Health and Life insurance premium may hike: हाल ही में सरकार ने जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर GST रेट को 18% से घटाकर 0% कर दी, जो 22 सितंबर से लागू होगी। माना जा रहा था कि इससे बीमा प्रीमियम 18% सस्ता हो जाएगा। लेकिन अब एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया है।इस रिपोर्ट के अनुसार, प्रीमियम सस्ता होने के बजाय 3 से 5% तक महंगा हो सकता है। यह फैसला आम आदमी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

रिपोर्ट से हुआ खुलासा
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज रिसर्च ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें सुझाव दिया गया है कि बीमा कंपनियां इनपुट टैक्स क्रेडिट के अभाव के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए अपने टैरिफ में 5% तक का संशोधन करने पर विचार कर सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक अनुमानित गणना से पता चलता है कि स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को टैरिफ में 3-5% की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
इसमें आगे कहा गया है कि इससे कंपनियों को मौजूदा मिलने वाले इनपुट टैक्स क्रेडिट के नुकसान की भरपाई करने में मदद मिलेगी। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इसके साथ ही ग्राहकों के लिए कीमत में 12-15% की कमी से स्वास्थ्य बीमा की मांग में संभावित रूप से बढ़ोतरी हो सकती है।
प्रीमियम महंगा क्यों हो सकता है?
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज रिसर्च की एक रिपोर्ट ने इस मामले में चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, बीमा कंपनियां इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ न मिलने से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए अपनी दरों में 3 से 5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं।
फिलहाल बीमा कंपनियां ग्राहकों से वसूले जाने वाले 18% जीएसटी का पूरा 18% सरकार को जमा नहीं करती हैं। वे इससे इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ उठाती हैं। ITC एक प्रकार की टैक्स छूट है जिसका दावा कंपनियां अपने परिचालन खर्चों, जैसे वितरकों के कमीशन, पुनर्बीमा और विज्ञापन पर लगने वाले टैक्स पर करती हैं। इससे उन्हें हर साल करोड़ों रुपये की बचत होती है।


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