नयी दिल्ली। ज्यादातर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सदस्य कई ईपीएफओ नियमों के बारे में नहीं जानते हैं। जैसे कि ईडीएलआई नियम, जिसके तहत पीएफ खाताधारकों को 6 लाख रुपये तक का मुफ्त इंश्योरेंस मिलता है। इसके अलावा पेंशन और 5 साल से पहले पीफ खाते से पैसे निकालने पर टैक्स जैसे नियम भी अधिकतर लोगों की जानकारी में नहीं रहते। इन ईपीएफओ नियमों की जानकारी न होने के कारण लोग गलतियाँ करके पैसा गंवाते रहते हैं। ऐसा ही एक और बेनेफिट है, जिसके बारे में अगर आपको नहीं पता तो सीधे 50000 रु का नुकसान होगा। वो बेनेफिट है लॉयल्टी कम लाइफ। इस बेनेफिट के तहत आपको 50000 रुपये का फायदा होता है। कैसे मिलता है ये बेनेफिट आइये जानते हैं।
रिटायरमेंट के समय मिलते हैं 50000 रु
लॉयल्टी कम लाइफ बेनेफिट के तहत ईपीएफ खाताधारक को अन्य ईपीएफ बेनेफिट के साथ रिटायरमेंट पर 50,000 रुपये तक अतिरिक्त मिलते हैं। हालांकि इसके लिए जरूरी है आपने कम से कम 20 साल या इससे ज्यादा समय तक पीएफ अकाउंट में योगदान किया हो। इसलिए किसी भी ईपीएफ खाताधारक को सलाह दी जाती है कि वह एक ही ईपीएफ खाते में योगदान जारी रखें, चाहे वह नौकरी बदलते भी रहें तब भी। इससे उन्हें लॉयल्टी कम लाइफ बेनेफिट लेने के लिए न्यूनतम 20 वर्षों की शर्त को पूरा करने में मदद मिलेगी।
केंद्र सरकार ने लगाई नियम पर मुहर
सीबीटी ने 13 अप्रैल को लॉकडाउन के दौरान ही उन ईपीएफ खाताधारकों के लॉयल्टी कम लाइफ बेनेफिट की सिफारिश की थी, जो कम से कम 20 वर्षों से पीएफ खाते में लगातार योगदान दे रहे हैं। केंद्र सरकार ने इस नियम पर मुहर लगा दी है, जिसका अर्थ है कि 20 साल की शर्त को पूरा करने वाले ईपीएफ खाताधारक अब 50,000 रुपये तक के अतिरिक्त लाभ के पात्र हैं।
किसे मिलेगा कितना बेनेफिट
सरकार की तरफ से लॉयल्टी कम लाइफ पर दी गई जानकारी के मुताबिक जिनका मूल मासिक वेतन 5,000 रुपये तक है, वे 30,000 रुपये के लाभ के पात्र होंगे, जिनका मासिक मूल वेतन 5,001 रुपये से 10,000 रुपये तक होगा उन्हें 40,000 रुपये तक का बेनेफिट मिलेगा। जबकि उन लोगों के लिए जिनका मासिक मूल वेतन 10,000 रुपये से अधिक है, उन्हें 50,000 रुपये का बेनेफिट दिया जाएगा।
एक ही खाते में योगदान रखें बरकरार
जानकार इस योजना का लाभ उठाने के लिए सलाह देते हैं कि आप हमेशा एक ही ईपीएफ खाते में योगदान करना जारी रखें, चाहे आप अपनी नौकरी बदले तब भी। आपको बस करना इतना होगा कि अपनी नई और पुरानी कंपनी को अपने पुराने ईपीएफ खाते में योगदान जारी रखने के निर्णय के बारे में बताना होगा।


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