सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को कई इंडेक्स न्यू फंड ऑफर (NFO) बंद हो रहे हैं। इनमें क्वांट म्यूचुअल फंड के निफ्टी 50, निफ्टी 100 और निफ्टी मिडकैप 150 इंडेक्स फंड शामिल हैं। मोतीलाल ओसवाल का मिडकैप 150 प्लस 8-13 ईयर जी-सेक 70:30 इंडेक्स फंड भी उसी दिन क्लोज हो रहा है। इसके अलावा जीरोधा का BSE टॉप 10 बैंक्स ETF भी बंद हो जाएगा। ध्यान रखें कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर का कट-ऑफ टाइम अलग हो सकता है, इसलिए पैसा लगाने से पहले अपने ऐप की डेडलाइन जरूर चेक कर लें।
NFO की होड़ में जल्दबाजी करने के बजाय पूरी बात समझकर फैसला लें। बाजार में पहले से मौजूद इंडेक्स फंड हर दिन अपनी वास्तविक लागत बताते हैं और बेंचमार्क के मुकाबले उनका ट्रैकिंग रिकॉर्ड भी सामने होता है। वहीं नए NFO सिर्फ वादे करते हैं, क्योंकि पोर्टफोलियो तैयार होने तक उनका कोई पिछला ट्रैक रिकॉर्ड नहीं होता। पैसा लगाने से पहले फीस, ट्रैकिंग डिफरेंस और लिक्विडिटी का सही अंदाजा लगाने के लिए नीचे दी गई टेबल देखें।

NFOs closing Oct 26: fees, tracking error, liquidity
ट्रैकिंग एरर और ट्रैकिंग डिफरेंस से पता चलता है कि कोई फंड अपने इंडेक्स को कितने सटीक तरीके से फॉलो कर रहा है। नई स्कीमों के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं होता, इसलिए शुरुआत में उनके रिटर्न में ज्यादा उतार-चढ़ाव आ सकता है। ETF के मामले में लिक्विडिटी काफी हद तक मार्केट मेकर्स और स्प्रेड पर निर्भर करती है, जो लिस्टिंग के बाद ही तय होती है। वहीं इंडेक्स म्यूचुअल फंड में स्प्रेड की दिक्कत तो नहीं होती, लेकिन इनमें कारोबार सिर्फ एनएवी (NAV) पर ही होता है।
| Factor | New index NFO | Established index fund |
|---|---|---|
| Total expense ratio | स्कीम दोबारा खुलने के बाद ही फाइनल TER दिखता है; SID में सिर्फ अनुमानित आंकड़े होते हैं। | AMC और AMFI की वेबसाइट पर रोजाना वास्तविक TER उपलब्ध रहता है। |
| Live tracking error/difference | शुरुआत में इस्तेमाल लायक कोई पिछला रिकॉर्ड नहीं होता। | 1 से 5 साल का TE/TD डेटा उपलब्ध रहता है; कम और स्थिर उतार-चढ़ाव वाला फंड चुनें। |
| Liquidity | लिस्टिंग से पहले ETF का स्प्रेड अनिश्चित रहता है; फंड के AUM की जानकारी नहीं होती। | बड़ा AUM, ETF में कम स्प्रेड; इंडेक्स फंड में NAV पर सीधा लेनदेन। |
Direct vs Regular plans: long‑term impact
डायरेक्ट प्लान में डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन नहीं देना पड़ता, इसलिए इनकी लागत (एक्सपेंस रेशियो) रेगुलर प्लान से कम होती है। लंबे समय में लागत का यह अंतर कंपाउंड होकर खुद निवेश करने वालों को एक बड़ा फायदा देता है। अगर आपको सलाह की जरूरत है, तो रेगुलर प्लान चुन सकते हैं—ध्यान रखें कि इसमें आपको कोई अलग पोर्टफोलियो नहीं मिलता, बल्कि सिर्फ सर्विस मिलती है, क्योंकि दोनों प्लान का पोर्टफोलियो एक जैसा ही होता है।
SIP/SWP availability after NFO
नियमों के मुताबिक, NFO बंद होने के 5 कामकाजी दिनों के भीतर यूनिट्स अलॉट कर दी जाती हैं। प्लेटफॉर्म्स पर ये होल्डिंग्स 7 से 10 कामकाजी दिनों के भीतर दिखने लगती हैं। NFO के दौरान दी गई SIP की शुरुआत अलॉटमेंट के कम से कम 21 दिन बाद होती है। वहीं NFO में फंड स्विच (Switch) करने पर अलॉटमेंट सिर्फ घोषित तारीख पर ही किया जाता है।
Tax treatment vs FD and equity MFs
निवेश का फैसला आपकी जरूरत और टैक्स के नियमों पर भी निर्भर करता है। इस समय बड़े बैंक 1 साल की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर करीब 6.5 से 7.0 फीसदी ब्याज दे रहे हैं, जबकि सीनियर सिटीजन्स के लिए दरें थोड़ी ज्यादा हैं। दूसरी तरफ, इक्विटी इंडेक्स फंड पर 20 फीसदी शॉर्ट-टर्म टैक्स (STCG) और 12.5 फीसदी लॉन्ग-टर्म टैक्स (LTCG) लगता है। हालांकि, लॉन्ग-टर्म में सालाना ₹1.25 लाख तक का मुनाफा टैक्स-फ्री होता है।
| Product | Typical current return | Tax on gains/interest | Liquidity |
|---|---|---|---|
| Bank FD (1‑year) | फिलहाल करीब 6.5–7.0% | ब्याज पर टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स | समय से पहले पैसे निकालने पर पेनल्टी लगती है |
| Equity index mutual fund | मार्केट-लिंक्ड (गारंटीड नहीं) | STCG 20%; ₹1.25 लाख से ऊपर LTCG 12.5% | NAV पर खरीद/बिक्री; ETF में मार्केट ऑवर्स के दौरान ट्रेडिंग |
समय और जोखिम के हिसाब से कैसे चुनें: 3 से 5 साल के लक्ष्य के लिए कम और स्थिर ट्रैकिंग अंतर वाले स्थापित ब्रॉड इंडेक्स फंड बेहतर हैं। 7 से 10 साल के लंबे समय के लिए निफ्टी 50, निफ्टी 100 या निफ्टी 500 को ट्रैक करने वाले डाइवर्सिफाइड फंड चुनें। वहीं एक संतुलित पोर्टफोलियो बनाने के लिए ब्रॉड इक्विटी इंडेक्स फंड के साथ एफडी (FD) या शॉर्ट-ड्यूरेशन डेट फंड का कॉम्बिनेशन रख सकते हैं।


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