SIP Investment Mistakes: SIP में करते हैं निवेश तो कभी न करें ये 5 छोटी-छोटी गलतियां, वरना हो जाएंगे कंगाल !

SIP Investment Tips: शेयर बाजार में ज्यादातर लोग वैल्थ क्रिएट करने के लिए म्यूचुअल फंड के SPI में निवेश करने का अच्छ ऑप्शन मानते हैं। शहर से लेकर गांव तक हर कोई एसआईपी में निवेश कर रहा है। एसआईपी में निवेश करके लंबे समय में आप बाजार के सभी उतार-चढ़ाव का फायदा लिया जा सकता है और अच्छा रिटर्न हासिल किया जा सकता है, लेकिन अक्सर लोग एसआईपी में निवेश करते समय छोटी-छोटी गलतियां कर देते हैं। आइए आपको भी बताते हैं कि वो कौन-कौन सी गलतियां हैं जो आपको एसआईपी में इंवेस्ट करते समय नहीं करनी चाहिए।

SIP Investment

निवेश के साथ अपनी आर्थिक स्थिति का भी रखें ध्यान (Common Mistakes by SIP Investors)

आपको एसआईपी में निवेश करते समय इस बात का ध्यान रखें कि ज्यादा बड़ी रकम को एक बार में ही निवेश न करें। इससे आपका बजट भी बिगड़ सकता है। आप आपनी आर्थिक स्थिति को देखते हुए निवेश की राशि तय करें। SIP में आसानी से निवेश रकम को बढ़ा या घटा सकते हैं इसलिए इसका फायदा उठाकर आप अपने खर्चों और आर्थिक स्थिति को देखते हुए निवेश करें।

सारा निवेश एक ही जगह पर करने की गलती (SIP Investment Planning)

सारा पैसा एक ही फंड में लगाने से आपके पैसे डुबने का जोखिम अधिक हो जाता है। आप अपने निवेश को डेट, इक्विटी और अन्य एसेट क्लास में बैलेंस करें क्योंकि इससे आप अपना जोखिम काफी हद तक कम कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय विविधता पर जोर देना चाहिए। आपको फंड्स को अपनी रिस्क प्रोफाइल के आधार पर जगह देनी चाहिए।

एक्‍सपेंस रेश्‍यो का भी ध्यान न रखना

म्‍यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले एक्‍सपेंस रेश्‍यो का भी ध्यान रखें। अक्सर ज्यादातर लोग य समझने में गलती कर देते हैं कि अगर किसी फंड का रिटर्न 15 फीसदी या 18 फीसदी है तो आपको भी निवेश करने पर उतना ही फायदा होगा, लेकिन असल में ऐसा नहीं होता है क्‍योंकि इसमें एक्सपेंस रेश्यो आ जाता है। आपके म्‍यूचुअल फंड को मैनेजमेंट का जो भी खर्च आता है उसे एक्‍सपेंस रेश्‍यो कहते है। किसी भी फंड का एक्सपेंस रेश्यो ही ये तय करता है कि आपको कोई फंड कितना सस्ता मिलेगा। एक्‍सपेंस रेश्‍यो कम या ज्‍यादा होने का असर आपके रिटर्न पर भी पड़ता है।

पोर्टफोलियो में मौजूद म्यूचुअल फंड्स को चेक न करना

लंबी समय के लिए अगर आप निवेश कर रहे हैं तो अपने पोर्टफोलियो में मौजूद म्यूचुअल फंड्स को समय-समय पर रिटर्न की चेंकिंग जरूर करें। म्यूचुअल फंड नकारात्मक रिटर्न दे रहा या बाजार के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर रहा तो उसे अपने पोर्टफोलियो से हटाना सही रहता है। अक्सर लोग लॉन्ग टर्म के लिए निवेश नहीं करते हैं और इससे उन्हें अधिक मुनाफा मिलने की संभावना भी कम हो जाती है।

वित्तीय लक्ष्य तय करके निवेश न करना

कई निवेशक जल्दबाजी में गलती म्यूचुअल में निवेश करते समय यह गलती करते हैं कि वे अपना वित्तीय लक्ष्य तय नहीं करते हैं। इस कारण वे अपनी जरूरत के मुताबिक निवेश नहीं कर पाते हैं और उन्हें कम रिटर्न हासिल होता है। साथ ही उन्हें कई बार जोखिम भी उठाना पड़ता है।

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