RBI पॉलिसी मीटिंग: क्या आपकी EMI और FD पर पड़ेगा असर?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तीन दिनों तक चलने वाली अहम पॉलिसी मीटिंग आज से शुरू हो रही है। 6 से 8 अप्रैल तक चलने वाली इस बैठक में अधिकारी देश की ब्याज दरों की दिशा तय करेंगे। बाजार को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल दरों को स्थिर (Status Quo) रख सकता है। आरबीआई का यह फैसला सीधे तौर पर तय करेगा कि आपको अपने लोन पर कितनी ईएमआई चुकानी होगी या बैंक डिपॉजिट पर कितना ब्याज मिलेगा।

घर खरीदारों के लिए राहत की बात यह है कि अगर दरों में बदलाव नहीं होता है, तो फ्लोटिंग रेट वाली ईएमआई में भी बदलाव की संभावना कम है। ज्यादातर बैंकों के रिटेल लोन सीधे बेंचमार्क रेपो रेट से जुड़े होते हैं। अगर आरबीआई दरों को नहीं बढ़ाता है, तो आपका मासिक बोझ स्थिर रहेगा, हालांकि यह अभी भी ऊंचे स्तर पर है। इस फैसले से कर्जदारों को अगली तिमाही के लिए अपना बजट बेहतर तरीके से प्लान करने में मदद मिलेगी।

RBI Policy Meeting: Will Home Loan EMIs and FD Interest Rates Change? Expert Analysis

इस हफ्ते अपनी EMI और FD रिटर्न पर रखें नजर

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करने वालों के लिए ऊंची ब्याज दरों का फायदा कुछ और समय तक बना रह सकता है। कई बैंक फिलहाल मीडियम-टर्म टेन्योर पर आकर्षक रिटर्न दे रहे हैं। बेहतर लिक्विडिटी के लिए 'FD लैडरिंग' (FD laddering) आजमाने का यह बेहतरीन समय है। इससे आप भविष्य में होने वाली किसी भी संभावित कटौती से पहले ऊंची दरों को लॉक कर पाएंगे।

पीपीएफ (PPF) जैसी छोटी बचत योजनाओं का रिटर्न सरकारी बॉन्ड यील्ड पर निर्भर करता है, जो अक्सर आरबीआई की पॉलिसी के हिसाब से चलता है। ऊंची ब्याज दरों का फायदा उन सीनियर सिटीजन्स को मिल रहा है जो रेगुलर इनकम के लिए SCSS का इस्तेमाल करते हैं। इस हफ्ते बैंक एफडी और पोस्ट ऑफिस स्कीम के बीच सही चुनाव करने के लिए बारीकी से तुलना करना जरूरी है।

एसेट टाइपसंभावित असरक्या करें?
होम लोनमंथली EMI ऊंची बनी रहेगीअभी प्री-पेमेंट से बचें
फिक्स्ड डिपॉजिटब्याज दरें पीक पर रहेंगीशॉर्ट-टर्म लैडरिंग अपनाएं
म्यूचुअल फंडबाजार में उतार-चढ़ाव रहेगामंथली SIP जारी रखें

रेट पॉज के दौरान कैसे मैनेज करें PPF और SIP?

शेयर बाजार अक्सर महंगाई के जोखिमों पर एमपीसी (MPC) के रुख को देखकर रिएक्ट करता है। एसआईपी (SIP) के जरिए निवेश करने वालों को अपने लॉन्ग-टर्म लक्ष्यों पर फोकस करना चाहिए। आरबीआई का न्यूट्रल रुख शुरुआत में डेट फंड्स को मजबूती दे सकता है। ब्याज दरों की अनिश्चितता के बीच अनुशासन बनाए रखना ही समझदारी है। आज अपने पोर्टफोलियो में जल्दबाजी में कोई भी बदलाव करने से बचें।

8 अप्रैल को आने वाला अंतिम फैसला भारतीय परिवारों के लिए तस्वीर साफ कर देगा। चाहे आपका होम लोन चल रहा हो या आप रिटायरमेंट फंड बना रहे हों, इस पर नजर बनाए रखें। आरबीआई गवर्नर का भाषण सुनकर आप अपना मंथली बजट बेहतर तरीके से एडजस्ट कर पाएंगे। सही प्लानिंग यह सुनिश्चित करेगी कि आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच भी आपकी फाइनेंशियल हेल्थ मजबूत बनी रहे।

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