शेयर बाजार में तेजी का दौर जारी है और निफ्टी 50 ने आज एक नया रिकॉर्ड बना लिया है। बाजार के इस ऑल-टाइम हाई पर पहुंचने से उन रिटेल निवेशकों के सामने बड़ी उलझन खड़ी हो गई है, जिनके पास निवेश के लिए नया फंड तैयार है। लोग सोच रहे हैं कि क्या अभी एक साथ (Lump sum) पैसा लगा देना सही होगा या फिर बाजार गिरने का इंतजार करना चाहिए। पुराने आंकड़े बताते हैं कि जब मार्केट अपने शिखर पर हो, तो बहुत संभलकर कदम उठाना चाहिए। ऐसे में आपको तय करना होगा कि आपकी जरूरतों के लिए SIP बेहतर है या एकमुश्त निवेश।
मार्केट जब अपने उच्चतम स्तर पर हो, तो एक साथ बड़ी रकम निवेश करने में शॉर्ट-टर्म रिस्क काफी ज्यादा होता है। अक्सर नई ऊंचाइयों को छूने के बाद बाजार में थोड़ा करेक्शन यानी गिरावट देखने को मिलती है। अगर आप आज सारा पैसा लगा देते हैं, तो मुमकिन है कि जल्द ही आपको पोर्टफोलियो में घाटा दिखने लगे। इसीलिए एक्सपर्ट्स अक्सर सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) की सलाह देते हैं। इस तरीके में पैसा पहले लिक्विड फंड या बैंक अकाउंट में रखा जाता है और फिर धीरे-धीरे इक्विटी फंड में ट्रांसफर किया जाता है। इससे उतार-चढ़ाव के दौरान आपकी निवेश लागत (Average cost) कम हो जाती है।

मार्केट हाई के दौरान SIP बनाम एकमुश्त निवेश: रिटर्न का गणित
| निवेश का प्रकार | जोखिम का स्तर | सही समय सीमा | टैक्स के नियम |
|---|---|---|---|
| इक्विटी SIP | मध्यम | 3 से 5 साल | 12.5% LTCG |
| एकमुश्त निवेश | ज्यादा | 5 साल से अधिक | 12.5% LTCG |
| शॉर्ट-टर्म FD | कम | 6 से 12 महीने | टैक्स स्लैब के अनुसार |
पिछले आंकड़ों की जांच (Backtest) से पता चलता है कि किस्तों में निवेश करने से बाजार की अचानक गिरावट का असर कम हो जाता है। जब इंडेक्स अपने पीक पर हो, तो 12 महीने की अवधि के लिए SIP आमतौर पर बेहतर रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न देते हैं। अगर आप बहुत कम समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) अभी भी सबसे सुरक्षित विकल्प है। वहीं, 3 साल के लक्ष्य के लिए हाइब्रिड फंड एक बैलेंस रास्ता दिखाते हैं। निवेशकों को अपनी पसंद और रिस्क लेने की क्षमता के आधार पर ही फैसला लेना चाहिए।
निवेश और टैक्स: मुनाफे पर कितना देना होगा हिस्सा?
आपके निवेश से मिलने वाले असल मुनाफे पर टैक्स का बड़ा असर पड़ता है। अगर आप इक्विटी में एक साल से ज्यादा समय तक निवेश रखते हैं, तो उस पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स लगता है। फिलहाल, एक तय सीमा से ज्यादा मुनाफे पर यह दर 12.5 फीसदी है। वहीं, शॉर्ट-टर्म गेन्स पर 20 फीसदी की ऊंची दर से टैक्स देना होता है। दूसरी ओर, FD से मिलने वाले ब्याज को आपकी कुल आय में जोड़ा जाता है और फिर आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से उस पर टैक्स लगता है।
मार्केट जब रिकॉर्ड ऊंचाई पर हो, तो पोर्टफोलियो को बैलेंस करने के लिए भावनाओं के बजाय अनुशासन की जरूरत होती है। युवा निवेशक मंथली SIP के जरिए इक्विटी में निवेश का फायदा उठा सकते हैं। वहीं, सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले लोगों को स्थिरता के लिए डेट इंस्ट्रूमेंट्स या हाइब्रिड फंड्स को चुनना चाहिए। इसके अलावा, इमरजेंसी के लिए हमेशा अपनी संपत्ति का एक हिस्सा लिक्विड एसेट्स में जरूर रखें। यह रणनीति आपको बाजार की ग्रोथ का फायदा भी दिलाएगी और आने वाले महीनों में होने वाले उतार-चढ़ाव से भी बचाकर रखेगी।


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