नई दिल्ली, अप्रैल 11। अगर आपको अपने निवेश पर मिलने वाला रिटर्न महंगाई को मात नहीं दे रहा है, तो आपको उल्टे नुकसान हो रहा है। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ मुद्रास्फीति (महंगाई) और पारंपरिक निवेश (एफडी आदि) से आय के बीच बढ़ती खाई ने कई भारतीयों की दौलत को नष्ट कर दिया है। यह एक वैश्विक घटना है। श्रीलंका जैसे देश आर्थिक समस्याओं के बीच भारी मुद्रास्फीति का सामना करने वाले देशों के उदाहरण हैं। भारत के सबसे बड़े बैंकों का औसत टैक्स के बाद एफडी रिटर्न 2.5-3% है, जो 6.07% की सीपीआई मुद्रास्फीति से कम है। साथ ही, अधिकांश डेट म्यूचुअल फंडों के टैक्स के बाद रिटर्न मुश्किल से ही मुद्रास्फीति को मात देने में कामयाब रहे हैं। पीपीएफ का भी यही हाल है। सवाल यह है कि ऐसे में क्या किया जाए? आगे जानिए इस समस्या का समाधान।
एफडी-पीपीएफ से हट कर नये ऑप्शन देखें
यह देखते हुए कि पिछले 60 वर्षों में किसी कमर्शियल बैंक में एफडी कराने पर किसी को नुकसान नहीं हुआ, यह समझ में आता है कि ये भारत की पसंदीदा फाइेंशियल एसेट क्यों हैं। हालांकि, इनकी सुरक्षा और सहजता के बावजूद, एफडी से वास्तविक रिटर्न (मिलने वाले रिटर्न में से महंगाई दर घटाएं) निगेटिव जोन में है। इसे एसबीआई ने पिछले साल स्वीकार भी किया था। पीपीएफ का भी यही हाल है। इसलिए एक निवेशक के रूप में आपको एफडी, पीपीएफ या ऐसे अन्य उत्पादों से परे देखने की आवश्यकता है। इनमें स्टॉक मार्केट, म्यूचुअल फंड या गोल्ड ईटीएफ हो सकते हैं।
चतुराई से करें टैक्स की बचत
जो लोग नये इनकम टैक्स सिस्टम में ट्रांसफर नहीं हुए हैं, उनके लिए पहला तरीका है कि वे अपनी कर योग्य आय को धारा 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक कम कर सकते हैं। इसके लिए सबसे अच्छा निवेश ईएलएसएस फंड हो सकता है। जहां पीपीएफ और टैक्स सेविंग एफडी में क्रमशः 5 साल और 15 साल का लॉक-इन होता है, वहीं ईएलएसएस फंड में 3 साल का लॉक-इन होता है। टैक्स बचाने के और भी तरीके हैं, जो आपको दो बेनेफिट देंगे। पहला आपको रिटर्न दिलाएंगे और दूसरा टैक्स बचत।
खुद को शिक्षित करें और किसी प्रोफेश्नल से सलाह लें
गोल्ड हमेशा मुद्रास्फीति को मात नहीं देता है, रियल एस्टेट हमेशा ऊपर नहीं जाती है, इसे खरीदना हमेशा किराए से बेहतर नहीं होता है, और आईपीओ जल्दी पैसा बनाने का एक निश्चित तरीका नहीं है। अन्य चीजों के अलावा फाइनेंशियल एजुकेशन विभिन्न एसेट क्लास को समझने और एसेट एलोकेशन पर ध्यान देने को लेकर है। एसेट एलोकेशन यानी अपने पैसे को इस तरह विभाजित किया जाए ताकि यह आपके पैसे के लक्ष्यों को पूरा करने में आपकी मदद करे। जबकि कोई इन चीजों को सीख सकता है और खुद ट्रेंड निवेशक बन सकता है, मगर देखा जाता है कि किसी प्रोफेश्नल की राय का कोई विकल्प नहीं है। इसलिए आप भी किसी प्रोफेश्नल से सलाह लें।
सलाह क्यों है जरूरी
मुद्रास्फीति-प्रूफ पोर्टफोलियो बनाने के लिए उसी अप्रोच की आवश्यकता होती है, जैसे किसी के द्वारा स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए। इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह की जरूरत होगी ही।
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