड्स ब्लॉक होने के कारण बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी की तंगी बनी हुई है। हालांकि, सरकार के पास करीब ₹5.3 लाख करोड़ का कैश बैलेंस होने की वजह से RBI ने ऊंची ब्याज दरों की मांग मानने के बजाय नीलामी को रद्द करने का रास्ता चुना। पिछले हफ्ते 91, 182 और 364 दिनों के T-bill कट-ऑफ क्रमशः 5.73, 6.29 और 6.49 फीसदी रहे थे, जो मौजूदा स्थिति को समझने के लिए अहम हैं।

RBI Rejects T-Bill Bids 2026: How to Manage Liquid Funds and Debt Investments Safely Amid Rising Yields

RBI ने खारिज कीं T-bill की बोलियां: लिक्विड फंड्स पर क्या असर पड़ेगा?

पोर्टफोलियो के नए री-प्राइसिंग की वजह से लिक्विड और अल्ट्रा-शॉर्ट फंड्स की एनएवी (NAV) में अस्थायी तौर पर मामूली गिरावट देखने को मिल सकती है। अप्रैल 2020 से भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमानुसार सभी मैच्योरिटी पर मार्क-टू-मार्केट वैल्यूएशन जरूरी है, इसलिए यील्ड में बढ़त का असर रोजाना की NAV में झलकता है। इसके उलट, ओवरनाइट फंड्स ज्यादातर कोलैटरलाइज्ड ओवरनाइट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं, इसलिए ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव का असर इन पर मनी-मार्केट के अन्य फंड्स की तुलना में काफी कम होता है।

क्या आपको FD या शॉर्ट-ड्यूरेशन डेट फंड्स में पैसा शिफ्ट करना चाहिए?

इमरजेंसी फंड को लेकर अचानक हड़बड़ी में कोई फैसला न लें। अगले 7 से 15 दिनों के खर्च का पैसा किसी ओवरनाइट फंड या सेविंग्स स्वीप में ही रखें। बाकी रकम को 91-दिन और 182-दिन के T-bills में अलग-अलग मैच्योरिटी के हिसाब से बांटें (लैडरिंग करें) और उन्हें हर महीने रोल-ओवर करते रहें, ताकि 1 से 12 महीने का एक तय चक्र तैयार हो सके। शॉर्ट-ड्यूरेशन फंड में तभी कदम बढ़ाएं जब आप मार्क-टू-मार्केट के छोटे-मोटे जोखिम उठाने को तैयार हों। साथ ही, एग्जिट लोड और रिडेम्पशन की समयसीमा को ध्यान से देख लें।

T-bills कैसे खरीदें और इस पर टैक्स की क्या स्थिति है?

ट्रेजरी बिल खरीदने के लिए RBI रिटेल डायरेक्ट (RBI Retail Direct) पोर्टल पर अकाउंट खोलें, उसमें फंड डालें और नॉन-कंपिटिटिव बिड लगाएं। इसके बाद T+1 सेटलमेंट के तहत ट्रेजरी बिल आपके खाते में क्रेडिट हो जाएंगे। T-bill से मिलने वाला रिटर्न शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) माना जाता है, जिस पर निवेशक के टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है। 1 अप्रैल 2023 के बाद से ज्यादातर डेट म्यूचुअल फंड्स के रिटर्न पर भी बिना इंडेक्सेशन लाभ के स्लैब दरों से ही टैक्स लागू होता है। नीचे दी गई तालिका पिछले हफ्ते के कट-ऑफ और एक साल की FD दरों की तुलना दर्शाती है।

इन्स्ट्रूमेंटटैक्स से पहले यील्ड30% टैक्स के बाद रिटर्न
91‑दिन का T‑bill5.73%4.01%
364‑दिन का T‑bill6.49%4.54%
1‑साल की बैंक FD6.25%4.38%

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