नई दिल्ली, जून 10। पोस्ट ऑफिस एक सरकारी संस्थान है, जो कई सारी छोटी बचत योजनाएँ ऑफर करता है। इन योजनाओं पर बैंक एफडी जैसे विकल्पों की तुलना में ज्यादा ब्याज मिलता है। पोस्ट ऑफिस की कुछ खास योजनाओं में पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि योजना और टाइम डिपॉजिट शामिल हैं। बता दें कि पोस्ट ऑफिस की सभी योजनाओं की ब्याज दरों की हर तीन महीनों में समीक्षा होती है। समीक्षा के बाद इनमें कटौती और बढ़ोतरी संभव है। ये भी संभव रहता है कि इनमें कोई बदलाव किया जाए। जैसा कि पिछली 9 तिमाहियों से इन योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अब जून तिमाही खत्म होने की ओर बढ़ रही है। 1 जुलाई से नयी तिमाही शुरू होगी। इसलिए नयी तिमाही पर इन योजनाओं की ब्याज दरें बदल सकती हैं। बेहतर यह है कि अभी ही इन योजनाओं में निवेश किया जाए ताकि, यदि 1 जुलाई से ब्याज दरें घटें तो आपको अधिक ब्याज मिले। आगे जानिए कि फिलहाल पोस्ट ऑफिस की कौन सी योजना पर कितना ब्याज मिल रहा है।
अभी कितनी हैं ब्याज दरें
2022 की अप्रैल-जून तिमाही के दौरान पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया था। जनवरी-मार्च में जितना ब्याज मिला, उतना ही अप्रैल-जून में मिल रहा है। वित्त मंत्रालय ने 31 मार्च 2022 को इस मामले में सर्कुलर जारी किया था, जिसके अनुसार पीपीएफ पर 7.10 फीसदी, एनएससी पर 6.8 फीसदी और मासिक आय योजना खाते पर 6.6 फीसदी ब्याज दर बरकरार रखी गयी।
बचत योजनाओं की मौजूदा ब्याज दरें :
- बचत खाता : 4 फीसदी
- 1 वर्षीय टाइम डिपॉजिट : 5.5 फीसदी
- 2 वर्षीय टाइम डिपॉजिट : 5.5 फीसदी
- 3 वर्षीय टाइम डिपॉजिट : 5.5 फीसदी
अन्य योजनाओं की ब्याज दरें :
- 5 वर्षीय टाइम डिपॉजिट : 6.7 फीसदी
- 5 वर्षीय रेकरिंग डिपॉजिट : 5.8 फीसदी
- 5 वर्षीय सीनियर सिटीजेन सेविंग्स स्कीम : 7.4 फीसदी
- 5 वर्षीय मासिक आय खाता : 6.6 फीसदी
प्रसिद्ध योजनाओं की ब्याज दरें :
- 5 वर्षीय नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट : 6.8 फीसदी
- पीपीएफ : 7.1 फीसदी
- किसान विकास पत्र : 6.9 फीसदी (124 महीनों में मैच्योर)
- सुकन्या समृद्धि योजना : 7.6 फीसदी
कब घटाया गया था ब्याज
आखिरी बार अप्रैल-जून 2020 में सरकार ने छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कटौती की थी। उस बार 70-140 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की गई थी। बता दें कि अगर सरकार दूसरी या तीसरी तिमाही में भी इसी तरह से ब्याज दरें घटाती तो पीपीएफ जैसे निवेश उपकरण की ब्याज दर 7 प्रतिशत से नीचे चली जाती, जो 46 सालों में सबसे कम होती।
ऐसे तय होती है ब्याज दरें
जैसा कि हमने बताया कि हर तीन महीनों में इन छोटी बचत योजनाओं पर दी जाने वाली ब्याज दरों की समीक्षा की जाती है। छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों को तय करने का एक फॉर्मूला है, जिसे श्यामला कमेटी ने पेश किया था। कमेटी का यह सुझाव दिया था कि विभिन्न योजनाओं पर ब्याज दर समान परिपक्वता अवधि वाले सरकार के बॉन्ड्स के यील्ड से 0.25 फीसदी से लेकर 1 फीसदी अधिक होना चाहिए।
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