Personal Loan Legal Rights :अगर आप पर्सनल लोन नहीं चुका पा रहे हैं, तो परेशान न हों। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सर्कुलर के अनुसार, बैंकों को यह जानकारी दी गई है कि वे डिफॉल्टर के साथ लोन का सेटलमेंट करेंगे और 12 महीने बाद उस शख्स को अगर जरूरत हो तो फिर से लोन देंगे। चलिए इसके बारे में आपको और जानकारी देते हैं।

बैंक से ले सकते हैं मदद
आपने जिस भी बैंक से लोन लिया वहां पर आप बात करके कुछ समय की मांग कर सकते हैं जिसमें आप अपने लोन चुका चुका सकते हैं।
लोन की ईएमआई चुकाने के लिए अगर एक फिक्स्ड समय ( जैसे 1 साल, 2 साल, 3 साल) की छूट की मांग करते हैं तो बैंक आपकी मांग को पूरा कर सकता है।
इसके अलावा आप बहुत समय से लोन के जाल में फंसे हुए हैं तो आप लोन का पैसा चुकाने के लिए अपनी किसी प्रोपर्टी को गिरवी रखने या बेच सकते हैं। अगर किसी तरह की प्रोपर्टी नहीं है, जिसे बेच सकते हैं तो अपने निवेश को ऐसे समय में इस्तेमाल कर सकते हैं। निवेश की रकम को निकालकर लोन को चुकाया जा सकता है।
लोन स्ट्रक्चरिंग की लीजिए मदद
अगर आपने पिछले कुछ महीनों से ईएमआई नहीं भरी है, तो आपको रिस्ट्रक्चरिंग की सुविधा मिलेगी। लेकिन, यह बैंक के ऊपर है कि वह किस तरह आपको छूट देगा या नहीं देगा।
अगर आप चाहते हैं कि आपकी ईएमआई की राशि कम हो जाए तो आप बैंक से अपने कर्ज भरने की समय सीमा बढ़वा सकते हैं। इससे आपको यह फायदा होगा कि आप पर भारी- भरकम ईएमआई का बोझ कम हो जाए और आप लंबे समय तक कम किश्त भर सकते हैं।
बैंक से सही कम्युनिकेशन आपकी परेशानी को कम कर सकता है। डिफॉल्टरों के साथ मिलकर काम करके, बैंक उनकी वित्तीय क्षमताओं के अनुरूप लचीली पुनर्भुगतान योजना या अन्य विकल्प तलाश सकते हैं। सही वित्तीय दृष्टिकोण अपनाने से न केवल बेहतर लोन चुकाने की सुविधा मिल सकती है, बल्कि व्यक्तियों को अपनी वित्तीय स्थिरता हासिल करने और अपने क्रेडिट स्वास्थ्य का पुनर्निर्माण करने में भी मदद मिल सकती है।
समय पर लोन न भरने पर होते हैं यह नुकसान
आपको बता दें कि लोन लेने के लिए सिबिल स्कोर या क्रेडिट स्कोर काफी मायने रखता है। यह तीन अंकों की एक संख्या होती है जो 300 से 900 के बीच होती है और यह संख्या जितनी ज्यादा होगी, क्रेडिट स्कोर उतना ही अच्छा माना जाएगा और लोन मिलने के आसार उतने ही बढ़ जाते हैं।
अगर आप डिफॉल्टर की श्रेणी में आ जाते हैं तो हो सकता है कि आपका क्रेडिट स्कोर जीरो भी हो जाए। अगर ऐसा होता है तो हो सकता है कि बैंक आपको लोन ही न दे। 500 से कम क्रेडिट स्कोर वाले व्यक्ति को बैंक लोन नहीं देता हैं।
इन बातों का भी रखें ध्यान
● अपनी वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन करें
● लोन के भुगतान की योजना पर बैंक में बातचीत करें
● व्यावसायिक सहायता लें
● लोन भुगतान को प्राथमिकता दें
● क्रेडिट स्कोर को सुरक्षित रखें
● लोन सेटेलमेंट की मदद लें
इन तरीकों से भी आप ईएमआई का बोझ कम कर सकते हैं।
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