नो-कॉस्ट EMI के नाम पर हो रहा बड़ा खेल? खरीदारी से पहले ये सच जान लें!

भारतीय ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों को इस हफ्ते एक बार फिर पुराना 'झटका' लगा है। अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स साइट्स पर वीकेंड सेल खत्म होने के बाद, अब खरीदार सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं। वजह है— 'नो-कॉस्ट EMI' के नाम पर वसूले गए एक्स्ट्रा चार्ज। इन शिकायतों ने एक पुराने लेकिन जरूरी सवाल को फिर से हवा दे दी है: क्या नो-कॉस्ट EMI वाकई मुफ्त है, या यह भारत के सबसे बड़े वित्तीय भ्रमों में से एक है?

क्रेडिट कार्ड पर नो-कॉस्ट EMI का असली मतलब क्या है?

भारत में स्मार्टफोन, लैपटॉप और होम अप्लायंसेज जैसी महंगी चीजें खरीदने के लिए नो-कॉस्ट EMI सबसे पसंदीदा तरीका बन चुका है। इसे 'जीरो-इंटरेस्ट' विकल्प के तौर पर प्रमोट किया जाता है, जहां ग्राहक बिना किसी अतिरिक्त लागत के किस्तों में भुगतान कर सकता है। कागज पर यह बहुत लुभावना लगता है—अगर आप 30,000 रुपये का फोन खरीदते हैं, तो आपको छह किस्तों में ठीक 30,000 रुपये ही देने होंगे। चेकआउट पेज को देखकर तो यही लगता है कि कुछ भी एक्स्ट्रा नहीं देना है।

No-Cost EMI Hidden Charges: Is It Really Free? Truth Behind Online Shopping EMI Scams in 2026

नो-कॉस्ट EMI के वादे के पीछे का छिपा हुआ खर्च

हकीकत यह है कि बैंक कभी भी बिना ब्याज के क्रेडिट नहीं दे सकते। नो-कॉस्ट EMI में ब्याज का बोझ मर्चेंट (विक्रेता) उठाता है। आमतौर पर, बैंक आपके ट्रांजेक्शन पर ब्याज तो लेता है, लेकिन दुकानदार आपको उस ब्याज के बराबर की रकम का 'अपफ्रंट डिस्काउंट' दे देता है। यानी बैंक अपना ब्याज वसूल रहा है और सेलर आपको उतना डिस्काउंट दे रहा है ताकि हिसाब बराबर हो जाए। लेकिन याद रखें, नो-कॉस्ट EMI 'फ्री' नहीं है। ब्याज की रकम अक्सर प्रोडक्ट की कीमत में ही छिपी होती है और आपको उस 'छिपे हुए' ब्याज पर GST भी देना पड़ता है।

GST और प्रोसेसिंग फीस: जो खरीदारों की नजर से बच जाते हैं

मौजूदा नियमों के मुताबिक, EMI के ब्याज वाले हिस्से पर 18 प्रतिशत GST लगता है। बैंक यह GST ग्राहक से ही वसूलता है, इसे माफ नहीं किया जाता। इसके अलावा, SBI, HDFC, ICICI, Axis, Kotak और IDFC First जैसे बैंक अक्सर कुछ सौ रुपये की प्रोसेसिंग फीस भी लेते हैं। खरीदारी के समय शायद यह साफ तौर पर न दिखे, लेकिन इससे प्रोडक्ट की कीमत बढ़ जाती है। एक एक्सपर्ट के विश्लेषण के मुताबिक, GST की वजह से 1,467 रुपये और प्रोसेसिंग फीस व उस पर GST मिलाकर 235 रुपये एक्स्ट्रा जुड़ गए। यानी खरीदार को प्रोडक्ट की कीमत से करीब 1,700 रुपये ज्यादा चुकाने पड़े।

वो डिस्काउंट जो आप चुपचाप खो देते हैं

ब्याज का हिस्सा भले ही सेलर उठा ले, लेकिन इसकी भरपाई अक्सर उन डिस्काउंट्स या कैशबैक को हटाकर की जाती है जो फुल पेमेंट पर मिलते। उदाहरण के लिए, 50,000 रुपये के फोन पर फुल पेमेंट करने पर 4,000 रुपये की छूट मिल सकती है, लेकिन नो-कॉस्ट EMI चुनने पर यह छूट घटकर सिर्फ 2,500 रुपये रह जाती है। यानी सुविधा के नाम पर आप सीधे तौर पर 1,500 रुपये ज्यादा दे रहे हैं। चेकआउट के समय असली कीमत सामने न होने की वजह से ज्यादातर खरीदार इस पर गौर ही नहीं कर पाते।

अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बैंक कितना चार्ज लेते हैं?

बैंकEMI पर प्रोसेसिंग फीसब्याज पर GST
HDFC बैंक199 रुपये + GSTब्याज वाले हिस्से पर 18%
ICICI बैंक199 से 299 रुपये + GSTब्याज वाले हिस्से पर 18%
SBI कार्डअमेज़न पर कभी-कभी माफब्याज वाले हिस्से पर 18%
Kotak बैंक199 रुपये + GSTब्याज वाले हिस्से पर 18%
Axis बैंकBig Billion Days के दौरान फीस माफीब्याज वाले हिस्से पर 18%

कुछ बैंक 199 से 499 रुपये तक की वन-टाइम प्रोसेसिंग फीस लेते हैं। HDFC और ICICI आमतौर पर 199 से 299 रुपये प्लस GST चार्ज करते हैं। SBI कार्ड्स अमेज़न पर कभी-कभी इसे माफ कर देता है, लेकिन हमेशा नहीं। हालांकि, 'बिग बिलियन डेज' या 'ग्रेट इंडियन फेस्टिवल' जैसी बड़ी सेल के दौरान ज्यादातर बैंक प्रोसेसिंग फीस माफ कर देते हैं।

RBI एक दशक पहले ही दे चुका है चेतावनी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2013 में ही एक सर्कुलर जारी कर ऐसी स्कीमों की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। RBI का कहना था कि 'जीरो परसेंट इंटरेस्ट' जैसा कुछ नहीं होता। बैंक अक्सर ब्याज को प्रोसेसिंग फीस या प्रोडक्ट की कीमत में छिपाकर ग्राहकों से ही वसूलते हैं। इस सर्कुलर के बावजूद, ऑनलाइन सेल में नो-कॉस्ट EMI सबसे बड़ा आकर्षण बनी हुई है। भले ही RBI ने बैंकों को ऐसी स्कीमों पर रोक लगाई हो, लेकिन मर्चेंट डिस्काउंट के जरिए यह खेल आज भी धड़ल्ले से चल रहा है।

क्रेडिट लिमिट ब्लॉक होना: एक और बड़ी समस्या

जैसे ही आप EMI का विकल्प चुनते हैं, आपके क्रेडिट कार्ड की पूरी लिमिट ब्लॉक हो जाती है। मान लीजिए आपके कार्ड की लिमिट 50,000 रुपये है और आपने 30,000 रुपये का फोन EMI पर लिया, तो आपकी उपलब्ध लिमिट तुरंत घटकर 20,000 रुपये रह जाएगी। जैसे-जैसे आप किस्त चुकाएंगे, लिमिट वापस बढ़ेगी। इसके अलावा, ज्यादातर बैंक EMI ट्रांजेक्शन पर रिवॉर्ड पॉइंट्स या कैशबैक नहीं देते। यानी आप दोतरफा नुकसान में रहते हैं: रिवॉर्ड पॉइंट्स भी गए और क्रेडिट लिमिट भी ब्लॉक हो गई।

चेकआउट से पहले इन बातों का रखें ध्यान

पेमेंट करने से पहले EMI प्लान की डिटेल्स को ध्यान से पढ़ें। हर प्लेटफॉर्म वहां पूरा ब्रेकडाउन दिखाता है। प्रोसेसिंग फीस और 'टोटल पेएबल अमाउंट' (कुल देय राशि) जरूर चेक करें। अगर कुल राशि प्रोडक्ट की कीमत से ज्यादा है, तो वही आपकी असली लागत है। यह भी देखें कि क्या फुल पेमेंट पर कोई बैंक डिस्काउंट या कैशबैक मिल रहा है। अक्सर डेबिट कार्ड या UPI से पेमेंट करने पर 1,000 से 2,000 रुपये तक की अलग से छूट मिलती है, जो नो-कॉस्ट EMI की सुविधा से कहीं ज्यादा फायदेमंद होती है, खासकर 20,000 रुपये से कम की खरीदारी पर।

वीकेंड सेल के बाद ग्राहकों का गुस्सा इस बात की याद दिलाता है कि हर सुविधा की एक छिपी हुई कीमत होती है। अगर आप समय से पहले EMI बंद करना चाहते हैं, तो बैंक 2 से 4 प्रतिशत तक प्री-क्लोजर फीस और GST वसूलते हैं। वहीं, एक भी किस्त चूकने पर आपका CIBIL स्कोर 20 से 50 पॉइंट तक गिर सकता है। नो-कॉस्ट EMI को सिर्फ एक बटन दबाना न समझें, बल्कि इसे एक शॉर्ट-टर्म लोन की तरह देखें जिसकी बारीकियों को समझना बेहद जरूरी है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+