एफडी करते समय इन 5 बातों का रखें ध्यान

नयी दिल्ली। निवेश के मामले में पूँजी के नुकसान से बचने वाले निवेशकों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) निश्चित रिटर्न पाने का शानदार रास्ता है। तय रिटर्न के साथ इसमें शेयर बाजार वगैरह की तरह पूँजी के नुकसान की संभावना नहीं होती है। इस लिहाज से यह निवेशकों के लिए मानसिक तौर पर सुकून वाला निवेश माध्यम भी है। भारत में आज भी अधिकतर लोग निवेश के लिए एफडी ही चुनते हैं। मगर एफडी करवाते समय 5 ऐसी बातें हैं, जिन्हें ध्यान रखना जरूरी है। अगर आप निवेश के लिए एफडी को चुनते हैं, तो जानकारी और कुछ सावधानी रखने से आप अपने निवेश पर ज्यादा से ज्यादा रिटर्न कमा सकते हैं। एफडी के समय आवेदन को बैंक से फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद मिलती है, जिसमें आवेदक का नाम, आयु, पता, जमा राशि, जमा पर ब्याज दर इत्यादि जैसी जानकारी होती है। यह फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद किसी व्यक्ति के एफडी खाते का सबूत भी होती है।

विभिन्न बैंकों में अलग-अलग होती है ब्याज दर

विभिन्न बैंकों में अलग-अलग होती है ब्याज दर

अलग-अलग बैंकों में एफडी पर मिलने वाली ब्याज दर भी अलग हो सकती है। दरअसल बैंक एफडी की अवधि, निवेश रकम और जमाकर्ता की आयु के आधार पर ब्याज दर तय करते हैं। मगर एफडी ब्याज दर निवेश की पूरी अवधि में एक समान रहती है। बैंकों में वार्षिक ब्याज दर आम तौर पर 4% से 8% तक होती है, लेकिन एफडी पर यह अधिक होती है। वहीं वरिष्ठ नागरिकों को बैंकों द्वारा दी जाने वाली ब्याज दर नियमित दर की तुलना में 0.5% अधिक रहती है।

देना होगा एफडी रिटर्न पर टैक्स

देना होगा एफडी रिटर्न पर टैक्स

अपना आयकर रिटर्न भरते वक्त आपको एफडी से होने वाली आय की जानकारी देनी होगी, क्योंकि एफडी से होने वाली आय पूरी तरह टैक्सेबल होती है। आपको अपनी कुल आय में एफडी ब्याज आय जोड़नी होगी, उसी हिसाब से कुल आय पर लागू टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा।
ब्याज दर के साथ-साथ एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू बैंक की विश्वसनीयता है। आम तौर पर एफडी सुरक्षित होती है, क्योंकि कोई भी राष्ट्रीय बैंक कभी एफडी राशि का भुगतान करने में चूका नहीं है। मगर डीआईसीजीसी के जमाकर्ता बीमा कार्यक्रम के तहत केवल 1 लाख रुपये की राशि का बीमा किया जाता है। ऐसे में आपको बैंक जानकारी लेने के लिए उसकी रेटिंग के बारे में पता करना चाहिए।

समय से पहले एफडी तोड़ने पर लगेगा जुर्माना

समय से पहले एफडी तोड़ने पर लगेगा जुर्माना

इसके अलावा यदि आप अपनी एफडी उसकी तय अवधि से पहले तोड़ते हैं यानी किसी वजह से अपने पैसे वापस निकालते हैं तो उस स्थिति में आपको जुर्माना भरना पड़ेगा। आम तौर पर बैंक जुर्माने के रूप में लागू ब्याज दर को 0.5% से 1% तक कम कर देत हैं। जुर्माना शुल्क अलग-अलग बैंकों में भिन्न हो सकते हैं। इसलिए एफडी के समय आप उन बैंकों की तलाश करें जमा तय समय से पहले निवेश पूँजी निकालने पर कम जुर्माना लगे।
एक खास सुविधा जो एफडी में निवेश करने पर मिलती है, वो है लोन सुविधा। आप किसी भी आर्थिक इमरजेंसी के समय एफडी पर लोन प्राप्त कर सकते हैं। बैंक एफडी पर लिये गये लोन पर लागू एफडी ब्याज दर से 0.5% से 2% तक ब्याज लेते हैं।

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