PPF, FD या SIP: ब्याज दरें स्थिर, अब कहां लगाएं पैसा? जानें सही निवेश रणनीति

सरकार ने 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 की तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं (Small Savings Schemes) की ब्याज दरों में कोई बदलाव न करने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय ने 30 सितंबर को इस फैसले की पुष्टि की। इसके तहत पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) पर 7.1 फीसदी, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) पर 7.7 फीसदी और किसान विकास पत्र (KVP) पर 7.5 फीसदी की दर से ब्याज मिलता रहेगा। वहीं सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम (SCSS) और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) 8.2 फीसदी की सबसे ज्यादा दर के साथ पहली पसंद बनी हुई हैं, जबकि मंथली इनकम स्कीम (MIS) में 7.4 फीसदी ब्याज बरकरार है।

त्योहारी सीजन में घर में एक्स्ट्रा पैसे आने के बीच, दरों में बदलाव न होने से अब सवाल 'नया क्या है' से हटकर 'आपके लिए सही क्या है' पर आ गया है। देश के बड़े बैंक 5 साल की एफडी (FD) पर करीब 6.5 से 7.2 फीसदी तक ब्याज दे रहे हैं, वहीं कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक 7.75 से 8.00 फीसदी तक का ऑफर दे रहे हैं। ऐसे में सिर्फ थोड़े से ज्यादा ब्याज के पीछे भागने के बजाय आपका फैसला इस बात पर निर्भर होना चाहिए कि आपकी जरूरत क्या है, टैक्स में कितनी बचत हो रही है और पैसों की सुरक्षा व लिक्विडिटी कितनी है।

PPF vs FD vs SIP: Best Investment Strategy After Small Savings Schemes Interest Rates Unchanged 2026

PPF vs FD vs SIP: ब्याज दरें, टैक्स और लिक्विडिटी का पूरा हिसाब

अगर आपका लक्ष्य 5 से 15 साल का है और आप बिना किसी जोखिम के गारंटीड रिटर्न चाहते हैं, तो पीपीएफ (PPF) सबसे सटीक विकल्प है। इसे Exempt-Exempt-Exempt (EEE) का खास दर्जा हासिल है, यानी निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी की पूरी रकम टैक्स-फ्री होती है। सेक्शन 80C के तहत इसमें सालाना 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट मिलती है। लिक्विडिटी की बात करें तो तीसरे से छठे साल के दौरान इस पर लोन लिया जा सकता है, जबकि सातवें साल से आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है। जरूरत पड़ने पर इसे 5-5 साल के ब्लॉक में आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

दूसरी ओर, लंबे समय के निवेश के लिए इक्विटी एसआईपी (SIP) बढ़िया जरिया है। हालांकि इसमें बाजार का जोखिम रहता है, लेकिन अब इस पर टैक्स के नियम पूरी तरह साफ हैं। 23 जुलाई 2024 से लागू नियमों के तहत, लिस्टेड इक्विटी पर 1.25 लाख रुपये से ज्यादा के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) पर 12.5 फीसदी टैक्स लगता है, वहीं शॉर्ट-टर्म गेंस (STCG) पर 20 फीसदी टैक्स कटता है। 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदे गए डेट फंड के यूनिट्स पर सेक्शन 50AA के तहत आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। नीचे दी गई टेबल में सरकार द्वारा अधिसूचित दरों और बैंकों की मौजूदा एफडी दरों की तुलना की गई है:

स्कीम / विकल्पब्याज दर (वार्षिक)
Public Provident Fund7.1%
National Savings Certificate7.7%
Senior Citizens Savings Scheme8.2%
Sukanya Samriddhi8.2%
Kisan Vikas Patra7.5%
Post Office Time Deposit (5‑year)7.5%
Post Office Monthly Income Scheme7.4%
Bank FD (major banks, 5‑year)6.5%–7.2%
Small Finance Bank FD (5‑year)7.75%–8.10%

अब कहां लगाएं पैसा: PPF, FD या फिर SIP?

अगर आपकी जरूरत 3 से 36 महीने की है, तो बैंक एफडी (FD) का रुख करें। री-इन्वेस्टमेंट के जोखिम से बचने के लिए अलग-अलग मैच्योरिटी अवधि वाली एफडी (Laddering) में पैसा लगाएं। इसके अलावा, प्रति-बैंक 5 लाख रुपये के DICGC इंश्योरेंस कवर का पूरा फायदा उठाने के लिए अपना डिपॉजिट अलग-अलग बैंकों में बांटकर रखें। महज 0.25 फीसदी ज्यादा रिटर्न के चक्कर में जोखिम उठाने के बजाय मजबूत बैंकों को तरजीह दें और एफडी बुक करने से पहले समय से पहले निकासी (Premature closure) के नियम जांच लें। सीनियर सिटीजंस को सबसे पहले SCSS पर ध्यान देना चाहिए और फिर नियमित आय के लिए MIS के विकल्प पर विचार करना चाहिए।

5 से 15 साल की लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए PPF को डायवर्सिफाइड इक्विटी SIP के साथ जोड़ें। अगर पोर्टफोलियो में सुरक्षित निवेश (Debt) का हिस्सा कम पड़ रहा है, तो NSC या KVP शामिल कर सकते हैं। बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए माता-पिता सुकन्या समृद्धि योजना में पैसा लॉक-इन कर सकते हैं। चूंकि 31 दिसंबर 2026 तक ब्याज दरें फ्रीज हैं, इसलिए अपने अतिरिक्त फंड को अभी सही जगह लगाएं। इसके बाद दिसंबर के अंत में रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति और बैंकों की दरों में बदलाव के हिसाब से अपने पोर्टफोलियो और एसआईपी की समीक्षा करें।

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