Gratuity In 1 Year: प्राइवेट संस्थानों में काम करने वाले लोगों की बेहतरी के लिए सरकार ने बीते एक दशक में कई कदम उठाए हैं। अब इस दिशा में केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए ग्रेच्युटी को लेकर नया नियम बनाया है। दरअसल, केंद्र सरकार ने भारत के श्रम कानूनों में एक बड़ा बदलाव किया है, जिसके तहत अब फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को केवल एक साल की नौकरी के बाद ही ग्रेच्युटी मिल पाएगी। पहले इसके लिए पांच साल की सेवा अनिवार्य थी। सरकार ने शुक्रवार को यह घोषणा की और 29 मौजूदा श्रम कानूनों को चार सरल संहिताओं में बनाया गया है।

इसका सीधा मतलब है कि अब ग्रेच्युटी के लिए पांच साल की नौकरी करना अनिवार्य नहीं है, बल्कि एक साल काम करने वाले कर्मचारी भी ग्रेच्युटी के हकदार होंगे। हालांकि यहां ध्यान रखना जरूरी है कि यह नियम सभी कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा। प्राइवेट संस्थानों में काम करने वाले लाखों लोग किसी एक संस्थान में पांच साल तक की सर्विस नहीं दे पाते हैं जिसके चलते उनका ग्रेच्युटी फंस जाता है। इस समस्या को देखते हुए मोदी सरकार ने इस संबंध में नियम बनाए जाने को लेकर पहले ही घोषणा की थी।
केंद्रीय श्रम मंत्रालय के अनुसार, इस पुनर्गठन का मुख्य उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए बेहतर वेतन, व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज और स्वास्थ्य संबंधी बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
गिग वर्कर्स को मिलेगा फायदा
फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी वे होते हैं जिन्हें एक निश्चित अवधि के लिए या किसी विशिष्ट कार्य या परियोजना के पूरा होने तक अनुबंध के तहत काम पर रखा जाता है। ये सुधार अब अनौपचारिक श्रमिकों, गिग और प्लेटफॉर्म कर्मचारियों, प्रवासी मजदूरों और महिला कर्मचारियों पर भी लागू होंगे।
इस पैकेज में सबसे महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक ग्रेच्युटी पात्रता से संबंधित है, जो लाखों कर्मचारियों पर गहरा असर डालेगी।
5 साल की सीमा अब खत्म!
पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट के तहत, पहले फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी किसी संस्थान में पांच साल की लगातार सेवा पूरी करने के बाद ही ग्रेच्युटी के पात्र होते थे। नए श्रम संहिताओं के लागू होने के साथ, फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों (FTEs) के लिए यह अवधि की आवश्यकता अब हटा दी गई है।
ऐसे कर्मचारी अब सिर्फ एक साल की सेवा पूरी करने के बाद ग्रेच्युटी के पात्र होंगे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस बदलाव का उद्देश्य फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों के बराबर लाना है।
नए नियमों के तहत, FTEs को नियमित कर्मचारियों के समान वेतन संरचना, अवकाश सुविधाएं, चिकित्सा लाभ और सामाजिक सुरक्षा उपाय मिलेंगे। सरकार को उम्मीद है कि इन परिवर्तनों से कॉन्ट्रैक्ट स्टाफिंग पर अत्यधिक निर्भरता कम होगी और कंपनियों द्वारा अधिक पारदर्शी, सीधी भर्ती को बढ़ावा मिलेगा।
ग्रेच्युटी क्या है? (What Is Gratuity)
ग्रेच्युटी एक वित्तीय लाभ है जो नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को लंबी अवधि की सेवा के लिए आभार के रूप में दिया जाता है। पारंपरिक रूप से, यह एकमुश्त राशि तब दी जाती थी जब कोई कर्मचारी पांच साल की अनिवार्य सेवा अवधि पूरी करने के बाद इस्तीफा देता था, सेवानिवृत्त होता था या संगठन से अलग होता था।
संशोधित ढांचे के साथ, फिक्स्ड-टर्म अनुबंधों के तहत काम करने वाले कर्मचारियों को इस लंबी अवधि का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके बजाय, उन्हें एक साल की सेवा के बाद ग्रेच्युटी मिलेगी, जिससे यह लाभ अधिक सुलभ हो जाएगा और नौकरी परिवर्तन के दौरान एक मजबूत वित्तीय सहायता प्रदान करेगा।
पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट में फैक्ट्रियां, खदानें, तेल क्षेत्र, बंदरगाह और रेलवे सहित कई प्रतिष्ठान शामिल हैं। पहले यह अटकलें थीं कि सरकार पात्रता अवधि को तीन साल तक कम कर सकती है, लेकिन नवीनतम निर्णय एक अधिक महत्वपूर्ण छूट को दर्शाता है, जिससे विशिष्ट श्रेणी के श्रमिकों के लिए अर्हता अवधि प्रभावी रूप से एक वर्ष तक कम हो गई है।
ग्रेच्युटी की गणना कैसे करें?
ग्रेच्युटी राशि की गणना एक मानक सूत्र का उपयोग करके की जाती है:
अंतिम मिला वेतन × (15/26) × सेवा के वर्ष
यहां, अंतिम मिले वेतन में मूल वेतन और महंगाई भत्ता शामिल है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी ने पांच साल तक एक कंपनी में काम किया और उसका अंतिम मूल वेतन-प्लस-डीए ₹50,000 था, तो ग्रेच्युटी होगी:
50,000 × (15/26) × 5 = ₹1,44,230
संशोधित नीति से कर्मचारियों को अधिक सुरक्षा मिलने और नियोक्ताओं के लिए कार्यबल की स्थिरता में सुधार होने की उम्मीद है।
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