नयी दिल्ली। जितने भी निवेश ऑप्शन मौजूद हैं उनमें लंबी अवधि, निश्चित रिटर्न और सुरक्षा के लिए लिहाज से पीपीएफ एक बेहतर विकल्प है। मगर निवेश, चाहे आप कहीं भी करें, के लिए आपको कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना जरूरी है। क्योंकि इससे आपको कई तरह से अधिक फायदा मिल सकता है। उदाहरण के लिए एफडी में पैसा लगाने से पहले ये जरूर देखें कि किस अवधि पर कितना ब्याज मिलेगा। साथ ही अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों की जानकारी लेना और भी बेहतर है। इसी तरह पीपीएफ (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) के लिए एक ऐसा तरीका है जिससे आप अधिक ब्याज हासिल कर सकते हैं। पीपीएफ निवेशकों के लिए बेहतर है कि वे हर महीने की 5 तारीख से पहले ही निवेश राशि जमा करा दें। इससे आपको क्या अधिक फायदा मिलेगा आइये जानते हैं।
ये मिलेगा आपको फायदा
5 तारीख से पहले ही निवेश राशि जमा करने पर आपको अधिक ब्याज मिलेगा। दरअसल निवेशकों के पीपीएफ खातों पर दी जाने वाली ब्याज दर की गणना महीने के पांचवें दिन और महीने के आखिरी दिन के बीच खाते में जमा न्यूनतम बैलेंस राशि पर की जाती है। इस लिहाज से अगर आप 5 तारीख से पहले ही पैसे जमा कर दें तो ब्याज की गणना के समय के दौरान आपका न्यूनतम बैलेंस ज्यादा रहेगा और आपको अधिक जमा राशि पर ब्याज भी ज्यादा मिलेगा।
हर महीने होती है ब्याज की गणना
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पीपीएफ पर वैसे तो सालाना ब्याज मिलता है। मगर ध्यान रखना जरूरी है कि आपके पीपीएफ खाते पर ब्याज की गणना मासिक आधार पर यानी हर महीने की जाती है। हालांकि आपके पीपीएफ खाते में हर साल 31 मार्च को ही ब्याज राशि जमा की जाती है। आपको पीपीएफ में निवेश के समय को ध्यान में रखना चाहिए, वरना आपको कम ब्याज मिलेगा। इस योजना में मैच्योरिटी अवधि 15 साल होती है। आप पीपीएफ के जरिए 15 से ज्यादा सालों के लिए निवेश करके एक बड़ा फंड बना सकते हैं। आप अगर इस योजना की मैच्योरिटी अवधि बढ़ाते हैं (पीपीएफ में 15 साल बाद निवेश अवधि बढ़ाई जा सकती है) तो आपको मिलने वाले ब्याज पर भी ब्याज मिलेगा।
कितना है अधिकतम निवेश
पीपीएफ में कोई निवेशक प्रति वर्ष 1.5 लाख रुपये से अधिक का निवेश नहीं कर सकता। कोई पीपीएफ निवेशक 5 साल के बाद निवेश रोक भी सकता है और 15 साल बाद पूरी राशि निकाल सकता है। सुविधा की बात ये है कि पीपीएफ खाते को अन्य शाखाओं / अन्य बैंकों या डाकघरों में ट्रांसफर किया जा सकता है। इसके लिए आपसे कोई चार्ज भी नहीं लिया जाएगा।
होती है टैक्स की बचत
पुराने टैक्स सिस्टम के अंतर्गत धारा 80 सी के तहत कोई आयकरदाता पीपीएफ में प्रति वर्ष 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट का दावा कर सकता है। वैसे तो पीपीएफ एक ईईई स्कीम है। ईईई यानी छूट-छूट-छूट। इसका मतलब है कि आपको पुरानी टैक्स व्यवस्था में पीपीएफ पर निवेश, मिलने वाले ब्याज और मैच्योरिटी राशि तीनों पर टैक्स से छूट मिलती है। नई टैक्स व्यवस्था में आपको पीपीएफ में निवेश पर टैक्स छूट नहीं मिलेगी, मगर फिर भी आपको भविष्य में मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी राशि टैक्स मुक्त होगी।
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