NPS Vatsalya 2026: सरकार बच्चों के लिए लंबी अवधि की बचत को बढ़ावा देने पर लगातार जोर दे रही है। इसी दिशा में एनपीएस वात्सल्य योजना को और बेहतर बनाने के लिए इसके नियमों में कुछ अहम बदलाव किए गए हैं। पेंशन फंड रेगुलेटर पीएफआरडीए ने इस योजना के तहत पैसे निकालने और खाता बंद करने से जुड़े नियमों को आसान किया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा माता-पिता अपने बच्चों के नाम पर निवेश करने के लिए आगे आएं।

तीन साल बाद आंशिक निकासी की सुविधा
अब इस योजना में खाता खोलने के तीन साल पूरे होने के बाद आंशिक निकासी की इजाजत दी गई है। यह सुविधा खास जरूरतों को ध्यान में रखकर दी गई है। पढ़ाई से जुड़े खर्च, इलाज या तय की गई विकलांगता की स्थिति में अभिभावक अपने योगदान का एक हिस्सा निकाल सकते हैं। निकासी की सीमा कुल जमा रकम के एक चौथाई तक रखी गई है, जिससे खाते में बचत बनी रहे।
निकासी के मौके सीमित लेकिन उपयोगी
नए नियमों के अनुसार, 18 साल की उम्र से पहले दो बार और 18 से 21 साल की उम्र के बीच दो बार आंशिक निकासी की जा सकेगी। इसका मकसद यह है कि जरूरत पड़ने पर मदद मिले, लेकिन योजना का मूल उद्देश्य यानी लंबी अवधि की बचत प्रभावित न हो।
एकमुश्त निकासी के नियम आसान
अगर खाते में जमा कुल रकम आठ लाख रुपए या उससे कम है, तो पूरी राशि एक साथ निकाली जा सकती है। पहले ऐसी सुविधा सीमित थी और ज्यादातर रकम से पेंशन खरीदना जरूरी होता था। इस बदलाव से छोटे निवेशकों को बड़ी राहत मिली है।
क्या है एनपीएस वात्सल्य योजना
एनपीएस वात्सल्य योजना खास तौर पर 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बनाई गई है। खाता बच्चे के नाम पर होता है और उसका संचालन माता-पिता या अभिभावक करते हैं। इसका लक्ष्य बच्चों के बड़े होने तक उनके लिए एक मजबूत फंड तैयार करना है।
खाता खोलना और निवेश
इस योजना में न्यूनतम निवेश सिर्फ एक हजार रुपए है और अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है। खाता बैंक, पोस्ट ऑफिस या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए खोला जा सकता है। एनआरआई माता-पिता भी अपने बच्चों के लिए यह खाता खुलवा सकते हैं।
18 साल के बाद क्या होता है
बच्चे के 18 साल का होते ही खाता अपने आप एनपीएस टियर-1 खाते में बदल जाता है। इसके बाद बच्चा खुद खाता चला सकता है और निवेश जारी रख सकता है। नए बदलावों के बाद एनपीएस वात्सल्य योजना बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने का एक भरोसेमंद और आसान विकल्प बनकर उभरी है।


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