नई दिल्ली। अगर आप मकान मालिक हैं, तो आपका एक तनाव खत्म हो गया है। हाल ही में इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिव्यूनल यानी आईटीएटी ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। इसके चलते देश के तमाम मकान मालिकों को राहत मिल गई है।
जानिए क्या है पूरा मामला
दरअसर किराए से होने वाली आय को लेकर एक मामला यहां पर चल रहा था। कई बार होता है कि किराएदार किराया देने में असमर्थ रहता है, लेकिन मकान मालिक पर इनकम टैक्स किराया न मिलने के बाद उसे आय मान कर इस पर टैक्स लगा रहा था। लेकिन हाल ही में इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (आईटीएटी) की मुंबई बैंच ने किराए से होने वाली आय पर लगने वाले टैक्स को लेकर एक स्पषट आदेश दिया है। इस आदेश के अनुसार यदि किसी संपत्ति के मालिक को किरायेदार किराया नहीं दे रहा है, तो संपत्ति के मालिक को उस इनकम पर टैक्स नहीं भरना होगा।
जानिए इस निर्णय का फायदा
इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (आईटीएटी) की मुंबई बैंच का यह निर्णय उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है, जिनके किरायेदार कोरोना महामारी या अन्य किसी कारण से अपना किराया नहीं दे पा रहे हैं। एक तरफ मकान मालिक को किराया नहीं मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसे इस पर टैक्स देना पड़ रहा है। लेकिन अब स्पष्ट फैसला आ गया है, जिससे देश के लाखों मकान मालिकों को राहत मिलेगी।
समझिए इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल का आदेश
इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (आईएटीए) की मुंबई बैंच के आदेश के अनुसार अगर किसी का कोई किरायेदार, जो 10 हजार रुपये किराया दे रहा है। मान लीजिए उसने वित्त वर्ष 2020-21 के 12 महीनों में 8 महीने का ही किराया दिया है, और बाकी 4 महीने का किराया बाद में देने को कह रहा है। यानी उस साल आपकी किराये से कुल आय 1 लाख 20 हजार रुपए होनी चाहिए, लेकिन अब वह सिर्फ 80 हजार रुपये ही रहेगी। ऐसे में 80 हजार रुपये को ही उस वित्त वर्ष की किराये से होने वाली आय माना जाएगा। अगर किरायेदार इन 4 महीनों का किराया यानी 40 हजार रुपये वित्त वर्ष 2020-21 में नहीं दे पता है, तो मकान मालिक को इस पर अब इनकम टैक्स नहीं देना होगा।
जानिए ट्रिब्यूनल ने क्या कहा है
ट्रिब्यूनल ने इससे जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किराये की आमदनी पर टैक्स तभी लगाया जाना चाहिए, जबकि करदाता ने ऐसा किराया प्राप्त कर लिया हो या प्राप्त करने वाला हो या प्राप्त करने की पूर्ण निश्चितता हो l इस केस में करदाता को किरायेदार से किराया प्राप्त करने की कोई उम्मीद नहीं है, ऐसे किराये पर आयकर विभाग की तरफ से टैक्स लगाया जाना पूर्णतः गलत तथा अवैधानिक है।
अभी तक क्या चल रही थी व्यवस्था
अभी तक मान लिया जाता था कि मकान मालिक को किराया मिल ही जाएगा। इसीलिए उस पर उसी वित्त वर्ष में किराये की आय पर लगने वाला टैक्स वसूला लिया जाए। लेकिन अब ये माना गया है कि हो सकता है कि किरायेदार अगर किराया दे ही नहीं पता है, तो मकान मालिक पर टैक्स का बोझ डालना गलत है।
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