New Income Tax Act: Budget 2026 में भले ही इनकम टैक्स स्लैब की संख्याओं में कोई फेरबदल न हुआ हो, लेकिन टैक्सपेयर्स के लिए फाइलिंग का पूरा तरीका बदलने वाला है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 अप्रैल 2026 से 'नया इनकम टैक्स एक्ट' लागू करने का ऐतिहासिक ऐलान किया है, जो दशकों पुराने नियमों की जगह लेगा। सरकार का उद्देश्य टैक्स प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और पूरी तरह डिजिटल बनाना है।

नए एक्ट के तहत न केवल ITR फॉर्म्स का चेहरा बदलेगा, बल्कि संशोधित रिटर्न (Revised ITR) दाखिल करने की समय-सीमा में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा, विदेशी संपत्ति के खुलासे से लेकर शेयर बायबैक तक के नियमों को कड़ा और सुव्यवस्थित किया गया है। अगर आप एक वेतनभोगी कर्मचारी, प्रोफेशनल या निवेशक हैं, तो 1 अप्रैल से लागू होने वाले इन 7 बड़े बदलावों को समझना आपके लिए अनिवार्य है ताकि आप भविष्य की कानूनी पेचीदगियों से बच सकें।
1. यूजर-फ्रेंडली नए ITR फॉर्म्स का आगाज
नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होते ही करदाताओं को पुराने जटिल फॉर्म्स से मुक्ति मिलेगी। सरकार ने वादा किया है कि आगामी वित्त वर्ष के लिए सरल और सहज ITR फॉर्म जारी किए जाएंगे। इन फॉर्म्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि एक आम करदाता बिना किसी विशेषज्ञ की मदद के खुद अपनी रिटर्न फाइल कर सके।
2. Revised ITR के लिए अब 31 मार्च तक का समय
गलती सुधारने के लिए अब टैक्सपेयर्स को भागदौड़ नहीं करनी होगी। बजट 2026 में Revised ITR फाइल करने की अंतिम तिथि को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया है। हालांकि, इस विस्तारित अवधि का लाभ उठाने के लिए करदाताओं को एक मामूली शुल्क (Nominal Fee) देना होगा।
3. फाइलिंग डेडलाइन, किसे मिली राहत?
आईटीआर फाइल करने की अंतिम तारीखों में भी आंशिक बदलाव किए गए हैं:
- ITR-1 और ITR-2 (व्यक्तिगत): अंतिम तारीख 31 जुलाई ही रहेगी।
- नॉन-ऑडिट बिजनेस और ट्रस्ट: इनके लिए समय-सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है।
4. शेयर बायबैक (Share Buyback) पर कड़े नियम
निवेशकों के लिए शेयर बायबैक अब 'कैपिटल गेन' के दायरे में आएगा। टैक्स चोरी रोकने के लिए प्रमोटर्स पर अतिरिक्त बोझ डाला गया है:
- बिजनेस प्रमोटर्स: प्रभावी टैक्स दर 22% होगी।
- नॉन-कॉरपोरेट प्रमोटर्स: प्रभावी टैक्स दर 30% तक जा सकती है।
5. घाटे के मामलों में Updated Return की सुविधा
अब करदाता अपना Updated Return तब भी फाइल कर पाएंगे, जब उन्हें अपने पहले दाखिल किए गए नुकसान (Loss) की राशि को कम दिखाना हो। यह क्रांतिकारी बदलाव 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और यह पुराने व नए दोनों टैक्स एक्ट्स पर लागू रहेगा।
6. NIL TDS सर्टिफिकेट अब होगा ऑटोमेटेड
छोटे करदाताओं को अब इनकम टैक्स ऑफिस के चक्कर नहीं लगाने होंगे। NIL डिडक्शन सर्टिफिकेट के लिए एक नया 'नियम-आधारित ऑटोमेटेड सिस्टम' शुरू किया जा रहा है। इससे सर्टिफिकेट जारी करने में होने वाली मानवीय देरी खत्म होगी और प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी।
7. विदेशी संपत्ति खुलासा योजना (6 महीने का मौका)
स्टूडेंट्स, रिलोकेटेड NRIs और टेक प्रोफेशनल्स के लिए सरकार ने एक विशेष 6 महीने की डिस्क्लोजर स्कीम लॉन्च की है। इसके तहत वे अपनी सीमित मूल्य की विदेशी आय या संपत्ति का खुलासा कर सकते हैं। इससे उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जो अनजाने में विदेशी संपत्तियों की जानकारी देना भूल गए थे।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस आर्टिकल में दी गई जानकारी बजट 2026 के प्रस्तावों और आधिकारिक घोषणाओं पर आधारित है। टैक्स नियमों में बदलाव तकनीकी होते हैं, इसलिए अपनी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार ITR फाइल करने से पहले किसी प्रमाणित चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या टैक्स सलाहकार से परामर्श जरूर लें।


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