RBI पॉलिसी के बाद निवेश: FD या SIP, कहां मिलेगा ज्यादा मुनाफा?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अहम पॉलिसी मीटिंग आज से शुरू हो गई है। हर किसी की नजरें 8 अप्रैल को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं, क्योंकि इस फैसले का सीधा असर आपकी बचत और निवेश से होने वाली कमाई पर पड़ेगा। निवेशकों के सामने अब बैंक डिपॉजिट और मार्केट से जुड़े एसेट्स के बीच सही चुनाव करने की चुनौती है। ब्याज दरों में संभावित बदलाव को देखते हुए आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण मोड़ है।

सुरक्षित निवेश पसंद करने वालों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD) हमेशा से भरोसेमंद विकल्प रहे हैं। अगर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखता है, तो ये विकल्प काफी फायदेमंद साबित होंगे। इनमें बिना किसी मार्केट रिस्क या उतार-चढ़ाव के गारंटीड रिटर्न मिलता है। हालांकि, ऊंचे टैक्स स्लैब में आने वाले लोगों के लिए ये बहुत ज्यादा टैक्स-एफिशिएंट नहीं हैं। अपनी संपत्ति में वास्तविक बढ़ोतरी के लिए इनकी तुलना दूसरे निवेश विकल्पों से करना जरूरी है।

RBI Policy Impact: Should You Choose FD or SIP for Better Returns? Expert Investment Guide

RBI पॉलिसी वाले हफ्ते में रिटर्न का गणित समझें

इक्विटी फंड्स में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) अक्सर लंबी अवधि में सबसे अच्छी ग्रोथ देते हैं। ये 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग' के जरिए बाजार के उतार-चढ़ाव का फायदा उठाने में निवेशकों की मदद करते हैं। हालांकि शेयरों में जोखिम ज्यादा होता है, लेकिन महंगाई को मात देने में ये सबसे कारगर हैं। स्टैंडर्ड डिपॉजिट के मुकाबले इक्विटी स्कीम्स में बेहतर टैक्स बेनिफिट्स भी मिलते हैं। आपका चुनाव पूरी तरह से आपकी रिस्क लेने की क्षमता पर निर्भर होना चाहिए।

एसेट क्लास5% स्लैब यील्ड20% स्लैब यील्ड30% स्लैब यील्ड
बैंक FD (7.5%)7.12%6.00%5.25%
इक्विटी SIP (अनुमानित 12%)11.4%10.5%10.5%
डेट फंड (7%)6.65%5.60%4.90%

RBI पॉलिसी के दौरान रिस्क मैनेजमेंट है जरूरी

आज के दौर में हर भारतीय निवेशक के लिए 'टैक्स एफिशिएंसी' एक बड़ा फैक्टर है। बैंक से मिलने वाला ब्याज आपकी कुल आय में जोड़ दिया जाता है और आपके स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। वहीं, इक्विटी से होने वाले 1 लाख रुपये से ज्यादा के मुनाफे पर एक तय लॉन्ग-टर्म टैक्स रेट लगता है। डेट फंड से होने वाली कमाई पर अब आपके सालाना इनकम टैक्स स्लैब के आधार पर टैक्स वसूला जाता है। इन नियमों को समझकर ही आप टैक्स के बाद मिलने वाले असली रिटर्न का सही अंदाजा लगा सकते हैं।

इस हफ्ते जब MPC की बैठक के नतीजे आएंगे, तो सही एसेट एलोकेशन ही आपके काम आएगा। सुरक्षित निवेश चाहने वाले फिलहाल हाई-यील्ड डिपॉजिट्स की स्थिरता को चुन सकते हैं। वहीं, एग्रेसिव निवेशक बाजार की लहरों का फायदा उठाने के लिए SIP के साथ बने रह सकते हैं। सुरक्षा और ग्रोथ के बीच सही तालमेल आपके पोर्टफोलियो को मजबूती देगा। निवेश से जुड़ा कोई भी बड़ा कदम 8 अप्रैल को होने वाले आधिकारिक ऐलान के बाद ही उठाएं।

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