Retirement Planning Tips; NPS Vs EPS vs Mutual Funds : आज के समय में हर आदमी अपने बेहतर भविष्य और रिटायरमेंट को लेकर प्लानिंग करता है। इसके लिए तमाम तरह के स्कीम में अपनी आर्थिक क्षमता के अनुरुप निवेश भी करता है। बेहतर फाइनेंशियल सिक्योरिटी के लिए हर व्यक्ति को रिटायरमेंट प्लानिंग जरूर करनी चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि वर्किंग लाइफ में आते ही सही निवेश की रणनीति बनाएं, ताकि रिटायर होने तक बड़ा फंड तैयार हो सके।

यदि आप भी अपने रिटायरमेंट को लेकर प्लानिंग कर रहे हैं तो आपको निर्णय लेने में यह स्टोरी काफी मददगार साबित हो सकता है। आज हम आपको यहां NPS, EPF और म्यूचुअल फंड के बारे में बता रहे हैं जिसमें आपको निवेश करने पर रिटायरमेंट तक एक बेहतर रिटर्न मिल सकता है। हालांकि, ध्यान रहे कि यहां सिर्फ समझाने के उद्देश्य से यह जानकारी दी जा रही है। किसी भी तरह के निवेश से पहले खुद से पूरी जानकारी हासिल करें या फिर किसी वित्तीय सलाहकार से राय लेने के बाद ही निवेश करें... तो चलिए जानते हैं कि कहां निवेश करना बेहतर साबित हो सकता है...
NPS यानी National Pension System
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) केंद्र सरकार द्वारा संचालित एक स्वैच्छिक योजना है। इस योजना में कोई भी भारतीय नागिरक जो 18 से 70 साल का हो निवेश कर सकता है। इसके अलावा इस स्कीम में NRI यानी जो भारतीय विदेश में रहते हैं वह भी इसमें निवेश कर सकते हैं।
इसमें आप अपनी समझ के हिसाब से इक्विटी, कॉर्पोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटी का मिश्रण चुन सकता है। यह स्कीम 8% से 10% का वार्षिक रिटर्न देती रही है। इस स्कीम की खासियत यह है कि इसमें मिलने वाला रिटर्न टैक्स फ्री होता है और इसमें निवेश किया गया पैसा आप रिटायरमेंट यानी 60 साल की आयु के बाद ही निकाल पाएंगे।
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये और 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त 50,000 रुपये की छूट मिलती है।
EPF यानी Employee Provident Fund
EPF यानी कर्मचारी भविष्य निधि एक अनिवार्य बचत योजना है जो 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में लागू होती है। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों मिलकर कर्मचारी की मूल सैलरी और डीए का 12 फीसदी योगदान हर महीने करते हैं। इस पर सरकार हर साल ब्याज दर तय करती है जो वर्तमान में 8.25% है। इसमें मिलने वाला रिटर्न टैक्स फ्री होता है। यानी इसमें ज्यादा बचत की संभावना है।
EPF में पैसा केवल नौकरी छूटने, घर खरीदने या मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थिति में ही निकाला जा सकता है। EPF में निवेश करने पर धारा 80c के तहत 1.5 लाख रुपये तक टैक्स छूट मिलती है।
म्यूचुअल फंड (Mutual Fund)
म्यूचुअल फंड में अन्य निवेश स्कीमों के मुकाबले अधिक रिटर्न मिलने की संभावना ज्यादा होती है लेकिन नुकसान की भी आशंका ज्यादा होती है। निवेशक इसमें अपना पैसा अपनी समझ के हिसाब से इक्विटी फंड, डेट फंड, हाइब्रिड फंड या फ्लैक्सी फंड या अन्य तरह के फंड में निवेश कर सकते हैं। यदि आप लॉन्ग टर्म के लिए इक्विटी फंड चुनते हैं तो 10-15% सालाना तक का रिटर्न मिलने की संभावना है। इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम्स (ELSS) में 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर सेक्शन 80C के टैक्स में छूट मिल सकती है। म्यूचुअल फंड में आप SIP के जरिए भी निवेश कर सकते हैं।
कहां निवेश करना सबसे बेहतर विकल्प?
अब अगर आप म्यूचुअल फंड के SIP, NPS और EPF की तुलना करें तो SIP से 10% से 15% तक रिटर्न मिलने की संभावना होती है जबकि NPS में 8%-10% और EPF में 8.25% का फिक्स रिटर्न मिलता है। म्युचूअल फंड शेयर मार्केट की चाल पर निर्भर होता है, इसलिए इसमें नुकसान की भी संभावना ज्यादा होती है जबकि एनपीएस में रिस्क थोड़ा कम होता है और ईपीएफ में नुकसान की संभावना नहीं के बराबर होती है।
[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से 'We' कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]


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