NSE IPO में रिटेल निवेशक सोमवार, 21 सितंबर को सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक बोली लगा सकते हैं। ध्यान रखें कि UPI मैंडेट अप्रूव करने की डेडलाइन भी 21 सितंबर शाम 7 बजे ही तय की गई है। इस आईपीओ का प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 तय हुआ है और एक लॉट में 8 शेयर हैं। यह इश्यू पूरी तरह से 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) है। इसके शेयरों की लिस्टिंग गुरुवार, 24 सितंबर को होगी।
आप अपने ब्रोकर ऐप से UPI के जरिए या फिर नेटबैंकिंग में ASBA (एप्लीकेशन सपोर्टेड बाय ब्लॉक्ड अमाउंट) का इस्तेमाल करके इसमें अप्लाई कर सकते हैं। आवेदन करते समय UPI ऑटोपे को इनेबल रखें, खाते में पर्याप्त बैलेंस बनाए रखें और मैंडेट में एप्लिकेशन नंबर ज़रूर मिला लें। अगर मैंडेट आने में देरी हो या कोई गड़बड़ी दिखे, तो अपडेटेड मैंडेट का इंतजार करें या फिर से अप्लाई करें। ध्यान रहे, UPI मैंडेट का समय शाम 7 बजे खत्म हो जाएगा, ऐसे में ASBA एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।

NSE IPO की पूरी टाइमलाइन: अलॉटमेंट, रिफंड और लिस्टिंग की तारीखें
शेयरों का अलॉटमेंट मंगलवार, 22 सितंबर को तय होगा। जिन्हें शेयर नहीं मिलेंगे, उनका रिफंड और जिन्हें मिलेंगे, उनके डीमैट अकाउंट में शेयर क्रेडिट करने की प्रक्रिया बुधवार, 23 सितंबर को पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद गुरुवार, 24 सितंबर को BSE पर शेयरों की ट्रेडिंग शुरू हो जाएगी। आईपीओ का अलॉटमेंट स्टेटस चेक करने के लिए रजिस्ट्रार के पोर्टल या अपने ब्रोकर ऐप का इस्तेमाल करें। ग्रे मार्केट के दावों पर ध्यान देने के बजाय एक्सचेंज के आधिकारिक बिडिंग डेटा से ही असली डिमांड का अंदाजा लगाएं।
NSE IPO: जोखिम और वैल्यूएशन का गणित
यह आईपीओ पूरी तरह से 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) है, इसलिए इससे मिलने वाली रकम कंपनी के पास नहीं जाएगी। एनएसई की कमाई सीधे तौर पर ट्रेडिंग वॉल्यूम और चार्ज पर निर्भर करती है, जो बाजार के उतार-चढ़ाव और सेबी के नियमों से प्रभावित होती है। हालांकि NSE का दायरा काफी बड़ा है, लेकिन डेरिवेटिव सेगमेंट पर ज्यादा निर्भरता की वजह से सुस्त बाजार में इसकी कमाई पर असर पड़ सकता है। इसलिए किसी भी गैर-आधिकारिक ग्रे मार्केट के बहकावे में आने के बजाय कंपनी के डाक्यूमेंट्स और सब्सक्रिप्शन आंकड़ों पर ही भरोसा करें।
NSE IPO या एफडी (FD): रिटर्न और रिस्क का आसान गणित
आईपीओ में अलॉटमेंट तक ही आपका पैसा ब्लॉक रहता है, इसलिए इसमें फंसा रहने का समय बहुत कम होता है। फिर भी संभावित लिस्टिंग गेन की तुलना फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के एक साल के ब्याज से करके देखना समझदारी है। फिलहाल देश के बड़े बैंकों में 1 साल की एफडी पर करीब 6 फीसदी का ब्याज मिल रहा है। अफवाहों के पीछे भागने से बेहतर है कि आप इसी पैमाने पर रिस्क और रिटर्न का आकलन करें। नीचे प्रमुख बैंकों की 1 साल की एफडी दरें दी गई हैं (बैंक बिना किसी पूर्व सूचना के इन्हें बदल भी सकते हैं):
| बैंक | अनुमानित 1-साल की FD दर (सामान्य नागरिक) |
|---|---|
| SBI | 6.45% |
| HDFC Bank | 6.25% |
| ICICI Bank | 6.25% |
अगर आप NSE IPO में दांव लगाने की सोच रहे हैं, तो आखिरी समय के बैंक सर्वर डाउन की समस्या से बचने के लिए समय रहते प्रक्रिया पूरी कर लें। सोमवार, 21 सितंबर को शाम 7 बजे से पहले हर हाल में अपना UPI मैंडेट अप्रूव कर दें या फिर ASBA का विकल्प चुनें। अपने बैंक खाते में जरूरी बैलेंस रखें और मैंडेट की डिटेल्स दोबारा जांच लें। बुधवार को अपने डीमैट अकाउंट और बैंक खाते में रिफंड या शेयर क्रेडिट का स्टेटस चेक करें। आखिरी मौके पर किसी बहकावे में न आएं, सिर्फ कंपनी के फंडामेंटल्स और ऑफिशियल आंकड़ों पर ही भरोसा करें।


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