मथूट फिनकॉर्प (Muthoot FinCorp) का Tranche V सिक्योर्ड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) आज यानी 8 सितंबर 2026 से निवेश के लिए खुल गया है। इसमें 24, 36, 60 और 72 महीनों की अलग-अलग अवधि के लिए 9.25% तक का प्रभावी रिटर्न (Effective Yield) मिल रहा है। कंपनी इस इश्यू के जरिए ₹350 करोड़ के ग्रीन-शू ऑप्शन के साथ कुल ₹700 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। यह एनसीडी 22 सितंबर तक खुला रहेगा, लेकिन तय सीमा से ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिलने पर इसे समय से पहले भी बंद किया जा सकता है। ट्रेडिंग के लिए इन बॉन्ड्स को बीएसई (BSE) पर लिस्ट कराने की योजना है।
इसमें निवेशकों के लिए मंथली, एनुअल और क्यूमुलेटिव (ब्याज जुड़कर मिलने वाला) पेआउट के विकल्प मौजूद हैं। अधिकतम 9.25% का रिटर्न 72 महीने वाले सालाना पेआउट ऑप्शन पर दिया जा रहा है। वहीं, मंथली पेआउट का ऑप्शन चुनने पर 8.56% से 8.88% और एनुअल पेआउट पर 8.90% से 9.25% का ब्याज मिलेगा। क्यूमुलेटिव सीरीज में ब्याज मैच्योरिटी पर कंपाउंड होकर जुड़ता है। सुरक्षा के लिहाज से देखें तो क्रिसिल (Crisil) और ब्रिकवर्क (Brickwork) ने इसे 'AA' कैटेगिरी की रेटिंग दी है, जो समय पर भुगतान के मामले में काफी सुरक्षित मानी जाती है।

मथूट फिनकॉर्प NCD: किसे निवेश करना चाहिए और किसे बचना चाहिए?
अगर आप हर महीने या साल में तय इनकम चाहते हैं, एनबीएफसी (NBFC) से जुड़ा क्रेडिट रिस्क लेने में सहज हैं और मैच्योरिटी तक निवेश बनाए रख सकते हैं, तो यह एनसीडी आपके लिए सही विकल्प हो सकता है। हालांकि यह ध्यान रखें कि 'सिक्योर्ड' का मतलब सिर्फ कंपनी के एसेट्स/रिसीवेबल्स पर चार्ज होता है, यह कोई सरकारी गारंटी नहीं है। सेकेंडरी मार्केट में लिक्विडिटी कम रहने से इसे समय से पहले बेचना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। बैंक एफडी पर जहां DICGC की तरफ से प्रति बैंक ₹5 लाख तक का बीमा कवर मिलता है, वहीं NCD में ऐसी कोई सुरक्षा नहीं होती। रिटेल कैटेगरी में अलॉटमेंट अक्सर 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर होता है और यूपीआई (UPI) से ₹5 लाख तक का आवेदन किया जा सकता है।
FD, डेट फंड, RBI बॉन्ड या NCD: जानें कहां मिल रहा है कितना ब्याज
आइए समझते हैं कि बाजार में मौजूद दूसरे फिक्स्ड इनकम विकल्पों की तुलना में यह कितना फायदेमंद है। आरबीआई फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स (FRSB) की दरें नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) की दर से 35 बेसिस पॉइंट अधिक तय होती हैं। जुलाई–सितंबर 2026 तिमाही के लिए NSC की दर 7.70% है, जिसके हिसाब से जुलाई–दिसंबर 2026 के लिए एफआरएसबी का कूपन रेट 8.05% बैठता है। वहीं बैंक एफडी की दरें अलग-अलग बैंकों और अवधि के हिसाब से बदलती रहती हैं, इसलिए निवेश से पहले मौजूदा दरें जरूर जांच लें।
| निवेश विकल्प | अनुमानित ब्याज दर |
|---|---|
| मथूट फिनकॉर्प NCD (72 महीने, सालाना पेआउट) | 9.25% |
| आरबीआई फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स (मौजूदा कूपन) | 8.05% |
| बड़े बैंक की FD (SBI स्पेशल, 444 दिन) | 6.45% |
| स्मॉल फाइनेंस बैंक FD (अधिकतम) | 8.10% तक |
स्रोतः सीरीज की शर्तें; एनएससी दरें और एफआरएसबी फॉर्मूला; एसबीआई और स्मॉल फाइनेंस बैंकों के हालिया आंकड़े।
टैक्स के नियम और टैक्स के बाद मिलने वाला असली रिटर्न
एनसीडी, बैंक एफडी और आरबीआई बॉन्ड से मिलने वाला ब्याज आपके इनकम टैक्स स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स योग्य होता है। 1 अप्रैल 2023 के बाद से डेट या टारगेट-मैच्योरिटी फंड्स में किए गए नए निवेश पर भी बिना किसी इंडेक्सेशन लाभ के स्लैब रेट के अनुसार ही टैक्स लगता है। बजट 2023 में लिस्टेड डिबेंचर्स से मिलने वाले ब्याज पर टीडीएस (TDS) छूट खत्म कर दी गई थी, इसलिए अब सेक्शन 193 के तहत आमतौर पर 10% टीडीएस काटा जाएगा।
| 9.25% NCD (सालाना पेआउट) | टैक्स कटने के बाद रिटर्न |
|---|---|
| 5% स्लैब | ≈ 8.79% |
| 20% स्लैब | ≈ 7.40% |
| 30% स्लैब | ≈ 6.48% |
आवेदन कैसे करें: टाइमलाइन और जरूरी डॉक्यूमेंट्स की चेकलिस्ट
अप्लाई करने के लिए आपके पास पैन कार्ड, आधार से लिंक मोबाइल नंबर, एक्टिव डीमैट अकाउंट और ₹5 लाख तक की बिडिंग के लिए यूपीआई (UPI) आईडी होनी चाहिए। आप अपने ब्रोकर या बॉन्ड-इन्वेस्टमेंट ऐप्स के जरिए इसमें आसानी से अप्लाई कर सकते हैं। आवेदन करते समय पेआउट मोड और सीरीज का चुनाव ध्यानपूर्वक करें। यह इश्यू समय से पहले बंद हो सकता है और अलॉटमेंट आपके आवेदन करने के समय (टाइमस्टैम्प) के आधार पर होता है। इश्यू बंद होने के बाद सेबी (SEBI) की तेज प्रक्रिया के तहत T+3 वर्किंग डेज के भीतर इसकी बाजार में लिस्टिंग हो सकती है।
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