No Cost EMI: त्योहारी सीजन आते ही हर तरफ शॉपिंग का उत्साह बढ़ जाता है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे Amazon, Flipkart, Myntra और JioMart हो या ऑफलाइन शॉपिंग मॉल हर जगह ग्राहकों को लुभाने के लिए जबरदस्त ऑफर मिल रहे हैं।

इनमें से सबसे ज्यादा जो ऑफर चर्चा में रहता है, वह है नो-कॉस्ट EMI। लोग महंगे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट जैसे मोबाइल, स्मार्ट टीवी, वॉशिंग मशीन, फ्रिज और लैपटॉप खरीदने के लिए इस स्कीम का खूब इस्तेमाल करते हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह ऑफर उतना फायदेमंद है, जितना दिखता है?
नो-कॉस्ट EMI क्या है?
सीधे शब्दों में कहें तो नो-कॉस्ट EMI का मतलब होता है कि ग्राहक को बिना किसी ब्याज के किस्तों में सामान मिलेगा। सुनने में यह ऑफर बेहद आकर्षक लगता है, लेकिन हकीकत थोड़ी अलग है। कंपनियां ब्याज को सीधे दिखाने की बजाय प्रोडक्ट की कीमत में ही एडजस्ट कर देती हैं। यानी ग्राहक को लगता है कि उसने बिना ब्याज के EMI का फायदा उठा लिया, जबकि असल में छूट या डिस्काउंट कहीं न कहीं गायब हो जाता है।
कंपनियां कैसे वसूलती हैं ब्याज?
मान लीजिए कोई प्रोडक्ट 20000 रुपए का है। अगर उस पर 12 महीने के लिए 2400 रुपए का ब्याज बनता है, तो कंपनी इस ब्याज को प्रोडक्ट की फाइनल कीमत में जोड़ देती है। यानी प्रोडक्ट आपको 20000 रुपए में नहीं बल्कि 22400 रुपए में मिलेगा। EMI की किस्तें देखकर ग्राहक को लगता है कि सब कुछ नो-कॉस्ट है, लेकिन वास्तव में वह ब्याज चुका रहा होता है।
छिपे हुए डिस्काउंट का खेल
कई बार ग्राहकों को भ्रम होता है कि कंपनी ने ब्याज माफ कर दिया है। असलियत में ऐसा नहीं होता। दरअसल, जिस प्रोडक्ट पर सीधा डिस्काउंट मिल सकता था, उसे हटा दिया जाता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई मोबाइल असल में 50000 रुपए का है और उस पर 5000 रुपए का डिस्काउंट मिलना था, तो नो-कॉस्ट EMI लेने पर यह डिस्काउंट गायब हो सकता है। ग्राहक सोचता है कि उसने ब्याज बचा लिया, जबकि असल में वह फायदा खो देता है।
कब फायदेमंद है नो-कॉस्ट EMI?
अगर आपके पास एक बार में पूरी रकम चुकाने का विकल्प नहीं है और आप महंगा सामान खरीदना चाहते हैं, तो यह ऑफर आपके लिए मददगार हो सकता है। खासकर तब, जब ई-कॉमर्स कंपनियां कैशबैक, स्पेशल ऑफर या एक्स्ट्रा डिस्काउंट भी साथ में दें। इससे किस्तों में भुगतान आसान हो जाता है और जेब पर अचानक ज्यादा बोझ नहीं पड़ता।
रेगुलर EMI और नो-कॉस्ट EMI में अंतर
रेगुलर EMI: इसमें ब्याज की रकम हर किस्त में साफ तौर पर जुड़ी होती है।
नो-कॉस्ट EMI: इसमें ब्याज को अलग दिखाने के बजाय कीमत में एडजस्ट किया जाता है या फिर डिस्काउंट हटाकर बैलेंस कर दिया जाता है।
खरीदारी से पहले रखें ध्यान
नो-कॉस्ट EMI चुनने से पहले हमेशा प्रोडक्ट का MRP और सेलिंग प्राइस चेक करें। कई बार सीधा डिस्काउंट लेकर एकमुश्त भुगतान करना, EMI से कहीं सस्ता पड़ जाता है। इसके अलावा अलग-अलग प्लेटफॉर्म और बैंकों के ऑफर्स की तुलना करना भी जरूरी है।
More From GoodReturns

Gold Rate Today: 6 मार्च को सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी! जानिए 24K, 22K और 18K गोल्ड रेट

Silver Price Today: शनिवार को बाजार में हड़कंप! फिर चांदी के दाम धड़ाम, जानें 1 किलो चांदी का रेट क्या है?

PNB का बड़ा फैसला! 13 डेबिट कार्ड से ATM कैश निकासी सीमा आधी, जानें किन कार्डधारकों पर पड़ेगा असर

Ladli Behna Yojana 34th Installment: 1500 या 3000 रुपये? जानें कब आएगी 34वीं किस्त और ऐसे करें स्टेटस चेक

Gold Rate Today: सराफा बाजार में सोने के दामों में लगातार कमी, जानें आज कितना सस्ता हुआ 22K और 24K गोल्ड

Silver Price Today: 6 मार्च को भी चांदी में उतार-चढ़ाव! 30,100 रुपये टूटा भाव, जानिए प्रति किलो चांदी का रेट

CM Kisan Samman Yojana: राजस्थान किसानों के लिए अपडेट! कब आएगी 6वीं किस्त, ऐसे चेक करें पेमेंट स्टेटस

Gold Rate Today: होली पर सस्ता हुआ सोना-चांदी का भाव, जानिए 24K, 22K और 18K गोल्ड रेट

Gold Price Today: मिडिल ईस्ट जंग के बीच सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट! जानिए 24k, 22k, 18k गोल्ड रेट

PM Kisan Yojana: किसानों के लिए सुनहरा मौका! PM Kisan योजना से पाएं 3000 रुपए महीना, ऐसे भरें फॉर्म

Silver Price Today: 9 मार्च को चांदी की कीमत में आई गिरावट...35,000 टूटे भाव, जानिए 1 किलो चांदी का भाव



Click it and Unblock the Notifications