New Labour Code: हाल ही में केंद्र सरकार ने 4 नए लेबर कोड्स लागू किए हैं। ऐसे में यदि आप नौकरी बदलने की योजना बना रहे हैं या किसी कारणवश आपको नौकरी से निकाल दिया जाता है तो आपके लिए नए कानून में एक बड़े राहत का प्रावधान किया गया है।
दरअसल, प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों की सबसे बड़ी समस्या में से एक यह है कि जब वे नौकरी बदलते हैं तो कई हफ्तों और महीनों तक उनका फुल एंड फाइनल सेटलमेंट (FnF) नहीं हो पाता है। ऐसे में FnF सेटलमेंट का इंतजार करने वाले कर्मचारियों के लिए सरकार ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए लेबर कोड के लागू होने के बाद, अब कंपनियों को केवल दो कार्य दिवसों (वर्किंग डे) के भीतर आपका फुल एंड फाइनल भुगतान करना होगा।

नए वेज कोड के तहत, सभी कर्मचारियों को उनका फुल एंड फाइनल सेटलमेंट दो दिन के भीतर आधिकारिक तौर पर देना अनिवार्य होगा। बीटीजी अद्वय के पार्टनर अर्जुन पलेरी ने बताया कि वेज कोड 2019 की धारा 17(2) स्पष्ट रूप से कहती है कि कर्मचारी के अंतिम कार्य दिवस के बाद अगले दो कार्य दिवसों में उसकी पूरी बकाया सैलरी का भुगतान किया जाना चाहिए। इसमें वेतन, बची हुई छुट्टियों का पैसा और अन्य देय राशि शामिल होगी। हालांकि, ग्रेच्युटी जैसी कुछ राशियां अभी भी अलग नियमों के तहत तय समय पर ही मिलेंगी।
पहले कंपनियों के पास 30 दिन का होता था समय
पहले कंपनियों के पास फुल एंड फाइनल जारी करने के लिए 30 दिनों तक का समय होता था। कई बार यह प्रक्रिया और भी लंबी हो जाती थी क्योंकि FnF में अवकाश नकदीकरण, लंबित बोनस और ग्रेच्युटी जैसे कई बकाया शामिल होते थे। कंपनियां अक्सर सभी भुगतानों को एक साथ निपटाने की कोशिश करती थीं, जिससे कर्मचारियों को हफ्तों तक इंतजार करना पड़ता था।
प्राइवेट कर्मचारियों को मिलेगा फायदा
लक्ष्मीकुमारण एंड श्रीधरन के एग्जीक्यूटिव पार्टनर आशीष फिलिप के अनुसार, नया श्रम कानून सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होता है। चाहे कर्मचारी स्वेच्छा से इस्तीफा दे, उसे नौकरी से निकाला जाए, बर्खास्त किया जाए या छंटनी की जाए, हर स्थिति में 48 घंटे के भीतर FnF भुगतान अनिवार्य है। यह पहले के मुकाबले एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जब कंपनियों के पास भुगतान के लिए एक महीने तक का समय होता था।
यह नया नियम कर्मचारियों के लिए कई मायनों में फायदेमंद साबित होगा। अब उन्हें लंबे इंतजार से मुक्ति मिलेगी और कंपनियां वेतन नहीं रोक पाएंगी, जिससे नौकरी बदलना आसान होगा। यह आर्थिक असुरक्षा को भी कम करेगा।
देरी पर कंपनियों के खिलाफ हो सकती है कार्रवाई
यह नया नियम कंपनियों की एचआर और पेरोल प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके पालन में किसी भी तरह की देरी होने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है, जिससे इसकी गंभीरता और भी बढ़ जाती है।
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