Personal Loan: पर्सनल लोन लेना तो आसान होता है, लेकिन इसकी ब्याज दरें इतनी ज्यादा होती हैं कि इसे चुकाना मुश्किल हो जाता है। कई बार लोग इस लोन के चक्कर में ऐसे फंस जाते हैं कि सालों तक सिर्फ EMI भरते रहते हैं और उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा ब्याज में चला जाता है।

लेकिन अगर आप समझदारी से काम लें, तो समय रहते इस कर्ज से बाहर निकलना मुमकिन है। थोड़ी प्लानिंग और सही फैसलों से आप पर्सनल लोन के बोझ को जल्दी खत्म कर सकते हैं।
आवेदन फॉर्म जमा करें
पर्सनल लोन अकाउंट बंद कराने के लिए आवेदन पत्र जमा करना एक जरूरी प्रक्रिया है। इसके लिए आपको बैंक से एक आवेदन पत्र लेना होगा, जिसमें आपको अपना नाम, लोन अकाउंट नंबर, अकाउंट बंद कराने का कारण आदि जानकारी भरनी होगी। अगर आप फोरक्लोजर (loan foreclosure) करना चाहते हैं, यानी तय समय से पहले पूरा लोन चुकाना चाहते हैं, तो आपको यह भी बताना होगा कि भुगतान किस माध्यम से करेंगे-जैसे बैंक ट्रांसफर, नकद या चेक। यह सारी जानकारी सही तरीके से भरकर बैंक में जमा करनी होती है, तभी लोन खाता बंद करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
ईएमआई को बढ़ाएं
हर साल अपनी EMI में थोड़ा-थोड़ा इजाफा करना लोन चुकाने का एक समझदारी भरा और असरदार तरीका है। अगर आपकी सैलरी हर साल बढ़ती है, तो उसी के साथ EMI की राशि को भी 5% से 10% तक बढ़ा देना चाहिए। इससे आपकी जेब पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा, लेकिन यह सीधा आपके लोन के मूलधन को कम करने में मदद करेगा। EMI में की गई यह छोटी-सी बढ़ोतरी आपको धीरे-धीरे लेकिन पक्के तौर पर कर्ज से जल्दी मुक्ति दिला सकती है।
जरूरी डॉक्यूमेंट्स संभालकर रखें
जब आप अपना पर्सनल लोन पूरी तरह चुका देते हैं और अकाउंट बंद कराते हैं, तो बैंक से लोन का अंतिम स्टेटमेंट जरूर लें, जिसमें यह साफ तौर पर दर्ज हो कि आपने कितनी रकम चुकाई और अब कोई बकाया नहीं है। अगर लोन लेते समय आपने कोई सिक्योरिटी या डॉक्यूमेंट्स (जैसे चेकबुक, संपत्ति के कागज या गारंटी दस्तावेज) बैंक को दिए थे, तो उन्हें भी वापिस लेना न भूलें।
क्रेडिट रिपोर्ट की जांच भी है जरूरी
लोन पूरी तरह चुकाने और अकाउंट बंद करवाने के कुछ हफ्तों बाद अपनी क्रेडिट रिपोर्ट जरूर जांचें। इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि आपका लोन अकाउंट सही तरीके से 'Closed' यानी बंद के रूप में अपडेट हुआ है या नहीं। अगर रिपोर्ट में लोन अब भी Active या Overdue दिख रहा हो, तो यह आपके क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक असर डाल सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन से संपर्क करें और रिपोर्ट को सही करवाएं।
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