नयी दिल्ली। नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) दोनों ही निवेश के बढ़िया ऑप्शन हैं। दोनों ही फ्यूचर को सुरक्षित बनाने के लिए सही हैं। मगर इनमें ज्यादा फायदा कहां है और कौन सा ऑप्शन आपको जल्दी करोड़पति बना सकता है, यह सवाल अहम है। इसी सवाल के चलते पीपीएफ और एनपीएस में से कोई एक ऑप्शन चुनना हो तो कोई भी कंफ्यूज हो सकता है। वैसे अक्सर ऐसा होता है कि साल में 1.5 लाख रु तक का टैक्स बचाने के लिए लोग पीपीएफ में निवेश करते हैं और बाकी पैसा एनपीएस में लगाते हैं। मगर हम आपके सामने यहां एक ऐसी कैल्कुलेशन रखेंगे, जिससे आपके लिए एक ऑप्शन चुनना आसान हो जाएगा।
कौन सा ऑप्शन ज्यादा फायदेमंद
एनपीएस में आपके द्वारा निवेश किया गया पैसा इक्विटी में भी जाता है। यानी यहां से लंबी अवधि में औसतन 10 फीसदी रिटर्न मिल सकता है। दूसरी तरफ यदि आप पीपीएफ में निवेश करें तो रिटर्न सिर्फ 7.1 फीसदी मिलेगा। इतना रिटर्न एनपीएस के मुकाबले करीब 3 फीसदी कम है। लंबी अवधि में 3 फीसदी रिटर्न बहुत अधिक हो जाएगा।
पीपीएफ से बने करोड़पति
वैसे करोड़पति आप एनपीएस और पीपीएफ दोनों से ही बन सकते हैं। पीपीएफ में यदि आप हर महीने 12,500 रु का निवेश करें तो साल का हुआ 1.5 लाख रु। अब इस पर आपको 7.1 फीसदी रिटर्न मिलेगा। पीपीएफ कैल्कुलेटर के अनुसार यदि आप इतना निवेश 30 साल तक जारी रखें तो मैच्योरिटी पर आपको मिलेंगे 1.54 करोड़ रु। अच्छी बात ये है कि पीपीएफ में निवेश, मिलने वाले ब्याज और मैच्योरिटी राशि किसी पर भी टैक्स नहीं लगता।
एनपीएस से करोड़पति
पीपीएफ के उलट अगर आप एनपीएस स्कीम में सालाना 1.5 लाख रुपये (मासिक आधार पर 12,500 रुपये) का निवेश करते हैं और एन्युटी को 40 प्रतिशत पर निश्चित रखते हैं। तो एनपीएस कैलकुलेटर के अनुसार मैच्योरिटी पर आपको 1,70,94,940 रु मिलेंगे। इसमें से लगभग 1.14 करोड़ रुपये का इस्तेमाल एन्युटी खरीदने में होगा। इससे आपको लगभग 57 हजार रु मासिक पेंशन मिलेगी।
ऐसे पाएं ज्यादा पेंशन
18-65 वर्ष का कोई भी भारतीय नागरिक (अनिवासी भी) एनपीएस खाता खोल सकता है। मगर एक से ज्यादा एनपीएस खाते रखने की अनुमति नहीं होती। मगर यदि आप ज्यादा पेंशन चाहते हैं तो अटल पेंशन योजना में एक अकाउंट रख सकते हैं। एनपीएस खाता कोई अकेला ही खोल सकता है। इसमें जॉइंट अकाउंट सुविधा नहीं मिलती।
एनपीएस में कैसे रिटर्न होता है तय
जानकारी के लिए बता दें कि एनपीएस एक मार्केट लिंक्ड स्कीम है। इस पर मिलने वाला रिटर्न इक्विटी मार्केट (शेयर बाजार) पर निर्भर करता है। इसलिए यहां रिटर्न कम-ज्यादा भी हो सकता है। निश्चित या एक जैसा रिटर्न मिलने की संभावना नहीं रहती। वैसे जैसा दौर चल रहा है उसमें अपने फ्यूचर और इमरजेंसी के लिए खुद ही तैयारी करनी जरूरी है। खास कर रिटायरमेंट की आयु के पास पहुंचने से पहले हम उसके बाद के खर्चों की तैयारी कर लेनी चाहिए। मेडिकल सुविधाएं काफी महंगी हैं और बुढ़ापे में उनकी जरूरत पड़ेगी ही। इसलिए पहले से इतनी तैयारी रखें कि आपके पास पैसे की कमी न हो।
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