PPF Investment Tip: पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) भारतीय निवेशकों के बीच एक भरोसेमंद और सुरक्षित स्कीम मानी जाती है। यह न केवल टैक्स बचाने का साधन है, बल्कि लंबे समय के लिए स्थिर ब्याज कमाने का तरीका भी है। लेकिन बहुत से लोग इस स्कीम के एक अहम नियम के बारे में नहीं जानते "5 तारीख वाला नियम", जिसकी अनदेखी करने पर हर महीने ब्याज में नुकसान हो सकता है।

क्या है 5 तारीख का नियम?
PPF अकाउंट में ब्याज का कैल्कुलेशन हर महीने 5 तारीख तक के खाते में मौजूद बैलेंस के आधार पर होता है। इसका मतलब है कि अगर आपने पैसा 5 तारीख से पहले जमा किया, तो पूरे महीने का ब्याज मिलेगा। लेकिन अगर राशि 5 तारीख के बाद जमा हुई, तो उस महीने का ब्याज नहीं जुड़ता। यानी, अगर आपने 10 या 12 तारीख को पैसा डाला, तो ब्याज अगले महीने से गिना जाएगा।
उदाहरण के लिए, अगर आप हर महीने 10,000 रुपए जमा करते हैं और वह 5 तारीख के बाद खाते में पहुंचता है, तो आपको 15 साल के समय में करीब 1 लाख रुपए तक का नुकसान हो सकता है। यह फर्क केवल ब्याज के गलत समय पर कैलकुलेशन से होता है।
आम गलती जो लोग करते हैं
कई लोग अपनी सैलरी मिलने के बाद, यानी महीने की 7 या 10 तारीख को निवेश करते हैं। उन्हें लगता है कि वे नियमित रूप से पैसा जमा कर रहे हैं, लेकिन PPF का ब्याज कैल्कुलेशन बाकी योजनाओं से अलग है। ब्याज उस समय के बैलेंस पर गिना जाता है जो महीने की 5 तारीख से पहले खाते में मौजूद हो। इसलिए निवेश की टाइमिंग बहुत जरूरी है।
PPF के फायदे
PPF पूरी तरह से सरकारी गारंटी के साथ आने वाली योजना है। इसमें आपको तीन स्तर पर टैक्स फायदा मिलता है। निवेश की रकम पर टैक्स छूट, ब्याज पर टैक्स नहीं और मैच्योरिटी की पूरी रकम टैक्स-फ्री। आप हर साल 500 रुपए से लेकर 1.5 लाख रुपए तक निवेश कर सकते हैं। इसकी लॉक-इन अवधि 15 साल की होती है, लेकिन चाहें तो आप बीच में आंशिक निकासी या एक्सटेंशन का विकल्प भी चुन सकते हैं।


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