1 नवंबर से Amazon और Flipkart जैसे प्लेटफॉर्म्स पर व्यापार करने वाले छोटे सेलर्स के लिए दूसरे राज्यों में बिजनेस फैलाना बेहद आसान होने जा रहा है। अब सेलर उन राज्यों में भी GST रजिस्ट्रेशन ले सकेंगे जहां उनका अपना कोई ऑफिस या गोदाम नहीं है। इसके लिए उन्हें बस ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के वेयरहाउस को ही अपना मुख्य कारोबारी ठिकाना (Principal Place of Business) घोषित करना होगा। सरकार ने 27 अक्टूबर को जारी नोटिफिकेशन 05/2026-सेंट्रल टैक्स के जरिए GST नियमों में नया Rule 14B जोड़ा है। हालांकि, यह राहत सिर्फ गुड्स (सामान) बेचने वाले व्यापारियों के लिए है और इसमें मंथली इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) पास-थ्रू की लिमिट 2.5 लाख रुपये रखी गई है। ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत उठाया गया यह कदम छोटे कारोबारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
इस सुविधा का फायदा कौन उठा सकता है? जिन सेलर्स का अपने गृह राज्य (Home State) में बिजनेस मौजूद है, वे अन्य राज्यों में भी GST रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं—भले ही वहां उनका अपना कोई सेटअप न हो और माल सिर्फ ई-कॉमर्स कंपनी के वेयरहाउस में रखा हो। इसके लिए ई-कॉमर्स ऑपरेटर को 7 वर्किंग डेज के अंदर अपनी मंजूरी देनी होगी, वरना एप्लीकेशन रद्द हो जाएगी। वेरिफिकेशन की प्रक्रिया सेलर के होम स्टेट में ही पूरी होगी। अगर संबंधित अधिकारी 30 दिनों के भीतर फैसला नहीं लेता है, तो एप्लीकेशन को 'डीम्ड अप्रूव्ड' यानी स्वीकृत मान लिया जाएगा।

Rule 14B: एलिजिबिलिटी, शर्तें और जरूरी फॉर्म
अप्लाई करने के लिए सेलर्स को फॉर्म REG-01 का इस्तेमाल करना होगा और वेयरहाउस के पते को ही अपना मुख्य ठिकाना बताना होगा। ध्यान दें कि अगर आपने पहले Rule 14A के तहत होम-स्टेट वाला आसान रास्ता चुना था, तो पहले फॉर्म REG-32 भरकर उससे बाहर निकलना (withdraw) होगा, तभी Rule 14B में अप्लाई कर पाएंगे। वेयरहाउस बदलने की स्थिति में फॉर्म REG-14 का इस्तेमाल होगा। इसके अलावा, Rule 10A के तहत 30 दिनों के भीतर बैंक अकाउंट की डिटेल्स देना जरूरी है। ITC पास-थ्रू की ₹2.5 लाख की मंथली कैप सिर्फ रजिस्टर्ड बायर्स को ट्रांसफर किए गए टैक्स पर लागू होगी, इसमें डिस्टिंक्ट पर्सन (अलग-अलग यूनिट्स) के बीच होने वाले स्टॉक ट्रांसफर को बाहर रखा गया है।
नियम न मानने का जोखिम और प्रैक्टिकल उदाहरण
लापरवाही बरतने पर फॉर्म REG-38 के तहत रजिस्ट्रेशन रद्द (Deemed Cancellation) भी हो सकता है। यह तब होगा जब ई-कॉमर्स ऑपरेटर अपनी सहमति वापस ले ले, ऑपरेटर का GST या TCS रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाए, आपका होम-स्टेट GSTIN कैंसिल हो जाए या वेयरहाउस बदलने के 30 दिनों के अंदर डिटेल्स अपडेट न की जाएं। हालांकि, Section 52 के तहत लगने वाला TCS पहले की तरह जारी रहेगा। इनवॉइस पर उसी राज्य का GSTIN दर्ज करना होगा, जहां से सप्लाई हो रही है और प्लेस ऑफ सप्लाई डिलीवरी एड्रेस के हिसाब से तय होगा। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र का कोई सेलर अब वेयरहाउस मॉडल के जरिए बिना नया ऑफिस खोले कर्नाटक और दिल्ली में अपना कारोबार फैला सकता है, बस उसे 2.5 लाख रुपये की मंथली कैप पर नजर रखनी होगी।
सेलर्स को सलाह दी जाती है कि वे ई-कॉमर्स ऑपरेटर की कंसेंट (सहमति) का रिकॉर्ड रखें, TCS क्रेडिट का मिलान करें, 2.5 लाख रुपये की मंथली लिमिट पर नजर रखें और योजना से बाहर निकलते समय तुरंत REG-32 फाइल करें। वेयरहाउस को केवल रजिस्ट्रेशन के आधार के रूप में इस्तेमाल करें, लेकिन GST रिटर्न, ई-इनवॉइसिंग और बैंक डिटेल्स को हमेशा अपडेट रखें। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर Rule 14B न सिर्फ कागजी झंझटों और खर्च को कम करेगा, बल्कि छोटे ब्रांड्स को बिना ऑफिस किराए पर लिए या लॉजिस्टिक्स नेटवर्क बनाए नए राज्यों में बिजनेस का विस्तार करने में मदद करेगा।


Click it and Unblock the Notifications