'वन नेशन वन राशन कार्ड' (ONORC) योजना ने देश के आम नागरिकों के लिए राशन लेने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। अब प्रवासी मजदूरों को सस्ते अनाज के लिए भटकने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वे भारत के किसी भी राज्य में अपनी पसंद की दुकान से राशन ले सकते हैं। इस डिजिटल सिस्टम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि काम के सिलसिले में दूसरे राज्य जाने पर भी लाभार्थी का हक नहीं छिनता और परिवारों को राशन लेने में पूरी आजादी मिलती है।
यह पूरा सिस्टम 'इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट ऑफ पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम' (IM-PDS) पर आधारित है। राशन लेने के लिए लाभार्थियों को किसी भी दुकान पर जाकर अपना आधार नंबर देना होता है। वहां लगी इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल (ePoS) मशीन बायोमेट्रिक्स के जरिए आपकी पहचान की पुष्टि करती है और फिर अनाज जारी किया जाता है। यह सुरक्षित प्रक्रिया न केवल धोखाधड़ी को रोकती है, बल्कि देश में कहीं भी जरूरी राशन मिलना आसान बनाती है।

One Nation One Ration Card: कैसे मिलता है सब्सिडी का फायदा?
नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट (NFSA) के तहत आने वाला कोई भी नागरिक इस सुविधा का लाभ उठा सकता है। इसमें अंत्योदय अन्न योजना (AAY) और प्रायोरिटी हाउसहोल्ड (PHH) कैटेगरी के सभी कार्डधारक शामिल हैं। इसके जरिए मजदूर और कामगार दूसरे राज्यों में भी केंद्र सरकार की तय सस्ती दरों पर गेहूं और चावल खरीद सकते हैं। यह उन लाखों लोगों के लिए वरदान है जो बेहतर काम की तलाश में अपना घर छोड़कर दूसरे शहरों में जाते हैं।
फिलहाल, ONORC सिस्टम देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में काम कर रहा है। इसकी एक खास सुविधा यह है कि प्रवासी मजदूर अपने हिस्से का राशन अपनी काम वाली जगह पर ले सकते हैं, जबकि उनके परिवार के बाकी सदस्य अपने गांव या घर पर अपना हिस्सा आसानी से उठा सकते हैं। यह 'स्प्लिट राशन' की सुविधा उन परिवारों के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच है जो अलग-अलग जगहों पर रह रहे हैं।
| अनाज का प्रकार | कीमत (प्रति किलो) | मुख्य फायदा |
|---|---|---|
| चावल | 3 रुपये | हर जगह उपलब्धता |
| गेहूं | 2 रुपये | पूरे देश में एक ही दाम |
| मोटा अनाज | 1 रुपये | पोषण का साथ |
राशन कार्ड के इस्तेमाल में आने वाली दिक्कतें और समाधान
कई बार बायोमेट्रिक मैच न होने या इंटरनेट की सुस्त रफ्तार की वजह से राशन मिलने में दिक्कत आती है। कभी-कभी स्थानीय डीलरों को नियमों की पूरी जानकारी न होना भी एक बाधा बन जाता है। ऐसी स्थिति में 'मेरा राशन' (Mera Ration) मोबाइल ऐप काफी काम आता है। इसके जरिए आप नजदीकी राशन दुकान ढूंढ सकते हैं और अपनी पात्रता चेक कर सकते हैं। साथ ही, अपना मोबाइल नंबर अपडेट रखें ताकि राशन के बैलेंस और अलर्ट की जानकारी मिलती रहे।
इस डिजिटल बदलाव को अपनाकर परिवार अपनी सेहत और आजीविका दोनों का ख्याल रख सकते हैं। अब दूसरे राज्य जाने पर नए दस्तावेज बनवाने का झंझट पूरी तरह खत्म हो गया है। उम्मीद है कि आने वाले समय में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से तकनीकी बाधाएं भी दूर हो जाएंगी। यह देशव्यापी एकीकरण 'डिजिटल इंडिया' की दिशा में एक बेहद मजबूत और सराहनीय कदम है।


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