RBI Repo Rate Cut; RBI MPC Meet: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) शुक्रवार को संशोधित रेपो दर की घोषणा करेगा। उससे पहले तमाम एक्सपर्ट्स, इकोनॉमिस्ट्स और ब्रोकरेज फर्म्स ने अपने-अपने स्तर पर अपनी मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है और मिले-जुले अनुमान लगाए हैं।
आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं के बीच CRISIL के चीफ इकोनॉमिस्ट धर्मकीर्ति जोशी, DBS बैंक के सीनियर इकोनॉमिस्ट राधिका राव, अशोक कपुर (क्रिश्ना ग्रुप चेयरमैन), अनिल रेगो (राइट होराइजन्स PMS फंड मैनेजर), HSBC ग्लोबल रिसर्च, मॉर्गन स्टेनली और सौरभ बंसल (फिनाटवर्क इन्वेस्टमेंट एडवाइजर) का मानना है कि आरबीआई रेपो रेट में 25 bps की कटौती करेगा और यह 5.25% पर आ जाएगा। वहीं, ICRA के चीफ इकोनॉमिस्ट अदीति नायर का मानना है रेपो रेट में कोई बदलाव की संभावना नहीं है। कोटक सिक्योरिटीज का मानना है कि आरबीआई 25-50 bps की कटौती कर सकता है।

इससे पहले अक्टूबर में हुई MPC मीटिंग में RBI ने रेपो रेट 5.5 फीसदी पर स्थिर रखा था और उससे पहले अगस्त में भी MPC कमेटी ने दरें स्थिर रखी थीं।
इस साल रेपो रेट में 3 बार हो चुकी है कटौती
इस साल केंद्रीय बैंक 3 बार रेपो रेट में कटौती कर चुका है। RBI ने फरवरी MPC मीटिंग में दरों में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की कटौती की थी। इसके बाद अप्रैल में केंद्रीय बैंक ने इसमें और 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी और एक बार फिर जून में हुई मीटिंग में बड़ी कटौती (50 बेसिस प्वाइंट/0.50%) की गई थी।
इस तरह अब तक ब्याज दरों में इस साल आरबीआई 1 फीसदी की कटौती कर चुका है। इसके साथ जो ब्याज दर 2025 की शुरुआत में 6.5 फीसदी थी, वो अब 5.5 फीसदी पर है। ऐसे में सवाल है कि यदि आरबीआई एक बार फिर से रेपो रेट में कटौती करता है तो होम लोन की EMI और FD के रिटर्न्स पर कितना असर होगा। चूंकि रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को शॉर्ट टर्म ऋण देता है और इसमें बदलाव से बैंक लोन और जमा दरों पर सीधा असर होता है। तो चलिए जानते हैं...
होम लोन की EMI पर कितना असर?
ब्याज दर में कटौती से उधार लेना सस्ता और जमा पर रिटर्न कम होगा, जबकि रेपो रेट के बदलाव नहीं होने पर उधार लेने की लागत और जमा पर रिटर्न में कोई बदलाव नहीं आएगा। कर्जदारों के लिए, EMI (मासिक किस्त) मुख्य चिंता है, जिसमें मूलधन और बैंक का ब्याज शामिल है। यदि RBI रेपो दर में 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) की कटौती करता है, तो बैंक होम लोन पर ब्याज दरें कम कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए, 20 साल के लिए लिए गए 50 लाख रुपये के होम लोन पर EMI लगभग 1,000 रुपये प्रति माह घट सकती है। पूरे लोन पीरियड में इस बदलाव से लगभग 2.5 लाख रुपये की कुल बचत होगी। वहीं, यदि RBI मौजूदा दरें अपरिवर्तित रखता है, तो कर्जदारों को तुरंत कोई राहत नहीं मिलेगी। हालांकि, दरों में स्थिरता बैंकों को उनके ऋणों का बेहतर प्रबंधन करने और पिछली दर कटौतियों का लाभ सुनिश्चित करने में सहायक हो सकती है।
कर्जदार RBI के निर्णय अनुसार अपनी ऋण चुकाने की रणनीति बदल सकते हैं। दर कटौती पर, वित्तीय सलाहकार EMI राशि 5 से 10% बढ़ाने को कहते हैं, जिससे ऋण अवधि और कुल ब्याज दोनों कम होंगे।
रेपो रेट का FD के रिटर्न्स पर कितना असर?
यदि सेंट्रल बैंक रेपो दर में कटौती करता है, तो फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposits) पर ब्याज दरों में गिरावट की संभावना है। यह खासकर उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए चुनौतीपूर्ण होगा, जो अपनी सेवानिवृत्ति के लाभों को FD में निवेश करते हैं।
इस कमी का मतलब है कि जमाकर्ता अपनी बचत पर कम कमाएंगे। यदि RBI दरों में बदलाव नहीं करता, तो जमाकर्ता अगले बदलाव तक मौजूदा दरों का लाभ उठा सकते हैं। यदि FD दरें गिरती हैं, तो जमाकर्ता अन्य विकल्प भी देख सकते हैं। डेट म्यूचुअल फंड, सरकारी बॉन्ड और छोटी बचत योजनाएं अक्सर बेहतर रिटर्न देती हैं। वरिष्ठ नागरिकों को उच्च ब्याज दरें प्रदान करने वाली विशेष FD योजनाएं देखनी चाहिए, क्योंकि कई बैंक यह सुविधा देते हैं।
RBI रेपो रेट कम करता है, तो क्या होता है?
- बैंकों को RBI से सस्ते में पैसा मिलने लगता है। मान लीजिए पहले 5.5% देना पड़ता था, अब मान लो 5% देना पड़ रहा है।
- अब बैंक के पास पैसा सस्ते में आ गया। ऐसे में वे जनता से FD पर ज्यादा ब्याज देकर पैसा लेना कम करना चाहते हैं।
- रेपो कम होने से बैंक FD की ब्याज दरें कम कर देते हैं। पहले FD पर 6.5% मिल रहा था, अब 6% हो सकता है।
1 साल की FD पर कहां कितना ब्याज
- एचडीएफसी में 6.25%
- आईसीआईसीआई में 6.25%
- एसबीआई में 6.25%
- पंजाब नेशनल बैंक में 6.25%
- बैंक ऑफ इंडिया में 6.25%
[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से 'We' कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]
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