नयी दिल्ली। बहुत सरकारी योजनाएं हैं जिनमें आपको हर साल कुछ न्यूनतम राशि जमा करनी होती है। ऐसा न करने पर आपके खाते में दिक्कतें आ सकती हैं। अगर आपने 2019-20 के लिए पीपीएफ या सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) में न्यूनतम निवेश नहीं किया है तो टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। आप इन छोटी बचत योजनाओं में 2019-20 के लिए न्यूनतम योगदान, जिसके लिए समय सीमा 31 मार्च थी, 30 जून 2020 तक जमा कर सकते हैं। पीपीएफ और एसएसवाई जैसी छोटी बचत योजनाएं देश भर में निवेश के लिए काफी पसंद की जाती हैं। इन योजनाओं के निवेशकों को राहत देने के लिए सरकार ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए योगदान की समय सीमा 31 मार्च से बढ़ा कर 31 जून कर दी है। ये कदम कोरोनावायरस के कारण लॉकडाउन को देखते हुए लिया गया है।
क्या कहता है नियम
नियमों के अनुसार पीपीएफ और एसएसवाई खाताधारकों को क्रमशः 500 रुपये और 250 रुपये का न्यूनतम वार्षिक योगदान करने की आवश्यकता होती है। निर्धारित समय के अंदर न्यूनतम राशि जमा न करने पर खाता निष्क्रिय हो जाता है। हालांकि किसी निष्क्रिय खाते पर मैच्योरिटी तक ब्याज मिलता रहता है, मगर खाते को दोबारा एक्विट करवाने के लिए आपको हर साल के लिए 50 रुपये का जुर्माना देना होगा। इसलिए यदि आपके पास पीपीएफ या एसएसवाई खाता है तो हमेशा ये सुनिश्चित करें कि आप न्यूनतम राशि का योगदान करते रहें।
कितनी है अधिकतम निवेश सीमा
आप न्यूनतम राशि से अधिक का योगदान करना चाहें तो आप अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का सालाना निवेश पीपीएफ और एसएसवाई में कर सकते हैं। हालांकि निवेश करते समय आपको यह घोषित करने के लिए एक अंडरटेकिंग देनी होगी कि आप अधिकतम निवेश सीमा का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं। निवेश सीमा से किसी भी अतिरिक्त राशि को बिना ब्याज के वापस किया जाएगा। याद रखें कि आप 2019-20 के लिए केवल एक बार में ही निवेश कर सकते हैं। आपको 30 जून तक किस्तों में जमा करने की छूट नहीं मिलेगी।
एसएसवाई में किए गए बदलाव
- हाल ही में एसएसवाई के नियमों में कुछ बदलाव किए गए हैं। नये नियमों के मुताबिक एसएसवाई योजना में अगर खाताधारक किसी वित्तीय वर्ष में न्यूनतम राशि 250 रुपये भी जमा न करे, तो मैच्योरिटी तिथि तक खाते को चालू न करवाने पर भी ब्याज मिलता रहेगा।
- नए नियमों के अनुसार एसएसवाई खाते की समय से पहले बंद करने की अनुमति बालिका की मृत्यु या दया के आधार पर दी जाएगी। यहां दया वाले पहलू के उदारहणों में खाताधारक के जीवन को खतरे की स्थिति में इलाज या अभिभावक की मृत्यु शामिल है।
- नये नियमों के अनुसार 18 वर्ष की आयु होने तक बालिका को एसएसवाई खाता संभालने की अनुमति नहीं होगी। पहले ये आयु सीमा 10 साल थी।
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